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बिहार के मुजफ्फरपुर में गंडक नदी का कहर, चक्की सुहागपुर थाने में भरा बाढ़ का पानीबिहार
1 अक्तू॰ 2026, 12:46 am (36 मिनट पहले)· 0

बिहार के मुजफ्फरपुर में गंडक नदी का कहर, चक्की सुहागपुर थाने में भरा बाढ़ का पानी

मुजफ्फरपुर के पारू, साहेबगंज और सरैया प्रखंडों में गंडक नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 97 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गया है, जिससे चक्की सुहागपुर थाने में तीन फीट से अधिक पानी भर गया है।

बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में गंडक नदी के जलस्तर में हुई भारी वृद्धि से पश्चिमी हिस्सों में बाढ़ संकट गहरा गया है। नदी का प्रवाह तेज होने की वजह से जिले के पारू, साहेबगंज और सरैया प्रखंड के कई निचले और ग्रामीण इलाके जलमग्न हो चुके हैं। पारू प्रखंड में स्थित चक्की सुहागपुर थाना परिसर के अंदर तीन फीट से अधिक बाढ़ का पानी जमा हो गया है, जिसके चलते पुलिसकर्मियों को अपने दैनिक कार्यों के निष्पादन और गश्त के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। थाने में अपनी समस्याएं या शिकायत लेकर आने वाले आम नागरिक भी नावों के जरिए ही वहां तक पहुंच पा रहे हैं।

रेवा घाट पर खतरे के निशान से 97 सेंटीमीटर ऊपर बहाव

जल संसाधन विभाग द्वारा जारी किए गए वास्तविक समय के आंकड़ों के मुताबिक रेवा घाट पर गंडक नदी का जलस्तर 55.38 मीटर दर्ज किया गया है। इस इलाके में नदी के खतरे का निशान 54.41 मीटर निर्धारित है, जिसका अर्थ है कि वर्तमान में जलस्तर लाल निशान से करीब 97 सेंटीमीटर ऊपर बना हुआ है। निगरानी आंकड़ों से यह भी संकेत मिल रहा है कि नदी का स्तर लगातार ऊपर की ओर बढ़ रहा है, जिससे तटीय बस्तियों पर दबाव और अधिक बढ़ता जा रहा है।

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थाने और रिहायशी क्षेत्रों में नाव ही आवागमन का साधन

चक्की सुहागपुर थाने के पूरे परिसर और कार्यक्षेत्र में जलभराव की वजह से सामान्य प्रशासनिक कामकाज बुरी तरह प्रभावित हुआ है। तीन फीट से ज्यादा गहरे पानी के बीच पुलिस जवान निगरानी रखने के लिए नावों से गश्त लगा रहे हैं। आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में संपर्क मार्ग डूब जाने के कारण पुलिस और स्थानीय लोगों दोनों के लिए नाव ही आवाजाही का एकमात्र साधन बची है।

हजारों लोग प्रभावित और संपर्क मार्ग बाधित

बाढ़ के इस ताज़ा प्रकोप के चलते चक्की सुहागपुर पंचायत में रहने वाले लगभग 6,500 लोग सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। मुख्य सड़कों पर जलजमाव होने से गांवों का संपर्क पूरी तरह कट गया है। पानी का प्रसार इतना व्यापक है कि सरैया क्षेत्र में स्थित प्रसिद्ध रेवा मंदिर के आसपास के इलाकों में भी बाढ़ का पानी प्रवेश कर चुका है।

पारू और निकटवर्ती बस्तियों में जलस्तर बढ़ने से विस्थापित परिवारों के सामने गंभीर चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। प्रभावित आबादी को सुरक्षित आवागमन के अलावा स्वच्छ पेयजल, भोजन और पालतू मवेशियों के लिए सूखे चारे की भारी किल्लत झेलनी पड़ रही है। स्थानीय जिला प्रशासन और बचाव दल पूरे क्षेत्र में सक्रिय रहकर स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। इससे पहले 28 सितंबर को बगहा के समीप चखनी-खैरटवा में बांध टूटने के कारण रिहायशी इलाकों में पानी का बहाव तेजी से बढ़ा था, जिसकी वजह से पश्चिमी मुजफ्फरपुर समेत आसपास के इलाकों में भी लगातार जोखिम बना हुआ है।

सवाल-जवाब

मुजफ्फरपुर के किस थाने में बाढ़ का पानी घुस गया है?
पारू प्रखंड के चक्की सुहागपुर थाना परिसर में तीन फीट से अधिक पानी भर गया है।
रेवा घाट पर गंडक नदी का जलस्तर कितना दर्ज किया गया है?
रेवा घाट पर जलस्तर 55.38 मीटर दर्ज हुआ है, जो खतरे के निशान 54.41 मीटर से 97 सेंटीमीटर ऊपर है।
मुजफ्फरपुर के कौन-कौन से प्रखंड बाढ़ से प्रभावित हुए हैं?
जिले के साहेबगंज, पारू और सरैया प्रखंड के कई इलाके बाढ़ की चपेट में आए हैं।
चक्की सुहागपुर पंचायत में कितने लोग बाढ़ से प्रभावित हैं?
चक्की सुहागपुर पंचायत में करीब 6,500 लोग बाढ़ की स्थिति से प्रभावित हुए हैं।
क्या पुलिस का कामकाज जारी रखने के लिए नाव का उपयोग हो रहा है?
हां, पुलिसकर्मी गश्त और थाने की आवाजाही के लिए नावों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Pooja Bhatt@pooja-bhatt·3 मिनट पहले

थाने के अंदर तीन फीट पानी भरना और नाव चलना वाकई डराने वाला है, भगवान करे लोग सुरक्षित रहें।

Arjun Mehta@arjun-mehta·9 मिनट पहले

थाने में पानी घुसने और नाव से पुलिस के चलने की नौबत आ गई है, तो सोचिए ग्रामीण इलाकों में क्या हाल होगा। बाढ़ प्रबंधन पर प्रशासनिक तैयारी हमेशा कागजों तक ही क्यों सिमट जाती है?

Ravikash Gupta@ravikash·9 मिनट पहले

अर्जुन, बिल्कुल सही कहा आपने। पिछली बार जब मैं बाढ़ कवर करने गया था, तो देखा था कि थाने जैसी जगहों का भी यही हाल हो जाता है। आम लोगों की मुसीबत का अंदाजा लगाना मुश्किल है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·17 मिनट पहले

मुजफ्फरपुर के उस थाने में पानी भरने की खबर देखकर मुझे साल 2019 की वो बाढ़ याद आ गई जब मैं कवरेज के दौरान खुद घंटों नाव पर फंसा रहा था। पुलिसवालों के लिए थाने में ऐसे काम करना वाकई बहुत मुश्किल होता है।

Rohan Verma@rohan-verma·16 मिनट पहले

करण भाई, थाने में तीन फीट पानी और गश्त के लिए नाव... सोचकर ही सिहरन होती है!

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