फिरोजाबाद जिले के सीमावर्ती क्षेत्र में स्थित मोढ़ा गांव के निवासी इन दिनों भारी प्रशासनिक उपेक्षा और बदहाल नागरिक सुविधाओं का सामना कर रहे हैं। मानसून के दौरान गांव की कच्ची गलियों में जमा गंदा पानी और सड़ता हुआ कचरा ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर रहा है। ग्राम पंचायतों को ग्रामीण बुनियादी ढांचे के विकास और गलियों के पक्कीकरण के लिए प्रतिवर्ष लाखों रुपये का सरकारी बजट आवंटित किया जाता है, लेकिन धरातल पर इस राशि का प्रभाव दिखाई नहीं दे रहा है। जलभराव के कारण मोढ़ा गांव की स्थिति बिगड़ चुकी है और स्थानीय निवासियों में संक्रामक बीमारियों के फैलने की गंभीर आशंका बनी हुई है।
वर्षों से जारी नागरिक समस्याएं और मानसून की दुश्वारियां
फिरोजाबाद शहर के निकट बसे मोढ़ा गांव में सफाई व्यवस्था और पक्की सड़कों का अभाव लंबे समय से बना हुआ है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि गलियों की हालत इतनी खराब है कि पैदल चलना भी जोखिम भरा हो गया है। गांव की निवासी रोशन ने बताया कि पिछले दस वर्षों से उनके क्षेत्र में कोई विकास कार्य नहीं हुआ है। जिस गली में उनका आवास है, वहां जब से आबादी बसी है तभी से जलभराव और गंदगी का प्रकोप बना हुआ है। बारिश के मौसम में स्थिति और अधिक चिंताजनक हो जाती है क्योंकि हर तरफ गंदा पानी भर जाता है और लोगों को उसी दूषित जल के बीच से होकर गुजरना पड़ता है। वहीं गांव की एक अन्य निवासी रहीसा ने स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे माहौल में जीवन यापन करना बेहद कठिन हो गया है।
स्कूल जाने से कतराते बच्चे और स्वास्थ्य पर मंडराता खतरा
गांव में फैली अव्यवस्था का सबसे बुरा असर छोटे बच्चों और उनकी शिक्षा पर पड़ रहा है। मोढ़ा गांव की निवासी खुशबू ने बताया कि इस क्षेत्र में लगभग 150 परिवारों के घर स्थित हैं। प्रतिदिन सुबह जब छोटे बच्चे स्कूल जाने के लिए तैयार होते हैं, तो गलियों में जलभराव होने के कारण उनके कपड़े और जूते गंदे पानी में खराब हो जाते हैं। इस दैनिक समस्या से तंग आकर कई बच्चों ने नियमित रूप से स्कूल जाना ही बंद कर दिया है। जलभराव वाले स्थानों से लगातार तीव्र बदबू उठ रही है, जिससे लोगों का अपने ही घरों के भीतर रहना दुभर हो गया है। ग्रामीण महिला रुबी का कहना है कि जहां एक तरफ अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्य हो रहे हैं, वहीं मोढ़ा गांव के लोग आज भी कच्ची गलियों में रहने को विवश हैं। गंदे पानी के ठहराव से मच्छरों और कीटाणुओं का प्रकोप बढ़ रहा है, जिससे संक्रामक बीमारियों के फैलने का डर सता रहा है।
बजट की कमी का बहाना और अधिकारियों की उदासीनता
ग्रामीणों का आरोप है कि निर्वाचित प्रतिनिधियों और पंचायत अधिकारियों के पास बार-बार गुहार लगाने के बाद भी कोई समाधान नहीं निकला है। वर्तमान ग्राम प्रधान पिछले 15 वर्षों से लगातार अपने पद पर बने हुए हैं, लेकिन गांव की गलियों की सुध नहीं ली जा रही है। जब भी ग्रामीण अपनी फरियाद लेकर प्रधान के पास पहुंचते हैं, तो उन्हें यह कहकर वापस भेज दिया जाता है कि उक्त गली के निर्माण के लिए सरकारी धनराशि प्राप्त नहीं हुई है और बजट मंजूर होने पर ही काम शुरू कराया जाएगा। जब निवासियों ने इस संबंध में ग्राम पंचायत सचिव से संपर्क किया और विकास कार्य कराने का अनुरोध किया, तो उन्होंने भी इस कार्य से इनकार कर दिया। सचिव का कहना था कि संबंधित गली का बजट विवरण अभी अपडेट नहीं हुआ है। स्थानीय निवासी राजा ने बताया कि पिछले दस सालों से इस मार्ग पर कोई निर्माण कार्य नहीं कराया गया है। प्रशासनिक उदासीनता के कारण ग्रामीण असहाय महसूस कर रहे हैं और पक्की सड़क तथा जल निकासी व्यवस्था की मांग कर रहे हैं।



















