पटना की एक जिला अदालत ने कोचिंग फायरिंग से जुड़े विवादित मामले में अहम फैसला सुनाते हुए फैजल खान, जिन्हें खान सर के नाम से जाना जाता है, को जमानत प्रदान कर दी है। इस मामले में उनके दोनों अंगरक्षकों को भी अदालत से जमानत मिल गई है। इससे पूर्व, इस मामले पर सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। नियमानुसार शुक्रवार को ही फैसला सुनाया जाना था, लेकिन जिला जज के अवकाश पर होने के कारण इसे सोमवार तक के लिए टाल दिया गया था। अंततः सोमवार को अदालत ने सभी पक्षों को सुनते हुए जमानत याचिका को स्वीकार कर लिया।
विवाद की जड़ और घटनाक्रम
यह पूरा मामला पटना के मुसल्लहपुर हाट इलाके में संचालित दो प्रमुख कोचिंग सेंटरों के आपसी वर्चस्व और विवाद से उपजा है। एक पक्ष खान ग्लोबल स्टडीज यानी KGS है, जिसका संचालन फैजल खान करते हैं, जबकि दूसरा पक्ष रौशन आनंद का है, जो ज्ञान बिंदु जीएस अकादमी के डायरेक्टर हैं। इन दोनों शिक्षण संस्थानों के बीच काफी समय से तनाव चल रहा था। विवाद तब चरम पर पहुंच गया जब 2 जून की रात को खान ग्लोबल स्टडीज सेंटर पर भारी हंगामा हुआ।
आरोपों और जांच का सिलसिला
फैजल खान ने उस रात अपने संस्थान पर हुए हमले का आरोप रौशन आनंद के समर्थकों पर लगाया था। आरोप के मुताबिक, उस रात सेंटर में तोड़फोड़ की गई, पत्थरबाजी हुई और साथ ही फायरिंग जैसी वारदात को भी अंजाम दिया गया। घटना के तुरंत बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए रौशन आनंद को गिरफ्तार कर लिया था। हालांकि, समय बीतने के साथ जांच की दिशा तब बदल गई जब एक वीडियो फुटेज सामने आया।
वीडियो के आधार पर पुलिस ने दावा किया कि फैजल खान के बॉडीगार्ड्स की ओर से भी गोली चलाई गई थी। इसके बाद पुलिस ने दोनों बॉडीगार्ड्स को गिरफ्तार कर लिया और फैजल खान के विरुद्ध भी एफआईआर दर्ज की गई। कानूनी प्रक्रिया के तहत, फैजल खान ने गिरफ्तारी से बचने के लिए अदालत में अग्रिम जमानत की याचिका दाखिल की थी, जिस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने पहले ही उनके खिलाफ कोई भी दंडात्मक कार्रवाई न करने का आदेश दिया था।
मामले के अन्य पहलू
इस पूरे प्रकरण में रौशन आनंद को पहले ही जमानत मिल चुकी है। इसी कड़ी में रौशन आनंद के भाई प्रिंस यादव की नेपाल में हुई संदिग्ध मौत का मामला भी काफी चर्चा में रहा था। उस दौरान रौशन आनंद ने फैजल खान के ऊपर गंभीर आरोप लगाए थे। फिलहाल, कोचिंग विवाद और फायरिंग से संबंधित यह कानूनी लड़ाई अदालत में अभी भी जारी है।











