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मोतिहारी से ट्रेन के जरिए मुंबई पहुंची 10 करोड़ की चरस जब्त, बांद्रा स्टेशन से ऑटो ड्राइवर गिरफ्तारमहाराष्ट्र
19 अग॰ 2026, 1:52 am (1 दिन पहले)· 3

मोतिहारी से ट्रेन के जरिए मुंबई पहुंची 10 करोड़ की चरस जब्त, बांद्रा स्टेशन से ऑटो ड्राइवर गिरफ्तार

मुंबई पुलिस की एंटी नारकोटिक्स सेल ने बांद्रा रेलवे स्टेशन पर बड़ी कार्रवाई करते हुए मोतिहारी से आए एक 31 वर्षीय ऑटो ड्राइवर को 10.10 करोड़ रुपये मूल्य की चरस के साथ गिरफ्तार किया है।

मुंबई पुलिस की एंटी नारकोटिक्स सेल (ANC) ने मादक पदार्थों की अवैध तस्करी के खिलाफ शहर भर में चलाए जा रहे व्यापक अभियान के तहत बांद्रा रेलवे स्टेशन पर एक बड़ी और महत्वपूर्ण कार्रवाई को अंजाम दिया है। पुलिस की विशेष टीम ने स्टेशन परिसर में जाल बिछाकर 10 किलो 10 ग्राम चरस की एक बहुत बड़ी खेप के साथ एक तस्कर को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में जब्त की गई इस उच्च गुणवत्ता वाली चरस की अनुमानित कीमत करीब 10.10 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है। एंटी नारकोटिक्स सेल की वर्ली इकाई को पहले ही यह गुप्त सूचना मिली थी कि बिहार से एक व्यक्ति ट्रेन के माध्यम से मादक पदार्थों की एक बड़ी खेप लेकर मुंबई के लिए रवाना हुआ है। वर्ली इकाई को यह महत्वपूर्ण जानकारी पुलिस उपायुक्त (DCP) पूर्णिमा चौगुले शृंगी के मार्गदर्शन में मिली थी। सटीक इनपुट मिलने के तुरंत बाद पुलिस अधिकारियों ने सतर्कता बरतते हुए बांद्रा रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म, निकास द्वारों और आसपास के क्षेत्रों में गश्त व निगरानी काफी बढ़ा दी थी।

मोतिहारी से ट्रेन के जनरल डिब्बे में सफर कर मुंबई पहुंचा था आरोपी

पुलिस की शुरुआती जांच और आरोपी से पूछताछ में कई महत्वपूर्ण तथ्य उजागर हुए हैं। गिरफ्तार किए गए आरोपी की उम्र 31 साल है और वह मूल रूप से बिहार राज्य का निवासी है। पेशे से वह एक ऑटो ड्राइवर है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आरोपी बिहार के मोतिहारी रेलवे स्टेशन से ट्रेन में सवार हुआ था और सफर तय करके मुंबई के बांद्रा स्टेशन पहुंचा था। ट्रेन यात्रा के दौरान सुरक्षा एजेंसियों और पुलिस की पैनी नजरों से खुद को बचाने के लिए उसने बेहद शातिराना तरीका अपनाया था। उसने आम रेल यात्रियों की भारी भीड़ में आसानी से छिपने और घुलने-मिलने के मकसद से ट्रेन के अनारक्षित जनरल डिब्बे (जनरल बोगी) में सफर किया। आरोपी का मानना था कि भीड़भाड़ वाले डिब्बे में सफर करने से उस पर किसी का ध्यान नहीं जाएगा। हालांकि, जैसे ही ट्रेन बांद्रा स्टेशन पर आकर रुकी और आरोपी अपने सामान के साथ बाहर निकला, पहले से ही प्लेटफॉर्म पर मुस्तैद एंटी नारकोटिक्स सेल की टीम ने उसे संदिग्ध आचरण के आधार पर तुरंत हिरासत में ले लिया। पुलिस टीम ने जब आरोपी के पास मौजूद बैग की सघन तलाशी ली, तो उसके अंदर से 10 किलो 10 ग्राम चरस बरामद हुई। इसके साथ ही पुलिस ने उसके पास से एक मोबाइल फोन भी जब्त किया है, जिसकी कॉल डिटेल रिकॉर्ड और डेटा की जांच की जा रही है।

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ड्रग्स कूरियर के रूप में काम, नेपाल और अंतरराज्यीय सप्लाई नेटवर्क पर नजर

मामले की विस्तृत जांच में यह बात साफ तौर पर सामने आई है कि गिरफ्तार आरोपी इस पूरे नशीले पदार्थों के कारोबार में एक महज 'ड्रग्स कूरियर' या 'ड्रग्स कैरियर' के तौर पर काम कर रहा था। उसका काम सिर्फ इतना था कि वह बिहार से चरस की इस बड़ी खेप को सुरक्षित रूप से मुंबई लेकर आए और यहां शहर में मौजूद किसी अज्ञात व्यक्ति या रिसीवर को सौंपकर तुरंत वापस अपने राज्य लौट जाए। इस सफल गिरफ्तारी के बाद अब एंटी नारकोटिक्स सेल की टीम इस पूरी सप्लाई चेन के मूल स्रोत का पता लगाने में गंभीरता से जुटी हुई है। पुलिस इस मुख्य बिंदु पर भी सघन पड़ताल कर रही है कि क्या चरस की यह खेप भारत के ही किसी दुर्गम हिस्से में उगाई और तैयार की गई थी, अथवा इसे पड़ोसी देश नेपाल या किसी अन्य अंतरराष्ट्रीय सीमा के जरिए तस्करी कर भारत लाया गया था और वहां से मुंबई पहुंचाया जा रहा था। इसके अलावा, मुंबई में इस चरस की डिलीवरी किसे ली जानी थी और इस पूरे बड़े अंतरराज्यीय व अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क में कौन-कौन से बड़े सरगना शामिल हैं, इसका सुराग लगाने का प्रयास जारी है। पुलिस ने आरोपी को स्थानीय अदालत में पेश किया, जहां से कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उसे 21 अगस्त तक पुलिस हिरासत (PC) में भेज दिया है। पुलिस हिरासत के दौरान आरोपी से गहन पूछताछ की जा रही है ताकि गिरोह के अन्य सदस्यों तक पहुंचा जा सके। गौरतलब है कि इससे पहले भी एंटी नारकोटिक्स सेल ने मुंबई में मादक पदार्थों के खिलाफ बड़ी स्ट्राइक की थी, जिसके तहत 50 करोड़ रुपये मूल्य की मेफेड्रोन (MD) बनाने वाली एक अवैध फैक्ट्री का पर्दाफाश किया गया था और अग्रिपाड़ा सहित शहर के 13 अलग-अलग ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की कार्रवाई की गई थी।

'ड्रग्स फ्री मुंबई' अभियान और 15 विभागों की एकीकृत कार्ययोजना

बांद्रा रेलवे स्टेशन पर चरस की इतनी बड़ी खेप की जब्ती को महाराष्ट्र सरकार द्वारा चलाए जा रहे महत्वाकांक्षी और व्यापक 'ड्रग्स फ्री मुंबई' (ड्रग्स मुक्त मुंबई) अभियान से जोड़कर देखा जा रहा है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 30 जुलाई को मुंबई को पूरी तरह से नशा मुक्त बनाने के स्पष्ट लक्ष्य के साथ इस राज्यव्यापी अभियान का औपचारिक शुभारंभ किया था। मुख्यमंत्री ने इस अभियान के माध्यम से अगले 2 से 4 वर्षों के भीतर मुंबई महानगर को मादक पदार्थों और नशे के जाल से पूरी तरह मुक्त करने का समयबद्ध रोडमैप पेश किया है। राज्य सरकार की इस बहुआयामी रणनीति के तहत एक ओर जहां नशीली दवाओं की अवैध आपूर्ति, बिक्री और तस्करों के नेटवर्क पर कड़ा प्रहार किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर नशे की गिरफ्त में आ चुके युवाओं के पुनर्वास, उनकी काउंसलिंग और उन्हें समाज की मुख्यधारा में दोबारा शामिल करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

इस बड़े अभियान को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए राज्य सरकार ने 'होल ऑफ गवर्नमेंट' मॉडल को अपनाया है। इस विशेष मॉडल के अंतर्गत शासन के 15 अलग-अलग प्रमुख विभागों को एक साथ जोड़कर एकीकृत और समन्वित तरीके से कार्रवाई की जा रही है, ताकि किसी भी स्तर पर कोई ढिलाई न रहे। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए पुलिस प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि यदि मादक पदार्थों के अवैध कारोबार में किसी भी पुलिसकर्मी या सरकारी अधिकारी की संलिप्तता पाई जाती है, तो उसके खिलाफ बिना किसी रियायत के कठोरतम दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही, नशे के दुष्प्रभाव से नई पीढ़ी को बचाने के लिए स्कूली स्तर पर भी व्यापक मुहिम शुरू की गई है। राज्य भर के विद्यालयों में एंटी-ड्रग गाइडेंस और काउंसलिंग कमेटियां (नशा विरोधी मार्गदर्शन एवं परामर्श समितियां) गठित करने का फैसला किया गया है और इसके साथ ही 'ड्रग-फ्री स्कूल' अभियान चलाकर विद्यार्थियों को नशे के खतरों के प्रति जागरूक किया जा रहा है।

1,497 अवैध ढांचों और पान की टपरियों पर प्रशासनिक बुलडोजर कार्रवाई

मुंबई में नशीली दवाओं के पनपते संजाल और अवैध गतिविधियों पर पूरी तरह से नकेल कसने के उद्देश्य से पुलिस और नगर निगम प्रशासन ने संदिग्ध ठिकानों पर भी सीधी कार्रवाई शुरू कर दी है। इसी कड़ी में चलाए गए एक विशेष अभियान के तहत शहर भर में कुल 1,497 अवैध ढांचों, अवैध गुमटियों और सड़कों के किनारे बनी पान की टपरियों के खिलाफ निष्कासन तथा बुलडोजर कार्रवाई की गई है। प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि सार्वजनिक स्थानों, फुटपाथों और स्कूलों-कॉलेजों के आसपास बनी ऐसी अवैध टपरियां व अतिक्रमण अक्सर असामाजिक तत्वों के जमावड़े, संदिग्ध लेन-देन और नशीले पदार्थों की खुदरा खरीद-बिक्री के केंद्र बन जाते हैं। एंटी नारकोटिक्स सेल द्वारा जुलाई महीने में भी लगातार कई सफल रेड्स और गिरफ्तारियां दर्ज की गई थीं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि मुंबई पुलिस शहर को नशा मुक्त बनाने के अपने संकल्प पर पूरी दृढ़ता के साथ काम कर रही है और तस्करों के खिलाफ कार्रवाई को लगातार तेज किया जा रहा है।

सवाल-जवाब

बांद्रा रेलवे स्टेशन पर पुलिस ने कितनी चरस बरामद की है?
मुंबई पुलिस की एंटी नारकोटिक्स सेल ने बांद्रा रेलवे स्टेशन से 10 किलो 10 ग्राम चरस बरामद की है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार कीमत 10.10 करोड़ रुपये से अधिक है।
गिरफ्तार आरोपी की पहचान क्या है और वह कहां से आया था?
गिरफ्तार आरोपी 31 वर्ष का एक ऑटो ड्राइवर है, जो बिहार के मोतिहारी रेलवे स्टेशन से ट्रेन के जनरल डिब्बे में सवार होकर मुंबई पहुंचा था।
पुलिस जांच में आरोपी की क्या भूमिका सामने आई है?
आरोपी केवल एक ड्रग्स कूरियर के रूप में काम कर रहा था, जिसका काम नशीले पदार्थों की खेप बिहार से मुंबई लाकर यहां किसी अन्य व्यक्ति को सौंपना था।
अदालत ने आरोपी को कब तक पुलिस हिरासत में भेजा है?
स्थानीय अदालत में पेश किए जाने के बाद कोर्ट ने आरोपी को 21 अगस्त तक पुलिस हिरासत (PC) में भेज दिया है।
महाराष्ट्र सरकार का 'ड्रग्स फ्री मुंबई' अभियान क्या है?
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा 30 जुलाई को शुरू किए गए इस अभियान का लक्ष्य अगले 2 से 4 वर्षों में 15 सरकारी विभागों के समन्वय से मुंबई को पूरी तरह ड्रग्स मुक्त बनाना है।
अभियान के तहत अवैध ढांचों पर क्या कार्रवाई की गई है?
सार्वजनिक स्थानों पर अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए मुंबई में 1,497 अवैध ढांचों और पान की टपरियों के खिलाफ निष्कासन एवं तोड़फोड़ की कार्रवाई की गई है।
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टिप्पणियाँ 5

Arshdeep Ahluwalia@arshdeep-ahluwalia·1 दिन पहले

मोतिहारी से बांद्रा तक सामान्य डिब्बे में ₹10 करोड़ की चरस की तस्करी यह दर्शाती है कि अंतरराज्यीय सिंडिकेट अब आम यात्रियों की भीड़ का इस्तेमाल सुरक्षित मार्ग के रूप में कर रहे हैं। बिहार और नेपाल से जुड़े इस तस्करी नेटवर्क के स्थानीय रिसीवर और वित्तीय लेन-देन की तह तक जाना जांच एजेंसियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी।

Ravikash Gupta@ravikash·1 दिन पहले

मोतिहारी से मुंबई तक दस करोड़ रुपये की चरस की यह खेप यह दर्शाती है कि कैसे संगठित अपराध नेटवर्क परिवहन के पारंपरिक और सुगम साधनों का उपयोग कर रहे हैं। जनरल डिब्बे में सफर कर सुरक्षा एजेंसियों की नजरों से बचने का यह तरीका इस बात का संकेत है कि तस्कर अब भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक परिवहन को सुरक्षित गलियारे के रूप में देख रहे हैं। इस वित्तीय मूल्य और अंतरराज्यीय सप्लाई चेन का पर्दाफाश करने के लिए अब यह देखना अहम होगा कि पुलिस इस नेटवर्क के मुख्य वित्तपोषकों और स्थानीय रिसीवरों तक कैसे पहुँचती है।

Ananya Iyer@ananya-iyer·1 दिन पहले

मनोरंजन पत्रकारिता के दृष्टिकोण से, इस तरह के मामले और इनका फिल्मी रूपांतरण अब ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर अपराध आधारित थ्रिलर का मुख्य आधार बन चुके हैं। आम जनता के बीच छिपकर ड्रग्स की तस्करी करने की यह रियल-लाइफ कार्यप्रणाली दर्शाती है कि अपराध की दुनिया ने किस हद तक मनोवैज्ञानिक तरीकों को अपना लिया है। यह घटना दिखाती है कि कैसे एक सामान्य ऑटो ड्राइवर को आपराधिक सिंडिकेट द्वारा 'कैरियर' के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, जो आजकल क्राइम वेब सीरीज की मुख्य पटकथा बन रहा है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 दिन पहले

मोतिहारी से बांद्रा तक जनरल डिब्बे में दस करोड़ की चरस की यह खेप दर्शाती है कि तस्कर अब भीड़भाड़ वाले मार्गों को सुरक्षित जरिया मान रहे हैं। गिरफ्तार ऑटो ड्राइवर केवल एक मोहरा है, और असली चुनौती मुंबई के उस स्थानीय रिसीवर तक पहुँचना तथा नेपाल से जुड़े इस अंतरराज्यीय नेटवर्क के मुख्य सरगनाओं को बेनकाब करना होगी।

Rohan Verma@rohan-verma·1 दिन पहले

बिहार के रास्ते नेपाल सीमावर्ती क्षेत्रों से महानगरों तक मादक पदार्थों की पहुंच यह साबित करती है कि संगठित गिरोह सुदूर इलाकों को सुरक्षित ठिकाना बना रहे हैं। यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि उस सिंडिकेट को ध्वस्त करने की आवश्यकता को रेखांकित करता है जो उत्तर भारत के रास्ते आर्थिक रूप से कमजोर युवाओं को कम समय में अधिक पैसों का लालच देकर इस अवैध धंधے में धकेल रहा है।

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