नई दिल्ली के घरों में अक्सर लोग अपनी छत, बालकनी या आंगन में हरी सब्जियां और फल उगाने का शौक रखते हैं। पौधे हरे-भरे हो जाते हैं और उन पर फल भी आने लगते हैं, लेकिन कई बार एक बड़ी निराशा हाथ लगती है जब सब्जी का आकार महज एक छोटी उंगली जितना ही रह जाता है। इसके बाद बिना पूरा विकसित हुए वह फल या सब्जी वहीं पर पीली पड़कर सड़ जाती है। बागवानी से जुड़े इस आम संकट से कई लोग परेशान रहते हैं कि आखिर पौधे को पर्याप्त धूप और पानी देने के बावजूद ऐसा क्यों होता है।
विशेषज्ञों की राय और असली वजह
इस आम समस्या के पीछे छिपे वैज्ञानिक कारणों को समझने के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान यानी दिल्ली पूसा के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. जोगेंद्र सिंह राठौड़ से जानकारी ली गई। उन्होंने बताया कि उनके पास अक्सर ऐसी शिकायतें पहुंचती हैं जहाँ लोगों ने पूरी मेहनत और सही प्रक्रिया के साथ अपने आंगन या बालकनी में पौधे लगाए थे, फिर भी फल का आकार नहीं बढ़ पाया। खेतों में यह परेशानी फिर भी कम नजर आती है, लेकिन शहरी इलाकों में घरों की छतों और बालकनी में बागवानी करने वालों को इस बाधा का सामना सबसे ज्यादा करना पड़ता है।
परागण की प्रक्रिया का महत्व
फलों और सब्जियों के उचित विकास के लिए परागण एक बेहद महत्वपूर्ण जैविक प्रक्रिया है। परागण के दौरान किसी फूल के नर भाग से परागकण निकलकर उसी या दूसरे फूल के मादा भाग तक पहुंचते हैं, जिसके बाद ही फल और बीज बनने की असली प्रक्रिया शुरू होती है। प्रकृति में मधुमक्खियां इस काम में बहुत बड़ी भूमिका निभाती हैं। जब ये कीट फूलों पर बैठकर उनका रस चूसते हैं, तो उनके पैरों और शरीर पर लगे परागकण अन्य फूलों तक आसानी से स्थानांतरित हो जाते हैं।
किन फसलों में होती है ज्यादा जरूरत
खीरा, कद्दू, लौकी, तोरई, तरबूज और खरबूजा जैसी कई प्रमुख फसलों में मधुमक्खियां परागण के लिए विशेष रूप से मददगार साबित होती हैं। यदि आप अपनी बालकनी या छत पर ऐसी फसलें उगा रहे हैं और वहां तक मधुमक्खियां नहीं पहुंच पा रही हैं, तो परागण रुक जाता है। ऐसे मामलों में कृत्रिम रूप से परागण कराना बेहद जरूरी हो जाता है, जिसमें मादा पुष्प पर नर पुष्प को केवल स्पर्श करवा देना भी पर्याप्त माना जाता है।
नर और मादा फूलों की पहचान
लौकी, तोरई, कद्दू और खीरा जैसी बेल वाली फसलों में नर और मादा फूल अलग-अलग होते हैं। नर फूल की पहचान उसके लंबे और पतले डंठल से होती है, जबकि मादा फूल के निचले हिस्से में एक छोटी-सी फल जैसी संरचना साफ दिखाई देती है। सुबह के समय नर फूल के भीतर मौजूद परागकणों को एक छोटे, मुलायम ब्रश या कॉटन बड की सहायता से निकालें और इसे मादा फूल के केंद्रीय हिस्से पर बहुत हल्के हाथों से लगा दें।
बैंगन और मिर्च के लिए तरीका
इसके विपरीत, बैंगन और मिर्च जैसे पौधों में फूल की बनावट अलग होती है, इसलिए इनमें परागण का तरीका भी थोड़ा भिन्न होता है। बैंगन और मिर्च के पौधों में फूलों को सुबह के वक्त हल्के से हिलाना ही अक्सर परागण के लिए काफी साबित होता है। यदि आप चाहें तो बहुत ही मुलायम ब्रश का इस्तेमाल करके फूल के अंदरूनी हिस्से को हल्का सा स्पर्श भी करवा सकते हैं, जिससे परागण प्रक्रिया पूरी हो जाती है।
बालकनी में कीटों को कैसे आकर्षित करें
अब मुख्य सवाल यह उठता है कि शहरी घरों की बालकनी या छत पर प्राकृतिक रूप से मधुमक्खियों और अन्य परागण करने वाले कीटों को कैसे बुलाया जाए। इस बारे में विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि अपनी बालकनी के बगीचे में गेंदे, तुलसी, सूरजमुखी और ज़िनिया जैसे अधिक फूल वाले पौधे जरूर लगाएं। इसके अलावा, पौधों पर रासायनिक कीटनाशकों का अनावश्यक छिड़काव करने से बचें, क्योंकि ये रसायन परागण में मदद करने वाले उपयोगी कीटों को नुकसान पहुंचाकर उनकी संख्या घटा देते हैं।















