बिहार पुलिस के शीर्ष पद पर बड़ा प्रशासनिक बदलाव देखने को मिला है। राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) विनय कुमार ने अपने निर्धारित कार्यकाल से पहले ही स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) ले ली है। इसके तुरंत बाद राज्य प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए उन्हें बिहार का नया मुख्य सूचना आयुक्त (सीआईसी) नियुक्त करने का आदेश जारी कर दिया। वह कार्यभार संभालने के दिन से इस संवैधानिक जिम्मेदारी का निर्वहन करेंगे।
स्वास्थ्य कारणों का हवाला और नोटिस अवधि में विशेष छूट
गृह विभाग की ओर से शनिवार देर रात जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, 1991 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी विनय कुमार ने हाल ही में स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों के चलते अवकाश लिया था। छुट्टी पर रहने के दौरान ही उन्होंने 25 सितंबर को सेवा से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए औपचारिक आवेदन राज्य सरकार को सौंपा था। सरकार ने उनके इस अनुरोध पर त्वरित निर्णय लेते हुए वीआरएस को तत्काल प्रभाव से अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी।
अखिल भारतीय सेवा (मृत्यु-सह-सेवानिवृत्ति लाभ) नियमावली, 1958 के वैधानिक प्रावधानों के मुताबिक, किसी भी अधिकारी को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए कम से कम तीन महीने पहले सरकार को अग्रिम नोटिस देना अनिवार्य होता है। हालांकि, विनय कुमार के मामले की तात्कालिकता और परिस्थितियों को देखते हुए राज्य प्रशासन ने इस तीन महीने के नोटिस संबंधी नियम में विशेष छूट प्रदान की। इसी छूट के आधार पर उनका त्यागपत्र तुरंत प्रभाव से मंजूर किया गया।
चयन समिति की सहमति और सूचना आयोग में नियुक्तियां
सामान्य प्रशासन विभाग ने अलग से अधिसूचना जारी कर विनय कुमार की मुख्य सूचना आयुक्त पद पर नियुक्ति की विधिवत घोषणा की। इस उच्च स्तरीय पद के लिए 25 सितंबर, शुक्रवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में गठित तीन सदस्यीय चयन समिति की बैठक आयोजित की गई थी। इस महत्वपूर्ण बैठक में उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव भी व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहे। चयन समिति के सभी सदस्यों के बीच सहमति बनने के बाद ही नियुक्ति की कागजी प्रक्रिया पूरी की गई।
बिहार राज्य सूचना आयोग में मुख्य सूचना आयुक्त का सर्वोच्च पद पूर्व मुख्य सचिव त्रिपुरारी शरण का कार्यकाल जून महीने में समाप्त होने के बाद से रिक्त पड़ा था। इसके अलावा सूचना के अधिकार तंत्र को मजबूत करने के लिए न्यायिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी और राज्य के विधि विभाग के पूर्व सचिव अंजनी कुमार सिंह को राज्य सूचना आयुक्त बनाने के प्रस्ताव को भी आधिकारिक हरी झंडी दे दी गई है। इन दोनों नियुक्तियों के माध्यम से आयोग में लंबे समय से लंबित मामलों के निस्तारण में तेजी आने की उम्मीद है।
प्रीता वर्मा के पास डीजीपी का प्रभार और अवकाश की स्थिति
विनय कुमार 15 सितंबर से 21 दिनों के अर्जित अवकाश पर चले गए थे, जो 5 अक्टूबर तक चलने वाला था। उनके अवकाश पर जाने के तुरंत बाद प्रशासनिक निरंतरता बनाए रखने के लिए वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी प्रीता वर्मा को 15 सितंबर से ही डीजीपी पद का अतिरिक्त दायित्व सौंपा गया था। प्रीता वर्मा वर्तमान समय में बिहार की महानिदेशक-सह-महासमादेष्टा, गृह रक्षा वाहिनी एवं अग्निशमन सेवाएं के पद पर कार्यरत हैं। अब विनय कुमार की वीआरएस अर्जी मंजूर हो जाने के बाद उनका डीजीपी पद पर पुनः वापसी का विकल्प समाप्त हो गया है।
वैशाली से आईआईटी खड़गपुर तक का सफर
मूल रूप से बिहार के वैशाली जिले के रहने वाले विनय कुमार का नियमित सेवाकाल दिसंबर 2026 में पूरा होना निर्धारित था। उन्होंने देश के प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी खड़गपुर से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की थी। इसके बाद 1991 में उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा पास कर पुलिस सेवा की राह चुनी। पुलिस विभाग के सर्वोच्च पद से समय पूर्व हटने के बाद अब वह राज्य में पारदर्शिता और सूचना के अधिकार से जुड़ी शीर्ष संस्था का नेतृत्व संभालेंगे।





















