पवित्र सावन महीने का शुभारंभ होते ही सड़कों पर कांवड़ियों का आगमन शुरू हो गया है। श्रद्धालु हरिद्वार से जल लेकर अपने गंतव्य की ओर बढ़ने लगे हैं। इस विशाल धार्मिक यात्रा को सुगम बनाने और आम लोगों को आवागमन में किसी परेशानी से बचाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर कड़े यातायात इंतजाम किए गए हैं। 30 जुलाई से शुरू होकर 12 अगस्त तक चलने वाले इस 14 दिवसीय आयोजन के दौरान दिल्ली, गाजियाबाद, मेरठ और हरिद्वार से जुड़ने वाले कई प्रमुख नेशनल हाइवे और एक्सप्रेसवे पर विशेष पाबंदियां लागू की गई हैं। सड़कों पर श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए ट्रैफिक पुलिस लगातार स्थिति के अनुसार डायवर्जन प्लान में बदलाव करेगी, इसलिए इस दौरान यात्रा करने वाले नागरिकों को नियमित अपडेट्स के साथ अतिरिक्त समय लेकर निकलने की सलाह दी गई है।
कांवड़ मार्गों पर चरणबद्ध ट्रैफिक पाबंदियां और गाड़ियों के प्रवेश के नियम
कांवड़ यात्रा के सुरक्षा प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने गाजियाबाद से हरिद्वार तक के सड़कों पर चरणबद्ध तरीके से पाबंदियां लागू की हैं। 30 जुलाई की सुबह 8 बजे से ही दिल्ली-गाजियाबाद सीमा से आगे जाने वाले कांवड़ मार्गों पर सभी प्रकार के भारी कमर्शियल वाहनों जैसे ट्रकों, कैंटरों, ट्रॉलियों और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के प्रवेश पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। इसके बाद दूसरे चरण में 5 अगस्त से छोटे और हल्के वाहनों जैसे कारों, बसों और टेम्पो के मुख्य कांवड़ सड़कों पर जाने पर प्रतिबंध रहेगा। श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने के साथ ही सुरक्षा को और कड़ा किया जाएगा ताकि पदयात्रियों के मार्ग में कोई व्यवधान न उत्पन्न हो।
प्रतिबंधित 3 मुख्य मार्ग और बैकअप के लिए वैकल्पिक रास्ते
प्रशासन ने यात्रा के दौरान गाजियाबाद और दिल्ली सीमा पर 3 प्रमुख मार्गों को वाहनों के आवागमन के लिए पूरी तरह से बंद रखने का निर्णय लिया है। इसमें पहला मार्ग लोनी तक जाने वाली 37 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन रोड है। दूसरा मार्ग कादराबाद (गाजियाबाद-मेरठ सीमा) से सीमापुरी (दिल्ली सीमा) तक का 39 किलोमीटर का हिस्सा है। वहीं तीसरा सबसे महत्वपूर्ण मार्ग 50 किलोमीटर लंबा दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे (DME) है, जिसे पूरी तरह श्रद्धालुओं के लिए आरक्षित किया जा रहा है।
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे के उत्तर प्रदेश वाले हिस्से पर 30 जुलाई से ही भारी वाहनों का प्रवेश बंद कर दिया गया है। 7 अगस्त तक इस पर हल्के वाहन चलाए जा सकेंगे, लेकिन 7 अगस्त से 12 अगस्त के बीच यह मार्ग पूरी तरह आम गाड़ियों के लिए बंद कर दिया जाएगा। इन बंद रास्तों के बदले हरिद्वार, मुरादाबाद, अमरोहा और लखनऊ की दिशा में जाने वाली गाड़ियों को एनएच-9, ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे, गंगा एक्सप्रेसवे और दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे की तरफ मोड़ा जा रहा है।
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे को लेकर प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह मार्ग केवल तेज गति से चलने वाले भारी और हल्के वाहनों के लिए पूरी तरह खुला रहेगा। इस एक्सप्रेसवे पर कांवड़ लेकर चलना या पैदल यात्रा करना पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगा। इस व्यवस्था से देहरादून या उत्तराखंड की ओर जाने वाले यात्रियों को एक सुरक्षित विकल्प मिलेगा, हालांकि सड़कों पर दबाव के कारण कुछ स्थानों पर धीमी गति से ट्रैफिक चल सकता है।
सुरक्षा व्यवस्था, पुलिस तैनाती और हाई-टेक निगरानी नेटवर्क
गाजियाबाद से हरिद्वार तक फैले 126 किलोमीटर लंबे मुख्य कांवड़ मार्ग को सुगम संचालन के लिए 157 बीट और 502 स्थायी ड्यूटी पॉइंट्स में विभाजित किया गया है। पूरे क्षेत्र में सुरक्षा की जिम्मेदारी 3,500 से अधिक पुलिसकर्मियों के कंधों पर होगी। श्रद्धालुओं की सुरक्षा और यातायात नियंत्रण के लिए 100 पुलिस रिस्पॉन्स वाहन (PRV) और 16 क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT) लगातार गश्त करेंगी।
मार्ग में किसी भी आपात स्थिति या भीड़ नियंत्रण के लिए 8 विशेष वॉच टावर और 10 नियंत्रण कक्ष बनाए गए हैं, जिनमें मुख्य कंट्रोल रूम मेरठ क्रॉसिंग पर स्थापित है। पूरे 126 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर की निगरानी सैकड़ों सीसीटीवी कैमरों और हवा में उड़ने वाले टेथर्ड ड्रोन के माध्यम से की जाएगी। इससे पुलिस अधिकारी दूर बैठकर भी सड़कों की स्थिति पर सीधी नज़र रख सकेंगे।
कांवड़ियों के लिए विश्राम शिविर और आपातकालीन स्वास्थ्य सुविधाएं
दूर-दराज से आने वाले शिवभक्तों की सुविधा के लिए सड़कों के किनारे विशाल विश्राम शिविरों का निर्माण किया गया है। अकेले गाजियाबाद जिले की सीमा में 300 कांवड़ यात्री शिविर स्थापित किए गए हैं, जबकि गाजियाबाद से आगे हरिद्वार तक के मार्ग पर ऐसे शिविरों की संख्या इससे दोगुनी से भी ज्यादा है। इन शिविरों में श्रद्धालुओं को रात्रि विश्राम, भोजन और चिकित्सा सहायता दी जाएगी।
किसी भी दुर्घटना या आपात स्थिति से निपटने के लिए सड़कों पर व्यापक ढांचा तैयार किया गया है। इस दौरान 65 एम्बुलेंस, 12 फायर टेंडर, 41 मोबाइल क्रेन, 79 हाइड्रोलिक क्रेन और 9 रिकवरी वाहनों को चौबीसों घंटे तैनात रखा गया है। यह व्यवस्था सड़कों पर किसी खराब वाहन को तुरंत हटाने और घायलों को तुरंत इलाज दिलाने में मदद करेगी।
एनएच-34 पर पाबंदी और यात्रियों के लिए प्रशासनिक सलाह
दिल्ली से गाजियाबाद, मेरठ, मुजफ्फरनगर, रुड़की होते हुए हरिद्वार तक जाने वाले दिल्ली-हरिद्वार नेशनल हाईवे एनएच-34 पर 4 अगस्त से 12 अगस्त तक भारी वाहनों के चलने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। इस अवधि में एनएच-34 का बड़ा हिस्सा केवल कांवड़ यात्रियों के चलने के लिए आरक्षित रहेगा। हालांकि, आपातकालीन सेवाओं जैसे एम्बुलेंस, पुलिस वाहनों और राहत दल की गाड़ियों को इस मार्ग पर चलने की विशेष अनुमति रहेगी।
यातायात पुलिस और जिला प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे 12 अगस्त तक बहुत जरूरी होने पर ही कांवड़ मार्गों का उपयोग करें। यदि यात्रा आवश्यक हो तो गंतव्य के लिए अतिरिक्त समय तय करके निकलें और वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करें। चूंकि सड़कों पर भीड़ के अनुसार डायवर्जन प्लान में किसी भी समय बदलाव किया जा सकता है, इसलिए सभी वाहन चालकों को पुलिस के आधिकारिक निर्देशों और नियमित ट्रैफिक एडवाइजरी पर ध्यान देने का परामर्श दिया गया है।


















