भोजपुर में जिंदा बुजुर्ग को सरकारी कागजों में मृत बताकर रोकी वृद्धा पेंशन, दफ्तरों का चक्कर काट रहे ढोला रामबिहार
3 घंटे पहले· 2

भोजपुर में जिंदा बुजुर्ग को सरकारी कागजों में मृत बताकर रोकी वृद्धा पेंशन, दफ्तरों का चक्कर काट रहे ढोला राम

भोजपुर जिले के पिरौटा गांव में सरकारी रिकॉर्ड में जिंदा बुजुर्ग ढोला राम को मृत दिखाकर पिछले कई महीनों से उनकी वृद्धा पेंशन रोक दी गई है, अब वे खुद को जिंदा साबित करने के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं.

बिहार के भोजपुर जिले में सरकारी कागजों ने वह कर दिखाया जो कोई बीमारी या हादसा नहीं कर पाया, एक जिंदा इंसान को रिकॉर्ड में मार डाला. पिरौटा गांव के रहने वाले बुजुर्ग ढोला राम को पेंशन के सरकारी रिकॉर्ड में मृत दिखा दिया गया है, और इस एक गलती ने पिछले कई महीनों से उनकी वृद्धा पेंशन रोक दी है. प्रशासन ने अपनी इस भूल को सुधारने के बजाय बुजुर्ग को खुद जिंदा साबित करने के लिए दफ्तर-दफ्तर भटकने पर मजबूर कर दिया है.

खुद को जिंदा साबित करने की जद्दोजहद

ढोला राम इन दिनों वह काम कर रहे हैं जो उनकी उम्र में किसी को नहीं करना चाहिए, अपनी पहचान के कागजात और जिंदा होने का सबूत लेकर प्रखंड कार्यालय से अंचल और फिर जिला मुख्यालय तक के चक्कर लगाना. लाठी के सहारे चलने वाले ढोला राम कड़कड़ाती धूप में बार-बार यह चक्कर काट रहे हैं, लेकिन हर बार बिना किसी समाधान के लौटना पड़ रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी अमला अपनी गलती मानकर उसे ठीक करने के बजाय बुजुर्ग को एक दफ्तर से दूसरे दफ्तर भेजता रहा.

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केवाईसी कराने गए और पेंशन ही बंद हो गई

फरवरी 2026 तक ढोला राम को हर महीने 1100 रुपये की सामाजिक सुरक्षा वृद्धा पेंशन नियमित रूप से मिल रही थी. जनवरी 2026 में एक जिम्मेदार खाताधारक की तरह वे पंजाब नेशनल बैंक की स्थानीय शाखा गए और अपना अंगूठा लगाकर केवाईसी अपडेट भी करा आए. लेकिन इसके तुरंत बाद उनके खाते में पैसा आना बंद हो गया. शुरुआत में उन्होंने सोचा कि यह कोई तकनीकी दिक्कत होगी, अपने आप ठीक हो जाएगी. लेकिन जब मार्च और फिर अप्रैल, लगातार दो महीने तक भी पेंशन नहीं आई, तो वे बैंक और संबंधित प्रखंड कार्यालय पहुंचे और असलियत जानने की कोशिश की. वहां जो जवाब मिला, उसने उन्हें झकझोर दिया. अधिकारियों ने साफ कह दिया कि सरकारी रिकॉर्ड में उन्हें मृत दिखाया गया है, इसलिए उनकी पेंशन हमेशा के लिए रोक दी गई है.

बुढ़ापे की लाठी और घर का आर्थिक संकट

इस पूरे मामले को और तकलीफदेह यह बनाता है कि ढोला राम की सेहत पहले से ही ठीक नहीं है. बुढ़ापे के कारण उन्हें चलने-फिरने और उठने-बैठने में गंभीर दिक्कत होती है और वे लाठी के सहारे ही चल पाते हैं. उनके परिवार की आर्थिक हालत भी अच्छी नहीं है. परिजनों के मुताबिक हर महीने मिलने वाली यह 1100 रुपये की मामूली रकम ही उनका सबसे बड़ा सहारा थी, जिससे जरूरी दवाइयां और घर का छोटा-मोटा खर्च चल जाता था. पिछले कई महीनों से पेंशन बंद होने के चलते अब पूरे परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है. अधिकारियों की एक छोटी सी लापरवाही की कीमत आज एक पूरा गरीब परिवार चुका रहा है.

ग्रामीणों की मांग, जांच हो और तुरंत मिले न्याय

इस घटना से गांव में गुस्सा है. ग्रामीण मुकेश तिवारी और दूसरे सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस पूरे मामले पर नाराजगी जताई है. ग्रामीणों का कहना है कि बिना किसी भौतिक सत्यापन और बिना मृत्यु प्रमाण पत्र के एक जिंदा इंसान को कागजों पर मृत घोषित कर देना सरकारी तंत्र की घोर लापरवाही को उजागर करता है. उन्होंने भोजपुर के जिला प्रशासन से मांग की है कि इस मामले की जांच कराई जाए, ढोला राम को सरकारी रिकॉर्ड में तुरंत जीवित दर्ज किया जाए और उनकी पूरी रुकी हुई पेंशन राशि एकमुश्त दी जाए.

सिर्फ एक बुजुर्ग का मामला नहीं, सिस्टम पर भरोसे का सवाल

यह मामला सिर्फ एक बुजुर्ग की पेंशन तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी व्यवस्था पर आम लोगों के भरोसे से भी जुड़ा है. हर दिन सैकड़ों लोग ऐसी ही प्रशासनिक परेशानियों से जूझते हैं, लेकिन ऐसी गलतियां न हों, इसके लिए जमीन पर कोई ठोस कवायद दिखाई नहीं देती. अब जब ढोला राम का मामला सामने आ गया है, तो उम्मीद है कि प्रशासन जल्द इस गलती को सुधारेगा, ताकि किसी और बुजुर्ग को अपने जिंदा होने का सबूत देने के लिए दर-दर न भटकना पड़े.

सवाल-जवाब

ढोला राम कौन हैं और वे कहां रहते हैं?
ढोला राम बिहार के भोजपुर जिले के पिरौटा गांव के रहने वाले एक बुजुर्ग हैं.
उनकी वृद्धा पेंशन क्यों बंद हुई?
सरकारी रिकॉर्ड में उन्हें गलती से मृत दिखा दिया गया, जिसके बाद उनकी वृद्धा पेंशन रोक दी गई.
उन्हें हर महीने कितनी पेंशन मिलती थी?
फरवरी 2026 तक उन्हें हर महीने 1100 रुपये की सामाजिक सुरक्षा वृद्धा पेंशन मिल रही थी.
पेंशन आनी कब से बंद है?
जनवरी 2026 में केवाईसी अपडेट कराने के बाद उनके खाते में पेंशन आनी बंद हो गई, और मार्च व अप्रैल में भी पैसा नहीं आया.
उन्होंने केवाईसी कहां और कैसे अपडेट कराई थी?
उन्होंने जनवरी 2026 में पंजाब नेशनल बैंक की स्थानीय शाखा में अपना अंगूठा लगाकर केवाईसी अपडेट कराई थी.
ग्रामीण प्रशासन से क्या मांग कर रहे हैं?
ग्रामीणों ने मामले की जांच कराने, ढोला राम को रिकॉर्ड में तुरंत जीवित दर्ज करने और उनकी पूरी रुकी हुई पेंशन राशि एकमुश्त देने की मांग की है.

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