चित्रकूट स्थित रानीपुर टाइगर रिजर्व में वन्यजीव संरक्षण अभियान को एक बड़ी सफलता मिली है। लखीमपुर खीरी के दुधवा नेशनल पार्क से रेस्क्यू की गई एक मादा तेंदुआ को रानीपुर के मानिकपुर वन प्रभाग में सुरक्षित रूप से छोड़ दिया गया है। लखीमपुर के रिहाइशी इलाकों में लगातार मवेशियों का शिकार कर रही इस तेंदुआ को पकड़ने के बाद विशेष सुरक्षा घेरे में चित्रकूट लाया गया। कल्याणपुर और धारकुंडी के घने जंगलों में इसके प्रवेश के साथ ही रानीपुर टाइगर रिजर्व में तेंदुओं की कुल संख्या अब 83 हो गई है।
लखीमपुर खीरी के मूर्तिहा गांव में फैला था खौफ
वन विभाग से प्राप्त विवरण के अनुसार, यह मादा तेंदुआ दुधवा नेशनल पार्क के गौरीफंटा बफर क्षेत्र में काफी समय से चहलकदमी कर रही थी। बेलराया वन रेंज के तहत आने वाले मूर्तिहा गांव और उसके आसपास के इलाकों में यह तेंदुआ पिछले करीब एक महीने से लगातार घूम रहा था। इस अवधि में उसने कई ग्रामीण मवेशियों को अपना शिकार बनाया। हर दिन मवेशियों के मारे जाने से स्थानीय निवासियों और किसानों के बीच भारी दहशत फैल गई थी, जिससे लोग शाम ढलते ही घरों में कैद होने को मजबूर थे।
बकरी का चारा देकर चलाया गया रेस्क्यू ऑपरेशन
ग्रामीणों की सुरक्षा और तेंदुए को सुरक्षित पकड़ने के लिए वन विभाग की रेस्क्यू टीम ने त्वरित रणनीति बनाई। वन कर्मियों ने गांव के सीमावर्ती क्षेत्र में एक मजबूत पिंजरा स्थापित किया और उसमें एक बकरी को बांध दिया। तेंदुए ने जैसे ही शिकार के लालच में पिंजरे के भीतर कदम रखा, वह उसमें सुरक्षित रूप से कैद हो गई। इसके पश्चात दुधवा नेशनल पार्क के विशेषज्ञों और वन अधिकारियों की टीम एक विशेष रूप से तैयार पिंजरे वाले वाहन में तेंदुए को लेकर चित्रकूट के मानिकपुर वन प्रभाग के लिए रवाना हुई।
कल्याणपुर-धारकुंडी के चवरी क्षेत्र में छोड़ा गया
चित्रकूट पहुंचने पर दुधवा की टीम ने रानीपुर टाइगर रिजर्व के स्थानीय अधिकारियों और कर्मचारियों से संपर्क किया। दोनों टीमों की देखरेख में तेंदुए के वाहन को कल्याणपुर बीट के चवरी क्षेत्र ले जाया गया। कल्याणपुर और धारकुंडी का यह पूरा वन क्षेत्र प्राकृतिक जल स्रोतों और घने वृक्षों से आच्छादित है, जो वन्यजीवों के अनुकूल माना जाता है। वरिष्ठ वन अधिकारियों की उपस्थिति में पिंजरे का दरवाजा खोलते ही मादा तेंदुआ तेजी से छलांग लगाते हुए घने जंगल की ओर चली गई।
कैमरा ट्रैप आंकड़ों में दर्ज हुआ 83वां तेंदुआ
इस पूरे घटनाक्रम पर जानकारी देते हुए क्षेत्रीय वनाधिकारी सुशील कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि रानीपुर टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों की निगरानी के लिए कैमरा ट्रैप तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। हालिया आंकड़ों के मुताबिक रिजर्व में 82 तेंदुओं की मौजूदगी दर्ज की गई थी। अब दुधवा से आई इस नई मादा तेंदुआ के सुरक्षित पुनर्वास के बाद यहां तेंदुओं की संख्या बढ़कर 83 हो गई है। वन विभाग इसे क्षेत्र में पारिस्थितिक संतुलन और वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक सकारात्मक उपलब्धि मान रहा है।
पर्यटन हब बनने की ओर अग्रसर उत्तर प्रदेश का चौथा टाइगर रिजर्व
उल्लेखनीय है कि चित्रकूट का रानीपुर टाइगर रिजर्व उत्तर प्रदेश का चौथा अधिसूचित टाइगर रिजर्व है। हाल के दिनों में इस संरक्षित क्षेत्र में बाघ, तेंदुआ, भालू तथा अन्य दुर्लभ वन्य जीवों की आबादी में लगातार वृद्धि देखी गई है। जंगल में वन्यजीवों की बढ़ती गतिविधि को देखने के लिए अब बड़ी संख्या में वन्यजीव प्रेमी और पर्यटक सफारी का लुत्फ उठाने आ रहे हैं। वन विभाग और स्थानीय प्रशासन का मानना है कि आने वाले कुछ ही वर्षों में रानीपुर टाइगर रिजर्व देश भर के पर्यटकों के लिए एक प्रमुख आकर्षण केंद्र बनकर उभरेगा।


















