बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर चल रहे उपचुनाव के मतदान के बीच राजनीतिक पारा चढ़ गया है। जन सुराज के संस्थापक और पार्टी के उम्मीदवार प्रशांत किशोर ने राज्य पुलिस तथा सत्तारूढ़ दल पर चुनाव को प्रभावित करने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि मंगलवार शाम से लेकर देर रात तक पुलिस ने जन सुराज के 16 से अधिक वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं को गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में रखा। प्रशांत किशोर के अनुसार, इस पूरी कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य जन सुराज के कार्यकर्ताओं को चुनावी प्रक्रिया से दूर रखना था, ताकि एक राजनीतिक दल विशेष को फायदा पहुंचाया जा सके।
बिना औपचारिक आरोप के देर रात नेताओं की हिरासत का दावा
प्रशांत किशोर ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि हिरासत में लिए गए नेताओं के खिलाफ न तो कोई औपचारिक प्राथमिकी या गिरफ्तारी दर्ज की गई और न ही उन्हें यह जानकारी दी गई कि किस कानून के तहत कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने पूरी प्रक्रिया के दौरान अपनाई गई गोपनीयता पर भी आपत्ति जताई। उनके मुताबिक, हिरासत में लिए गए नेताओं को पहले शहर के अलग-अलग थानों में बिखेर कर रखा गया और बाद में उन्हें दानापुर ले जाया गया। जब इस घटनाक्रम की भनक मीडिया और पार्टी प्रतिनिधियों को लगी, तो आनन-फानन में सभी नेताओं को शाहपुर थाने स्थानांतरित कर दिया गया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी भी कार्यकर्ता ने कानून का उल्लंघन किया है, तो उसके खिलाफ विधिवत मुकदमा चलाया जाना चाहिए। बिना किसी लिखित आरोप के नेताओं को आधी रात में घरों से उठाना और थानों में बंद रखना लोकतांत्रिक सिद्धांतों का सीधा उल्लंघन है। प्रशांत किशोर ने बताया कि हिरासत में लिए गए लोगों में से कम से कम 10 नेता पटना के ही स्थानीय निवासी हैं, जिन्हें रात के अंधेरे में उनके आवास से हिरासत में लिया गया। जन सुराज के समर्थक और कार्यकर्ता देर रात 3:00 बजे तक शाहपुर थाने के बाहर डटे रहे। इसके बावजूद, उन्होंने भरोसा जताया कि इस प्रकार के दबाव से जन सुराज के चुनावी अभियान या कार्यकर्ताओं के मनोबल पर कोई असर नहीं पड़ने वाला है।
बीजेपी और एनडीए के चुनावी पैंतरों पर साधा निशाना
जन सुराज के उम्मीदवार ने सीधे तौर पर बीजेपी पर आरोप लगाया कि वह प्रशासनिक तंत्र का दुरुपयोग कर चुनाव नतीजे को अपने पक्ष में मोड़ने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि बीजेपी ने इस उपचुनाव में अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी। पार्टी ने अपने विधायकों, सांसदों, मंत्रियों, शीर्ष नेताओं और यहां तक कि कलाकारों को भी बांकीपुर में प्रचार के लिए उतारा, लेकिन जनता से उन्हें सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसके बाद एनडीए के अन्य सहयोगी दलों के नेताओं को भी मैदान में उतारा गया।
प्रशांत किशोर ने यह भी आरोप लगाया कि विरोधी खेमे ने अस्वस्थ नीतीश कुमार का एक फर्जी वीडियो जारी करके मतदाताओं को भ्रमित करने का प्रयास किया, लेकिन वह हथकंडा भी पूरी तरह विफल साबित हुआ। जब कोई रणनीति काम नहीं आई, तो पिछले दो दिनों के दौरान घर-घर जाकर नकदी बांटने का काम किया गया। उन्होंने कहा कि विरोधी दल ने बिहार के बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की कीमत प्रति वोट केवल 1,000 से 1,500 रुपये आंकी। हालांकि, जब आम लोगों ने पैसे की पेशकश के बावजूद अपना रुख बदलने से इनकार कर दिया, तो हताशा में पुलिस बल का इस्तेमाल कर जन सुराज के नेताओं को परेशान करने का रास्ता चुना गया।
मतदान केंद्रों पर मजबूती और जीत का बड़ा दावा
प्रशांत किशोर ने जोर देकर कहा कि प्रशासनिक रुकावटों के बावजूद मतदान की शुरुआत से ही बांकीपुर के प्रत्येक पोलिंग बूथ पर जन सुराज के पोलिंग एजेंट मुस्तैदी से तैनात हैं। इस दौरान उन्होंने फर्जी मतदान रोकने के उद्देश्य से बीजेपी द्वारा मतदाता पहचान पत्र यानी EPIC की सख्त जांच कराने की मांग का स्वागत किया। उन्होंने टिप्पणी की कि लंबे समय के बाद बीजेपी की ओर से एक सकारात्मक सुझाव आया है और जन सुराज इस पारदर्शिता व्यवस्था का पूरा समर्थन करता है।
बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में जीत की संभावनाओं पर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए प्रशांत किशोर का आत्मविश्वास साफ नजर आया। उन्होंने बिना किसी संशय के कहा, "200 प्रतिशत हम चुनाव जीतने जा रहे हैं।" उन्होंने दोहराया कि बांकीपुर की जनता बदलाव के पक्ष में वोट दे रही है और किसी भी तरह की राजनीतिक या प्रशासनिक कार्रवाई इस जनादेश को रोक नहीं सकती।


















