दिल्ली विश्वविद्यालय के नॉर्थ और साउथ कैंपस में छात्र संघ चुनाव 2026 को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई हैं। कॉलेजों की कैंटीन, नुक्कड़ और पार्कों में चुनावी बहस का दौर जारी है। इस बार केंद्रीय पैनल के चार प्रमुख पदों अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव के लिए कुल 20 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। मैदान में उतरे प्रत्याशियों की पृष्ठभूमि काफी विविध है, जिसमें राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी, कानून की पढ़ाई कर रहे छात्र और कई वैचारिक संगठनों के सक्रिय कार्यकर्ता शामिल हैं।
अध्यक्ष पद पर त्रिकोणीय मुकाबला
अध्यक्ष पद की कुर्सी के लिए इस बार 7 उम्मीदवार मैदान में ताल ठोक रहे हैं। मुख्य मुकाबला अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी), नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) और वामपंथी छात्र गठबंधन (आइसा-एसएफआई) के बीच माना जा रहा है।
- यश डबास (एबीवीपी): बौद्ध अध्ययन विभाग (डिपार्टमेंट ऑफ बुद्धिस्ट स्टडीज) के छात्र यश मूल रूप से कंझावाला के रहने वाले हैं और टेनिस खिलाड़ी के तौर पर खेल की पृष्ठभूमि से आते हैं।
- विजय शंकर मीणा (एनएसयूआई): यह भी बौद्ध अध्ययन विभाग से जुड़े हैं और मूल रूप से राजस्थान के निवासी हैं।
- अनन्या रतूड़ी (आइसा-एसएफआई गठबंधन): पीजीडीएवी कॉलेज की छात्रा अनन्या वामपंथी मोर्चे की तरफ से अध्यक्ष पद की मुख्य उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ रही हैं।
उपाध्यक्ष और सचिव पद के दावेदार
उपाध्यक्ष पद के लिए कुल 5 प्रत्याशियों के बीच चुनावी जंग है। इस पद पर एबीवीपी के इशू मौर्य और एनएसयूआई के वीर चतरथ के बीच सीधा मुकाबला देखा जा रहा है। इशू मौर्य कैंपस लॉ सेंटर के छात्र हैं और इससे पहले सत्यवती कॉलेज (मॉर्निंग) के अध्यक्ष भी रह चुके हैं, जबकि वीर चतरथ बौद्ध अध्ययन विभाग के छात्र हैं।
सचिव पद की बात करें तो एबीवीपी ने श्री अरबिंदो कॉलेज की बास्केटबॉल खिलाड़ी रिया छाबड़ी को चुनाव मैदान में उतारा है, जो अपनी ऊर्जावान पहचान के लिए जानी जाती हैं। उनके सामने एनएसयूआई की तरफ से नम्रता चौधरी और वामपंथी गठबंधन की ओर से स्टेंजिन डेस्क्योंग चुनौती पेश कर रही हैं।
संयुक्त सचिव पद और बौद्ध अध्ययन विभाग की भूमिका
संयुक्त सचिव पद के लिए एबीवीपी के उम्मीदवार लक्ष्यराज सिंह हैं, जो कैंपस लॉ सेंटर से पढ़ाई कर रहे हैं। लक्ष्यराज राष्ट्रीय स्तर के हैंडबॉल खिलाड़ी रहे हैं और एशियन गेम्स तथा वर्ल्ड चैंपियनशिप से जुड़े रहे हैं। इस पद पर उनके सामने एनएसयूआई के प्रत्याशी गोपाल चौधरी के अलावा अन्य निर्दलीय उम्मीदवार भी मैदान में डटे हैं।
इस पूरे चुनाव में डिपार्टमेंट ऑफ बुद्धिस्ट स्टडीज एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है, जहां से कई अहम पदों के उम्मीदवार नामांकित हैं और अपने चुनावी अभियान को आगे बढ़ा रहे हैं। कैंपस की राजनीति में खेल और विधि संकाय से जुड़े युवाओं की बढ़ती भागीदारी इस बार के छात्र संघ दंगल को खास बना रही है।


















