बिहार के ऐतिहासिक धार्मिक स्थल बोधगया में नया पर्यटन सत्र शुरू होते ही रौनक अपने चरम पर पहुंचने लगी है। यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल महाबोधि मंदिर परिसर को इस अवसर पर भव्य और आकर्षक रूप दिया गया है। विशेष रूप से थाईलैंड से मंगवाए गए ताजे फूलों और अत्याधुनिक रंग-बिरंगी रोशनी के समन्वय ने पूरे तीर्थ क्षेत्र को आध्यात्मिक आभा से भर दिया है। शाम ढलते ही रोशनी से नहाया यह पावन स्थल देशी और विदेशी पर्यटकों के लिए सबसे बड़ा आकर्षण बन चुका है, जहां आने वाले श्रद्धालु इस मनमोहक दृश्य को अपने कैमरों और यादों में संजो रहे हैं।
थाईलैंड के फूलों और विशेष लाइटिंग से निखरा स्वरूप
पर्यटन सीजन के आगमन को ध्यान में रखकर मंदिर प्रबंधन द्वारा व्यापक स्तर पर सौंदर्य प्रसाधन कार्य किए गए हैं। महाबोधि मंदिर के प्रमुख संरचनात्मक हिस्सों, प्रदक्षिणा पथ और आसपास के समूचे उद्यान परिसर को बहुरंगी रोशनी से सुसज्जित किया गया है। रात के अंधकार में जब यह रोशनी ऐतिहासिक स्तूप और दीवारों पर पड़ती है, तो मंदिर की भव्यता कई गुना बढ़ जाती है। दूर-दराज से आने वाले सैलानी केवल दर्शन ही नहीं, बल्कि शाम की शांति और साधना के पलों का आनंद लेने के लिए भी यहां घंटों बिता रहे हैं।
विभिन्न बौद्ध राष्ट्रों से उमड़ रहे श्रद्धालु
इस समय बोधगया में अंतरराष्ट्रीय बौद्ध समुदाय की सक्रिय उपस्थिति देखी जा रही है। थाईलैंड, म्यांमार, वियतनाम, भूटान सहित कई अन्य देशों से बौद्ध अनुयायी, भिक्षु और साधारण पर्यटक लगातार पहुंच रहे हैं। पवित्र महाबोधि मंदिर के गर्भगृह में विशेष पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालु बोधिवृक्ष की छाया में बैठकर ध्यान साधना में लीन दिखाई देते हैं। मंदिर की ताजी सजावट ने इस पूरे इलाके के आध्यात्मिक वातावरण को एक नया जीवन प्रदान किया है।
आगामी धार्मिक उत्सव और अंतरराष्ट्रीय आयोजन
महाबोधि मंदिर में इस तरह की भव्य सजावट पारंपरिक रूप से अंतरराष्ट्रीय त्रिपिटक पाठ और महाकठिन चीवरदान जैसे बड़े आयोजनों के समय भी की जाती रही है। चालू पर्यटन सत्र में भी उसी उच्च स्तर की सजावट को बनाए रखा गया है ताकि यहां आने वाले हर व्यक्ति को एक अविस्मरणीय अनुभव प्राप्त हो सके।
मंदिर के केयरटेकर भंते दिनानंद ने सोमवार को जानकारी साझा करते हुए बताया कि पर्यटन सत्र के मद्देनजर थाईलैंड से खास तौर पर मंगाई गई सजावटी लाइटों और फूलों से मंदिर को सजाया गया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आने वाले दिनों में श्रद्धालुओं की आवक में और तेजी आएगी, क्योंकि पर्यटन सीजन के दौरान कई बौद्ध देशों के प्रतिनिधिमंडलों द्वारा यहां विशिष्ट धार्मिक अनुष्ठान और सामूहिक पूजा आयोजित करने की रूपरेखा तैयार की गई है।



















