भीलवाड़ा जिले के गुंडली गांव में उस समय अफरातफरी मच गई जब खेतों के नजदीक एक पैंथर की चहलकदमी देखी गई। आबादी के ठीक पास वन्यजीव को देखते ही ग्रामीणों के बीच दहशत का माहौल बन गया। स्थानीय लोगों ने बिना कोई जोखिम उठाए फौरन इस घटना की जानकारी वन विभाग को दी, जिसके बाद वन कर्मियों का दल बिना देर किए मौके पर पहुंचा। टीम ने गांव वालों के सहयोग से बेहद सावधानीपूर्वक अभियान चलाकर पैंथर को सुरक्षित तरीके से अपने नियंत्रण में ले लिया। रेस्क्यू के तुरंत बाद इस वन्यजीव को वन विभाग के रेंज कार्यालय परिसर ले जाया गया, ताकि उसकी शारीरिक स्थिति की बारीकी से पड़ताल की जा सके।
स्वास्थ्य परीक्षण में सामने आई बीमारी की वजह
रेंज कार्यालय में चिकित्सकों और वन अधिकारियों ने जब पैंथर का विस्तृत स्वास्थ्य परीक्षण किया, तो उसकी इस हालत की असल वजह सामने आई। तेज गर्मी और पीने के पानी की भारी किल्लत के कारण पैंथर गंभीर रूप से डिहाइड्रेशन की चपेट में आ गया था। शरीर में पानी की अत्यधिक कमी और कमजोरी के चलते उसकी तबीयत लगातार बिगड़ती चली गई। इसी शारीरिक लाचारी और भटकाव के कारण वह जंगल की सीमा लांघकर आबादी वाले इलाके तक आ पहुंचा था। वन अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि वन्यजीव किसी पर हमला करने की नीयत से नहीं, बल्कि प्यास और कमजोरी से जूझते हुए रिहायशी खेतों की तरफ आ गया था।
कोटा जू के डॉक्टरों से परामर्श और गहन चिकित्सा
डीएफओ मारिया शाइन के सीधे निर्देशन में पैंथर को रेंज कार्यालय परिसर में विशेष निगरानी कक्ष में रखा गया है। मौके पर मौजूद वन रेंजर मुरली लाल और फॉरेस्टर चंद्रपाल राणावत की टीम उसकी पल-पल की स्थिति पर नजर रख रही है। पैंथर की गंभीर स्थिति को ध्यान में रखते हुए स्थानीय स्तर के अलावा कोटा जू के विशेषज्ञ पशु चिकित्सकों से भी संपर्क साधा गया। कोटा के वन्यजीव विशेषज्ञों से मिले चिकित्सकीय परामर्श के आधार पर पैंथर को जरूरी दवाइयां, ड्रिप्स और पोषण दिया गया। इस सघन उपचार के बाद पैंथर की तबीयत में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है और फिलहाल उसकी स्थिति पूरी तरह स्थिर बनी हुई है।
स्वस्थ होने पर प्राकृतिक आवास में होगी वापसी
अधिकारियों के मुताबिक विशेषज्ञ डॉक्टरों की सख्त देखरेख में आने वाले कुछ दिनों तक पैंथर का इलाज इसी तरह निरंतर जारी रहेगा। जब मेडिकल टीम पूरी तरह आश्वस्त हो जाएगी कि पैंथर शारीरिक रूप से शत-प्रतिशत स्वस्थ और सक्रिय हो चुका है, तब उसे पुनः उसके प्राकृतिक वन क्षेत्र में सुरक्षित छोड़ दिया जाएगा। वन विभाग का प्राथमिक लक्ष्य इस बेजुबान को पूरी तरह ठीक कर वापस उसके कुदरती ठिकाने पर पहुंचाना है, जिससे वह स्वच्छंद विचरण कर सके।
ग्रामीणों के लिए सुरक्षा दिशा-निर्देश और अपील
इस पूरे घटनाक्रम के बीच जिला उपवन संरक्षक मारिया शाइन ने ग्रामीणों और आम जनता से विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी ग्रामीण या आबादी क्षेत्र में पैंथर अथवा अन्य कोई जंगली जानवर दिखाई दे, तो उसके निकट जाने का कतई प्रयास न करें। वन्यजीवों को घेरने, उन्हें डराने, पत्थर मारने या पकड़ने की कोशिश जानलेवा साबित हो सकती है। ऐसी परिस्थिति में तत्काल वन विभाग को सूचित किया जाना चाहिए। इसके साथ ही अधिकारियों ने लोगों से वन्यजीवों के वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल करने और मौके पर बेवजह तमाशबीनों की भीड़ जुटाने से बचने का आग्रह किया है, ताकि ग्रामीणों और वन्यजीव दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित रहे।


















