उत्तर प्रदेश का मुरादाबाद एक तरफ जहां स्मार्ट सिटी के रूप में जाना जाता है, वहीं दूसरी तरफ इसी स्मार्ट सिटी के कोठीवाल नगर क्षेत्र की असल तस्वीर काफी बदहाल नजर आती है। यहां गंदगी के कारण नाले और नल पूरी तरह चोक हो चुके हैं, जिसकी वजह से थोड़ी सी बारिश होने पर भी नालों का गंदा पानी सड़कों पर फैल जाता है। सड़कों पर जमा होने वाला यह बदबूदार पानी लोगों के घरों के अंदर तक घुस जाता है, जिससे स्थानीय निवासियों को रोजाना भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जनता का आरोप है कि नगर निगम के अधिकारी इस समस्या को लेकर पूरी तरह लापरवाह बने हुए हैं और सफाई कर्मचारी कभी-कभार ही इस इलाके का रुख करते हैं, जिसके चलते लोगों को मजबूरी में इसी नारकीय स्थिति के बीच अपना जीवन बिताना पड़ रहा है।
निवासियों का दर्द और बदतर होती सड़कें
स्थानीय निवासी फैज और विनय ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए बताया कि इलाके में साफ-सफाई न के बराबर होती है और यहां की सड़कों की हालत भी बेहद जर्जर हो चुकी है। बारिश के मौसम में हालात और भी ज्यादा भयावह हो जाते हैं, जब चारों तरफ कचरा तैरने लगता है और असहनीय बदबू उठने लगती है। लोगों का कहना है कि आने वाले चुनावों के दौरान नेता बड़े-बड़े वादे करते हैं लेकिन चुनाव बीत जाने के बाद सब कुछ भुला दिया जाता है। नालों की नियमित सफाई की मांग को लेकर जनता कई बार नगर निगम में शिकायत दर्ज करा चुकी है, लेकिन निगम के कर्मचारी कभी-कभार खानापूर्ति करके भूल जाते हैं। अंदर की गलियों में कचरे के बड़े-बड़े ढेर लगे हुए हैं और अधिकारी इस तरफ कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं, जिससे मुख्य रास्ते से गुजरना भी दूभर हो गया है।
महीनों में एक बार आती है निगम की टीम
क्षेत्र के लोगों ने जानकारी दी कि नगर निगम की सफाई टीम छह महीने में या कभी-कभार तीन से चार महीने में सिर्फ एक बार ही यहां नजर आती है। बरसात के दिनों में जलभराव की स्थिति इतनी गंभीर हो जाती है कि गंदा पानी रिहायशी घरों में भर जाता है। बारिश थमने के बाद भी नाले में कचरे के ढेर ज्यों के त्यों बने रहते हैं, जिससे उठने वाली तीव्र दुर्गंध के कारण इस सड़क से पैदल निकलना भी असंभव सा हो जाता है। यह इलाका अब धीरे-धीरे कई गंभीर बीमारियों का घर बनता जा रहा है। विनय नामक स्थानीय युवा ने बताया कि निगम की गाड़ी जब महीनों बाद आती भी है, तो वह केवल आधा-अधूरा कचरा ही उठाती है और बाकी का मलबा वहीं छोड़ जाती है, जिससे न तो नालियों की ठीक से सफाई हो पाती है और न ही सड़कों पर सुधार दिखता है।
फैक्ट्रियों का कचरा और अधिकारियों की लापरवाही
स्थानीय निवासियों के अनुसार, इस नाले में केवल घरेलू कचरा ही नहीं बल्कि आसपास की फैक्ट्रियों से निकलने वाला अपशिष्ट भी डाला जाता है, जो बहकर यहीं जमा हो जाता है। इसके अलावा, आसपास की नालियों का सारा गंदा पानी भी इसी मुख्य नाले में आकर गिरता है, जिसके कारण यह नाला कचरे के एक बड़े ढेर में तब्दील हो चुका है। बारिश के दौरान जब पानी का निकास बंद हो जाता है, तो यह ओवरफ्लो होकर सीधे लोगों के घरों में प्रवेश कर जाता है, जिससे जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। इन तमाम समस्याओं के लिए सीधे तौर पर नगर निगम के अधिकारी जिम्मेदार हैं, जिनकी उदासीनता और लापरवाही के कारण जनता इस दयनीय स्थिति में जीने को मजबूर है।



















