बिहार की राजनीति में एक अहम घटनाक्रम के तहत जन सुराज पार्टी ने तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के लिए अपने उम्मीदवार में बदलाव कर दिया है। पार्टी ने अपने पिछले प्रत्याशी की जगह अब श्याम नंदन कुमार यादव को चुनावी मैदान में उतारने का बड़ा फैसला लिया है। यह राजनीतिक फेरबदल तब सामने आया जब मुजफ्फरपुर में आयोजित एक संगठनात्मक बैठक के दौरान पिछले उम्मीदवार की तरफ से शिक्षकों के संबंध में कुछ ऐसे बयान दिए गए जिन्हें पार्टी नेतृत्व ने सिरे से खारिज कर दिया। शिक्षकों के अपमान से जुड़े इस विवाद के बाद पार्टी ने तुरंत कदम उठाते हुए नए उम्मीदवार के नाम का ऐलान कर दिया।
क्यो बदला गया उम्मीदवार और कैसे हुआ फैसला
जन सुराज के प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती ने इस बदलाव के पीछे की पूरी वजह स्पष्ट करते हुए बताया कि जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं से मिल रहे संदेशों और फीडबैक के आधार पर पार्टी ने तिरहुत क्षेत्र के शिक्षक चुनाव के लिए श्याम नंदन कुमार यादव को उम्मीदवार बनाने का पक्का निर्णय लिया है। उन्होंने अपनी बात रखते हुए कहा कि पार्टी ने हाल ही में तीन प्रत्याशियों की दूसरी सूची जारी की थी, लेकिन बाद में पार्टी साथियों और कार्यकर्ताओं के आग्रह पर इस बदलाव पर मुहर लगाई गई।
मनोज भारती ने नए प्रत्याशी की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए बताया कि श्याम नंदन कुमार यादव के छोटे भाई प्रमोद यादव को मरणोपरांत वीरता मेडल से सम्मानित किया जा चुका है जो कारगिल युद्ध के दौरान देश के लिए शहीद हुए थे। इसके साथ ही नए उम्मीदवार खुद भी कई शिक्षण संस्थानों से जुड़े हुए हैं और एक प्राचार्य के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। पार्टी ने इस पृष्ठभूमि का सम्मान करते हुए उन्हें अपना उम्मीदवार बनाया है।
नए उम्मीदवार श्याम नंदन यादव की प्रतिक्रिया
प्रत्याशी बनाए जाने के बाद श्याम नंदन यादव ने प्रशांत किशोर, प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती और पार्टी के तमाम वरिष्ठ नेताओं के प्रति आभार जताया। उन्होंने विश्वास दिलाया कि पार्टी ने उन पर जो भरोसा जताया है, वे उस उम्मीद पर पूरी तरह खरा उतरेंगे और संगठन के साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ेंगे। अपनी पारिवारिक पृष्ठभूमि का जिक्र करते हुए उन्होंने गर्व से कहा कि वे एक ऐसे परिवार से ताल्लुक रखते हैं जहां चार भाइयों में से तीन भारतीय सेना में रहे और एक भाई ने देश की रक्षा करते हुए कारगिल युद्ध में अपने प्राण न्यौछावर कर दिए।
पार्टी नेताओं का पक्ष और पुराना विवाद
जन सुराज के वरिष्ठ नेता रामबली चंद्रवंशी ने पार्टी की कार्यशैली पर जोर देते हुए कहा कि संगठन अपनी मूल सोच और सिद्धांतों के अनुरूप ही आगे बढ़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि देश की कोई अन्य राजनीतिक पार्टी इतनी लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत अपने उम्मीदवारों का चयन नहीं करती जितनी पारदर्शिता जन सुराज में अपनाई जाती है। पार्टी सही व्यक्ति, सही सोच और सामूहिक प्रयास के फार्मूले पर काम करती है और जब तक बेहतर विकल्प की गुंजाइश रहती है, तब तक बदलाव करने से भी गुरेज नहीं करती। उन्होंने साफ किया कि मुजफ्फरपुर की बैठक के दौरान भूषण झा ने शिक्षकों को लेकर जो अपमानजनक बातें कहीं थीं, वे पार्टी के लिए कतई स्वीकार्य नहीं थीं।
पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता जन सुराज के अनुसार, पूर्व प्रत्याशी भूषण झा स्वतंत्र रूप से चुनाव मैदान में उतरना चाहते थे। उन्होंने मुजफ्फरपुर की बैठक में यह शिकायत भी की थी कि उन्हें अपनी बात पूरी तरह रखने का मौका नहीं दिया गया। उसी बैठक में उन्होंने शिक्षकों के बारे में विवादास्पद टिप्पणी करते हुए कहा था कि शिक्षकों का क्या है उन्हें तो केवल अपना पेट भरने से मतलब होता है। पार्टी का मानना है कि स्नातक और शिक्षक वर्ग को लेकर इस तरह की अस्वीकार्य भाषा किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जा सकती है, जिसके चलते यह कड़ा निर्णय लिया गया।



















