असम के जोरहाट में स्थित रौरिया इंडियन एयरबेस शनिवार की सुबह एक दर्दनाक हादसे का गवाह बना। ठीक 10 बजे, जब वायु सेना का एक विमान एयरबेस पर उतरने की प्रक्रिया में था, लैंडिंग के दौरान ही वह क्रैश हो गया। इस घटना में पायलट सहित कुल पांच जवानों ने अपनी जान गंवा दी। शहीद हुए जवानों में दो बिहार की मिट्टी से जुड़े हैं — भोजपुर के दानिश आलम और जहानाबाद के शुभम कुमार।
जहानाबाद के शुभम: 26 साल की उम्र, 2021 में वायुसेना में कदम
शुभम कुमार जहानाबाद के हुलासगंज थाना क्षेत्र के बनवरिया गांव के रहने वाले थे। महज 26 साल के शुभम ने 2021 में फ्लाइट लेफ्टिनेंट के पद पर वायुसेना ज्वाइन की थी। परिवार तक यह मनहूस खबर सीधे नहीं, बल्कि कई मोड़ों से होकर पहुंची। शुभम के भाई सत्यम बताते हैं कि शुरुआत में किसी को इस पर यकीन ही नहीं हुआ — सबको लगा कि खबर झूठी है। जब परिजनों ने बार-बार शुभम के मोबाइल नंबर पर संपर्क करने की कोशिश की, तब जाकर हादसे की असलियत सामने आई।
हादसे से ठीक दो घंटे पहले हुई थी बात
परिवार के लिए यह सदमा इसलिए और गहरा है क्योंकि घटना से सिर्फ दो घंटे पहले ही घरवालों की शुभम से वीडियो कॉल पर बातचीत हुई थी। उस आखिरी बातचीत में शुभम ने इतना ही कहा था कि अभी वे जल्दबाजी में हैं और फुर्सत मिलते ही बात करेंगे। वही जल्दबाजी आखिरी संवाद बन गई। शहादत की पुष्टि होते ही शुभम की मां और पिता अमरेंद्र की हालत बेहद नाजुक हो गई है। यह दुख इसलिए भी असहनीय है क्योंकि पिता इसी साल बेटे की शादी की तैयारियों में जुटे थे। पेशे से किसान शुभम के पिता ने बहुत कष्ट और मेहनत झेलकर अपने बेटे को सैनिक बनाया था।
हादसे में शहीद हुए पांचों जवान
इस विमान हादसे में जिन पांच जवानों ने सर्वोच्च बलिदान दिया, उनके नाम हैं — फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार, स्क्वाड्रन लीडर प्रशांत सिंह, सार्जेंट जितेंद्र शर्मा, अग्निवीर वायु खेमाराम कुमावत और दानिश आलम। इस घटना ने एक बार फिर उस बहस को हवा दे दी है कि आखिर मिशन के दौरान विमान क्रैश होने की वजहें क्या हैं।
AN-32: चार दशकों से वायुसेना की ट्रांसपोर्ट रीढ़
भारतीय वायुसेना में एयर मार्शल रह चुके एक वरिष्ठ अधिकारी इस विमान की भूमिका पर रोशनी डालते हैं। उनके मुताबिक AN-32 एयरक्राफ्ट बीते चार दशकों से भारतीय वायुसेना के ट्रांसपोर्ट फ्लीट की रीढ़ बना हुआ है। 1980 के दशक के मध्य में जब इसे वायुसेना में शामिल किया गया था, तब से लेकर आज तक यह विमान लद्दाख, पूर्वोत्तर भारत और अंडमान-निकोबार समेत देश के तमाम हिस्सों में अपने मिशनों को सफलतापूर्वक अंजाम देता आया है। जोरहाट में भी यह एयरक्राफ्ट अपने कई अलग-अलग ऑपरेशंस अब तक कामयाबी के साथ पूरे करता रहा है।













