बिहार के राजनीतिक गलियारों में उस समय हलचल तेज हो गई जब मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े एक कर्मचारी पर गंभीर धाराओं के तहत कानूनी कार्रवाई की गई। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के आधिकारिक एक्स हैंडल और सोशल मीडिया पेजों पर जमुई की एक पीड़ित नाबालिग लड़की के परिवार के साथ मुलाकात की तस्वीरें साझा कर दी गई थीं। इन तस्वीरों के जरिए पीड़िता की पहचान सार्वजनिक होने का मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया और फौरन कदम उठाए गए। इस सिलसिले में मुख्यमंत्री कार्यालय में कार्यरत स्टेनोग्राफर सागर प्रसाद के खिलाफ औपचारिक रूप से मुकदमा दर्ज किया गया है, साथ ही उन अन्य सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं और पेजों पर भी शिकंजा कसा गया है जिन्होंने इस तस्वीर को विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर प्रसारित किया था।
दूसरी ओर, इस पूरे घटनाक्रम के बीच राजनीतिक सरगर्मी भी चरम पर पहुंच गई है। विपक्षी दल की ओर से राजद सांसद मीसा भारती इस मामले में थाने का रुख कर चुकी हैं ताकि अपनी ओर से शिकायत दर्ज कराई जा सके। हालांकि, उनका आरोप रहा कि स्थानीय प्रशासन उन्हें इधर-उधर टहला रहा है और उनकी शिकायत को स्वीकार नहीं कर रहा है। इसी बीच, भारतीय जनता पार्टी की तरफ से मोर्चा संभालते हुए प्रवक्ता नीरज कुमार शर्मा ने मीसा भारती के रुख पर कड़ा एترض जताया। उन्होंने सवाल उठाया कि पूर्व के शासनकाल से जुड़े नेताओं को इस तरह की संवेदनशील और पीड़ित से जुड़ी तस्वीरों को सार्वजनिक रूप से दोबारा प्रसारित करने का अधिकार किसने दिया। भाजपा प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि जैसे ही यह मामला मुख्यमंत्री के संज्ञान में आया, तुरंत संबंधित कर्मचारी को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया और उस पर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की गई, लेकिन इस संवेदनशील मुद्दे पर राजनीति करना उचित नहीं है।
पीड़ित परिवार का दर्द और न्याय की गुहार
इससे पहले, जमुई जिले में घटी इस अत्यंत संवेदनशील यौन उत्पीड़न की घटना के बाद पीड़िता के माता-पिता ने सीधे राज्य के मुखिया से मुलाकात की थी। उन्होंने मुख्यमंत्री के सामने अपनी बात रखते हुए दोषियों के खिलाफ अत्यंत कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की। परिवार का कहना है कि उनकी बेटी को इस कठिन दौर से गुजरना पड़ा है और ऐसा कुकृत्य करने वालों को बिल्कुल बख्शा नहीं जाना चाहिए। माता-पिता ने मांग की कि अपराधियों को भी उसी प्रकार के भय और मानसिक प्रताड़ना का अहसास होना चाहिए जो उन्होंने एक नाबालिग बच्ची को दिया है।
घटना की भयावहता को याद करते हुए पीड़िता की मां ने अपनी पीड़ा साझा की और कहा कि जो कुछ उनकी बेटी के साथ बीता है, वैसा दुर्भाग्य किसी और परिवार की संतान के साथ नहीं होना चाहिए। उन्होंने बताया कि जब उनकी बेटी अपराधियों के सामने गिड़गिड़ा रही थी, तब किसी को दया नहीं आई, इसलिए अब उन अपराधियों को भी उसी तरह न्याय के सामने गिड़गिड़ाना चाहिए। ऐसे तत्वों के मन में कानून का डर बिठाने के लिए प्रशासन को बेहद सख्त कदम उठाने की जरूरत है ताकि भविष्य में कोई ऐसी घिनौनी हरकत करने की हिम्मत न जुटा सके।
प्रशासनिक और सुरक्षात्मक आश्वासन
मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री ने पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाया और उनकी बेटी की सुरक्षा तथा भविष्य की शिक्षा को लेकर पूरी तरह आश्वस्त किया। परिवार के सदस्यों के अनुसार, प्रशासन की तरफ से उन्हें यह भरोसा दिलाया गया है कि राज्य सरकार इस कठिन घड़ी में उनके साथ मजबूती से खड़ी है और उनकी बेटी को उचित न्याय दिलाया जाएगा। अधिकारियों और नेताओं ने परिवार को हरसंभव सहायता और सुरक्षा मुहैया कराने का वादा किया है ताकि वे बिना किसी भय के रह सकें।
कोचिंग से लौटते समय हुआ था अपराध
यह गंभीर घटनाक्रम 19 सितंबर को उस समय शुरू हुआ जब दोनों नाबालिग छात्र और छात्रा अपनी कोचिंग क्लास से पढ़ाई पूरी करके घर वापस लौट रहे थे। रास्ते में उनके साथ अभद्रता की गई और बाद में इस घटना से जुड़ा एक वीडियो इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो गया, जिससे पूरे समाज और आम नागरिकों में भारी रोष व्याप्त हो गया। इस मामले में पुलिस पहले ही कुछ गिरफ्तारियां कर चुकी है और एसआईटी की टीमें लगातार अपनी जांच को आगे बढ़ा रही हैं।
सोशल मीडिया पर व्यापक कार्रवाई और वर्चुअल निगरानी
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और विशेष जांच दल ने अपनी तफ्तीश तेज कर दी है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने उस घटनास्थल का प्रत्यक्ष मुआयना किया जहां नाबालिग छात्रा और उसके साथी को परेशान किया गया था। इसके साथ ही, इस पूरी घटना के वीडियो को सोशल मीडिया पर वायरल करने वाले तत्वों के खिलाफ भी बड़े पैमाने पर कानूनी शिकंजा कसा जा रहा है। पुलिस ने कुल 120 सोशल मीडिया हैंडल्स की पहचान करते हुए उनके खिलाफ मामले दर्ज किए हैं। इन खातों में 13 फेसबुक अकाउंट्स, 12 इंस्टाग्राम प्रोफाइल और 7 ट्विटर हैंडल शामिल हैं जिनके माध्यम से पीड़िता का आपत्तिजनक वीडियो इंटरनेट पर प्रसारित किया गया था। प्रशासन इन सभी डिजिटल माध्यमों पर कड़ी नजर रख रहा है ताकि भविष्य में इस तरह की संवेदनहीनता और नियमों के उल्लंघन पर रोक लगाई जा सके।



















