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पूर्व सीमा शुल्क अधिकारी रामकुमार सिंह मर्डर केस में मुख्य शूटर समेत तीन दबोचे गए, कोलकाता से बेंगलुरु भागने की थी तैयारीबिहार
22 अक्तू॰ 2026, 9:39 am (23 मिनट पहले)· 0

पूर्व सीमा शुल्क अधिकारी रामकुमार सिंह मर्डर केस में मुख्य शूटर समेत तीन दबोचे गए, कोलकाता से बेंगलुरु भागने की थी तैयारी

आरा में क्षत्रिय कल्याण संघ के अध्यक्ष रामकुमार सिंह हत्याकांड की गुत्थी सुलझाते हुए पुलिस ने मुख्य आरोपी चंदन सिंह और उसके दो साथियों को गिरफ्तार कर लिया है।

बिहार के भोजपुर जिले के आरा शहर में पूर्व कस्टम अधिकारी और क्षत्रिय कल्याण संघ के अध्यक्ष रामकुमार सिंह की गोली मारकर की गई हत्या के मामले में पुलिस को महत्वपूर्ण सफलता हाथ लगी है। विशेष जांच दल ने तकनीकी साक्ष्यों और खुफिया सूचनाओं की मदद से मुख्य शूटर चंदन सिंह समेत तीन अभियुक्तों को हिरासत में ले लिया है। पुलिस के अनुसार दो आरोपियों को उस समय पकड़ा गया जब वे पश्चिम बंगाल के रास्ते दक्षिण भारत भागने के लिए हवाई अड्डे पर मौजूद थे, जबकि तीसरे साथी को स्थानीय स्तर पर घेराबंदी कर दबोचा गया।

हवाई अड्डे पर बिछाया गया जाल और बरामदगी

भोजपुर के पुलिस अधीक्षक अवधेश दीक्षित ने घटना का ब्योरा साझा करते हुए बताया कि रामकुमार सिंह की हत्या को बेहद गंभीरता से लिया गया था। मामले की गहराई से पड़ताल और अभियुक्तों की जल्द से जल्द गिरफ्तारी के लिए सदर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (एसडीपीओ वन) सुशील कुमार के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित की गई थी। इस टीम में जिले के कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी शामिल किए गए थे। तकनीकी अनुसंधान और सर्विलांस के सहारे पुलिस टीम को सूचना मिली कि मुख्य नामजद अभियुक्त चंदन सिंह और उसका सहयोगी अभिषेक यादव राज्य से बाहर निकल चुके हैं।

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एसआईटी ने सुराग जुटाते हुए कोलकाता हवाई अड्डे पर घेराबंदी की और दोनों को उस वक्त गिरफ्तार कर लिया जब वे विमान पकड़कर बेंगलुरु रवाना होने की फिराक में थे। पूछताछ के दौरान पकड़े गए अभियुक्तों ने अपना नाम और पहचान छिपाने की पूरी कोशिश की। चंदन सिंह नगर थाना क्षेत्र के बड़की सिंगही गांव का निवासी है, जबकि अभिषेक यादव उसी थाना क्षेत्र के बिंद टोली का रहने वाला है। इन दोनों की निशानदेही और उनसे मिली जानकारियों के आधार पर पुलिस ने नवादा थाना क्षेत्र के चंदवा हाउसिंग कॉलोनी निवासी टीपू कुमार को आरा से गिरफ्तार कर लिया। टीपू कुमार सरकारी अमीन के पद पर कार्यरत है और वर्तमान में एक जिले में पदस्थापित है। इसके अलावा पुलिस ने चंदन सिंह के आवास पर छापेमारी कर एक पिस्तौल भी बरामद की है, जिसे परीक्षण के लिए भेजा गया है। इस सनसनीखेज हत्याकांड में पुलिस अब तक कुल चार लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है, वहीं अन्य संलिप्त लोगों की तलाश जारी है।

मॉर्निंग वॉक के दौरान गोलियों से छलनी करने की वारदात

यह जघन्य वारदात गुरुवार की सुबह करीब 6 बजे घटित हुई थी। आरा शहर के कनकपुरी मोहल्ले में रहने वाले रामकुमार सिंह हर रोज की तरह सुबह सैर पर जाने की तैयारी कर रहे थे। उन्होंने घर से अपनी कार बाहर निकाली और फिर वाहन को खड़ा करके गैराज के मुख्य गेट पर ताला लगाने लगे। इसी दौरान पहले से घात लगाए बैठे बाइक सवार हथियारबंद बदमाशों ने उन पर अंधाधुंध गोलियां बरसानी शुरू कर दीं। हमलावरों ने उन्हें संभलने का कोई मौका नहीं दिया और शरीर में करीब 7 से 8 गोलियां दागकर फरार हो गए। गोलियों की आवाज से पूरा इलाका दहल उठा और गंभीर रूप से घायल पूर्व अधिकारी ने दम तोड़ दिया।

घटना के तुरंत बाद मृतक के बेटे अमित कुमार उर्फ गोल्डी के बयान के आधार पर संबंधित थाने में 14 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई। दर्ज मुकदमे में चंदन सिंह के अलावा मुफस्सिल थाने के तत्कालीन थानाध्यक्ष इंस्पेक्टर राम कल्याण यादव और राजस्व कर्मचारी विष्णु देव सिंह को भी नामजद किया गया। मृतक के परिजनों ने चंदन सिंह और उसके साथियों पर सीधे तौर पर गोली मारने का आरोप लगाया है, जबकि तत्कालीन थानाध्यक्ष राम कल्याण यादव और राजस्व कर्मी विष्णु देव सिंह पर भू-माफियाओं के साथ मिलकर इस पूरी वारदात की साजिश रचने और अपराधियों को संरक्षण देने का गंभीर आरोप है।

वारदात से पहले की गई थी पूरी आर्थिक और रणनीतिक तैयारी

पुलिस अधीक्षक अवधेश दीक्षित के अनुसार यह हत्या अचानक उपजे गुस्से का परिणाम नहीं थी, बल्कि इसे बेहद ठंडे दिमाग से पूरी योजना बनाकर अंजाम दिया गया था। जांच में सामने आया कि मुख्य आरोपी चंदन सिंह और उसके गिरोह ने 20 से 25 दिन पहले ही वारदात की तैयारी शुरू कर दी थी। पुलिस की वित्तीय जांच से बचने के लिए चंदन सिंह ने अपने बैंक खातों से सारे पैसे निकाल लिए थे और नकदी अपनी पत्नी के खाते में स्थानांतरित कर दी थी। इसके तुरंत बाद उसने अपनी पत्नी और परिवार के अन्य सदस्यों को सुरक्षित स्थानों पर बाहर भेज दिया ताकि घटना के बाद उन पर आंच न आए।

अपराध को अंजाम देने और अपनी पहचान छिपाने के लिए अभियुक्तों ने नए मोबाइल फोन खरीदे और नए सिम कार्ड जारी करवाए। इसके अलावा पैसों के लेन-देन के लिए नए बैंक खाते भी खोले गए थे। हत्या को अंजाम देने के तुरंत बाद चंदन सिंह और अभिषेक यादव बिहार की सीमा पार कर पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी पहुंचे। सिलीगुड़ी के एक होटल में उन्होंने फर्जी नाम और पते दर्ज कराकर कमरा लिया और रुके। वहां से वे सिक्किम की राजधानी गंगटोक गए और कुछ समय बिताने के बाद कोलकाता पहुंचे। कोलकाता हवाई अड्डे पर जब सुरक्षा और पुलिस कर्मियों ने उन्हें रोका तो उन्होंने अपने गलत नाम बताए, लेकिन इलेक्ट्रॉनिक निगरानी के पुख्ता सुबूतों के आगे उनकी चालाकी काम नहीं आई।

करोड़ों की जमीन और फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी का विवाद

पुलिस जांच में इस पूरी खूनी रंजिश की जड़ में जमीन का एक पुराना विवाद सामने आया है। पुलिस अधीक्षक ने स्पष्ट किया कि बड़की सिंगही क्षेत्र में स्थित विवादित जमीन पर रामकुमार सिंह का स्वामित्व वर्ष 2006 से ही चला आ रहा था। उन्होंने वर्ष 2020 में उस पूरी जमीन की चारदीवारी भी करवा दी थी और उस पर उनका कब्जा था। हालांकि, जमीन के दाम बढ़ने के कारण विपक्षी गुट की नजर इस संपत्ति पर थी। विरोधी पक्ष ने वर्ष 2025 में कथित पावर ऑफ अटॉर्नी के आधार पर उस जमीन को फर्जी तरीके से कई अलग-अलग खरीदारों को बेच दिया था। जब पूर्व अधिकारी ने इसका कड़ा विरोध किया और अपने कानूनी अधिकारों की रक्षा के लिए खड़े रहे, तो भू-माफियाओं ने उन्हें रास्ते से हटाने की साजिश रच डाली।

जिले में सक्रिय भू-माफियाओं के खिलाफ कड़े रुख का संकेत देते हुए पुलिस अधीक्षक ने कहा कि जिले में कई ऐसे संगठित गिरोह सक्रिय हैं, जो जमीनों के मूल दस्तावेजों में हेराफेरी कर अवैध कब्जे का धंधा चलाते हैं। ऐसे तत्वों में सरकारी कर्मचारियों और पुलिस कर्मियों की मिलीभगत की भी जांच की जा रही है। पुलिस अब चिन्हित भू-माफियाओं की सूची तैयार कर उन पर संगठित कार्रवाई की योजना बना रही है ताकि भविष्य में ऐसी वारदातों पर रोक लगाई जा सके। रामकुमार सिंह हत्याकांड में पकड़े गए सभी आरोपियों के खिलाफ अदालत में जल्द आरोप पत्र दाखिल किया जाएगा और अभियोजन पक्ष न्यायालय से स्पीडी ट्रायल चलाने की मांग करेगा ताकि दोषियों को कठोर सजा मिल सके।

सवाल-जवाब

रामकुमार सिंह की हत्या कब और कहां हुई थी?
उनकी हत्या गुरुवार सुबह करीब 6 बजे आरा शहर के कनकपुरी मोहल्ले में उनके घर के गैराज के बाहर मॉर्निंग वॉक पर निकलते समय की गई थी।
इस मामले में किन प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है?
पुलिस ने मुख्य आरोपी चंदन सिंह, उसके साथी अभिषेक यादव को कोलकाता हवाई अड्डे से और सरकारी अमीन टीपू कुमार को आरा से गिरफ्तार किया है।
हत्या के पीछे मुख्य कारण क्या था?
बड़की सिंगही स्थित एक जमीन का विवाद मुख्य कारण था, जिस पर 2006 से रामकुमार सिंह का स्वामित्व था लेकिन 2025 में विपक्षियों ने पावर ऑफ अटॉर्नी से उसे दूसरों को बेच दिया था।
आरोपियों ने भागने के लिए क्या योजना बनाई थी?
आरोपी सिलीगुड़ी और गंगटोक में फर्जी नाम से ठहरते हुए कोलकाता पहुंचे थे और वहां से विमान के जरिए बेंगलुरु भागने की फिराक में थे।
इस मामले में कुल कितने लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज है?
मृतक के बेटे अमित कुमार उर्फ गोल्डी के बयान पर तत्कालीन थानाध्यक्ष और राजस्व कर्मचारी सहित कुल 14 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 1

Rohan Verma@rohan-verma·3 मिनट पहले

सरकारी नौकरी वाला आदमी भी ऐसी वारदातों में शामिल मिलने लगा है, अब तो कानून का खौफ ही खत्म हो गया है।

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