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मोतिहारी के एसडीएम पद के लिए मांगी गई 25 लाख की रिश्वत, एसटीएफ ने चलती ट्रेन से जालसाज को पकड़ाबिहार
22 जुल॰ 2026, 11:52 am (28 दिन पहले)· 0

मोतिहारी के एसडीएम पद के लिए मांगी गई 25 लाख की रिश्वत, एसटीएफ ने चलती ट्रेन से जालसाज को पकड़ा

बिहार के मोतिहारी में एसडीएम पद पर तैनाती दिलाने के नाम पर 25 लाख रुपये की रिश्वत मांगने वाले एक शातिर जालसाज को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपी राजन जायसवाल को एसटीएफ ने पटना जा रही वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन से दबोचा, जिसके पास से कई बड़े अधिकारियों के नंबर मिले हैं।

बिहार के प्रशासनिक महकमे में तबादलों और नियुक्तियों को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। पूर्वी चंपारण जिले के मोतिहारी में सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) की अहम कुर्सी दिलाने का झांसा देकर 25 लाख रुपये की भारी-भरकम रकम ऐंठने की कोशिश करने वाले एक शातिर जालसाज को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। साइबर पुलिस और स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) की एक बेहद सुनियोजित संयुक्त कार्रवाई में मुख्य आरोपी राजन जायसवाल को उस वक्त धर दबोचा गया, जब वह वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन से पटना की ओर जा रहा था। इस चर्चित गिरफ्तारी के बाद पुलिस को आरोपी के पास से ऐसे कई अहम डिजिटल सुराग मिले हैं, जो राज्य के प्रशासनिक गलियारों में सक्रिय एक बड़े तबादला और पोस्टिंग सिंडिकेट की ओर सीधा इशारा कर रहे हैं। फिलहाल मोतिहारी पुलिस इस पूरे रैकेट की जड़ों तक पहुंचने के लिए गहन जांच-पड़ताल कर रही है।

तबादलों की सूची से शुरू हुआ पूरा खेल

यह पूरा घटनाक्रम सीधे तौर पर बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) के अधिकारियों के हालिया राज्यव्यापी तबादलों से जुड़ा हुआ है। पुलिस की अब तक की जांच में यह साफ हुआ है कि सीवान जिले के मैरवा इलाके का रहने वाला आरोपी राजन जायसवाल सरकारी अधिसूचना जारी होने से काफी पहले से ही कई अधिकारियों के लगातार संपर्क में था। इसी कड़ी में उसने मोतिहारी में तत्कालीन भू-अर्जन पदाधिकारी के रूप में तैनात अरुण कुमार को अपना निशाना बनाया। राजन ने अरुण कुमार को यह विश्वास दिलाया कि शासन और प्रशासन के शीर्ष स्तर पर उसकी गहरी पैठ है। इसी कथित ऊंची पहुंच का हवाला देते हुए उसने वादा किया कि वह अरुण कुमार की तैनाती मोतिहारी सदर के प्रतिष्ठित एसडीएम पद पर करवा देगा। इस महत्वपूर्ण पोस्टिंग को पक्का कराने के एवज में जालसाज ने 25 लाख रुपये की मोटी रकम की सीधी मांग रखी थी।

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हालांकि असली खेल तबादले की आधिकारिक सूची जारी होने के बाद शुरू हुआ। बीते 12 जुलाई को जब शासन स्तर से नई अधिसूचना जारी की गई और संयोगवश अरुण कुमार की नई पोस्टिंग मोतिहारी सदर एसडीओ के पद पर हो गई, तो राजन जायसवाल ने फौरन मौके का फायदा उठाया। उसने इस नियुक्ति को पूरी तरह से अपनी पैरवी और अपने संपर्कों का नतीजा बताना शुरू कर दिया। इस कथित अहसान का हवाला देते हुए उसने अरुण कुमार पर तय की गई 25 लाख रुपये की रकम तुरंत चुकाने का भारी दबाव बनाना शुरू कर दिया।

व्हाट्सएप पर धमकियां और फर्जी कागजात

आरोपी राजन ने पैसे वसूलने के लिए सीधे तौर पर ब्लैकमेलिंग का रास्ता अपनाया। वह लगातार व्हाट्सएप कॉल और मैसेज के जरिए एसडीओ से पैसों की डिमांड करने लगा। बात सिर्फ मांगने तक सीमित नहीं रही; उसने खुलेआम धमकी देनी शुरू कर दी कि यदि उसे उसकी मुंहमांगी रकम नहीं मिली, तो वह अपने रसूख का दोबारा इस्तेमाल करेगा और इस नई पोस्टिंग को रातों-रात रद्द या स्थगित करवा देगा। अपनी बातों को सच साबित करने और अधिकारी पर मानसिक दबाव बढ़ाने के लिए उसने सबूत के तौर पर कुछ गोपनीय सरकारी फाइलों के स्क्रीनशॉट भी व्हाट्सएप पर भेजे, जिससे अधिकारी को यकीन हो जाए कि उसकी पहुंच वाकई बहुत ऊपर तक है।

लगातार मिल रही इन गंभीर धमकियों और दिन-रात की मानसिक प्रताड़ना से आजिज आकर आखिरकार एसडीओ अरुण कुमार ने पुलिस का दरवाजा खटखटाने का फैसला किया। उन्होंने 19 जुलाई को मोतिहारी के साइबर थाने में जाकर पूरी घटना का ब्योरा देते हुए एक विस्तृत लिखित शिकायत दर्ज कराई। मामले की गंभीरता और एक वरिष्ठ अधिकारी से जुड़े होने के कारण पुलिस ने तुरंत एक्शन लिया। साइबर डीएसपी प्रतिश कुमार के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया। टीम ने सबसे पहले तकनीकी अनुसंधान और कॉल ट्रेसिंग का सहारा लिया, जिसके जरिए आरोपी का लाइव लोकेशन सफलतापूर्वक ट्रैक किया गया।

चलती वंदे भारत ट्रेन में एसटीएफ की छापेमारी

जांच के दौरान जब साइबर पुलिस को यह पुख्ता जानकारी मिली कि आरोपी राजन जायसवाल भागने की फिराक में है और वह पटना की ओर जाने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन में सफर कर रहा है, तो बिना कोई वक्त गंवाए बिहार एसटीएफ को इस अहम मूवमेंट की तत्काल सूचना दी गई। एसटीएफ की टीम ने मोकामा रेलवे स्टेशन के पास एक सघन जाल बिछाया और चलती ट्रेन में अचानक छापेमारी कर दी। इस अप्रत्याशित कार्रवाई में आरोपी राजन को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया गया, जिसके बाद एसटीएफ ने उसे आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए मोतिहारी पुलिस की टीम को सौंप दिया।

पुलिस द्वारा की गई शुरुआती पूछताछ और आरोपी के जब्त किए गए मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच में कई ऐसे खुलासे हुए हैं, जिन्होंने जांच एजेंसियों के भी होश उड़ा दिए हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि राजन जायसवाल के मोबाइल फोन की कॉन्टैक्ट लिस्ट और व्हाट्सएप से 10 से अधिक वरिष्ठ आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के निजी मोबाइल नंबर बरामद किए गए हैं। इस अहम बरामदगी के बाद अब मोतिहारी पुलिस यह गहराई से पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या यह जालसाज वाकई में शासन स्तर पर काम कर रहे किसी बड़े और संगठित तबादला सिंडिकेट का एक मोहरा है, या फिर वह महज बड़े अधिकारियों के नाम का खौफ दिखाकर अधिकारियों को ठगने का यह गोरखधंधा अकेले ही चला रहा था।

मोतिहारी के साइबर डीएसपी प्रतिश कुमार ने इस पूरे ऑपरेशन और जांच की प्रगति के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि आरोपी के मोबाइल फोन से पुलिस को कई अहम डिजिटल साक्ष्य प्राप्त हुए हैं। इन सबूतों में अधिकारियों और अन्य लोगों के साथ किए गए व्हाट्सएप चैट, विस्तृत कॉल डिटेल रिकॉर्ड और कुछ संदिग्ध सरकारी दस्तावेज शामिल हैं। डीएसपी के मुताबिक, पुलिस अब इस बात की भी बारीकी से जांच कर रही है कि आरोपी ने अपनी इस ऊंची पहुंच का झांसा देकर और कितने सरकारी अधिकारियों या कर्मचारियों को पोस्टिंग के नाम पर अपने जाल में फंसाया है। इसके साथ ही, इस बात की भी तफ्तीश की जा रही है कि क्या पर्दे के पीछे कोई बहुत बड़ा नेटवर्क या सफेदपोश लोग भी इस पूरे सिंडिकेट को सक्रिय रूप से चला रहे हैं।

सवाल-जवाब

मोतिहारी में पोस्टिंग के नाम पर कितने रुपये की ठगी का मामला सामने आया है?
अरोपी ने मोतिहारी सदर के एसडीएम पद पर पोस्टिंग कराने के नाम पर 25 लाख रुपये की मांग की थी।
पुलिस ने मुख्य आरोपी को कहां से गिरफ्तार किया?
मुख्य आरोपी राजन जायसवाल को बिहार एसटीएफ और साइबर पुलिस ने मोकामा के पास वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन से गिरफ्तार किया।
आरोपी राजन जायसवाल किस जिले का रहने वाला है?
राजन जायसवाल मूल रूप से सीवान जिले के मैरवा का रहने वाला है।
एसडीओ अरुण कुमार ने पुलिस से शिकायत कब की?
एसडीओ अरुण कुमार ने 19 जुलाई को मोतिहारी के साइबर थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी।
आरोपी के मोबाइल फोन से क्या अहम सबूत मिले हैं?
आरोपी के फोन से 10 से अधिक वरिष्ठ आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के निजी नंबर, व्हाट्सएप चैट और सरकारी फाइलों के स्क्रीनशॉट मिले हैं।
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