बिहार के नालंदा जिले में अवैध शराब तस्करी के नेटवर्क पर शिकंजा कसने गई उत्पाद विभाग की विशेष टीम पर जानलेवा हमला हुआ है। गिरियक थाना इलाके में हुई इस हिंसक मुठभेड़ के दौरान आर्थिक खुफिया इकाई यानी EIB के सिपाही अजीत कुमार गोली लगने से गंभीर रूप से घायल हो गए और बाद में अस्पताल में उन्होंने दम तोड़ दिया। मूल रूप से नालंदा जिले के ही नगरनौसा थाना क्षेत्र स्थित नगमा गांव के रहने वाले अजीत कुमार की शहादत से समूचे विभाग में गहरा शोक व्याप्त है, वहीं उनके पैतृक गांव में मातम पसरा हुआ है। करीब आठ साल पहले दांपत्य जीवन में बंधे अजीत अपने पीछे सात साल की मासूम बेटी, पत्नी, माता-पिता, दो बहनों और तीन भाइयों को छोड़ गए हैं।
झारखंड से आ रही संदिग्ध खेप को घेरने के दौरान हुई फायरिंग
यह पूरा घटनाक्रम उस वक्त शुरू हुआ जब पटना स्थित मद्य निषेध एवं उत्पाद विभाग को सटीक गोपनीय इनपुट मिला था। सूचना में बताया गया था कि पड़ोसी राज्य झारखंड से एक पिकअप वैन के जरिए अवैध शराब की बड़ी खेप नालंदा की सीमा में लाई जा रही है। इस सूचना पर तत्काल कार्रवाई करते हुए पटना से EIB की विशेष टीम को नालंदा के लिए रवाना किया गया। टीम ने गिरियक क्षेत्र में मोर्चा संभाला और संदिग्ध पिकअप वैन की घेराबंदी शुरू कर दी। इसी दौरान जब टीम पावापुरी जल मंदिर मार्ग से पहले फ्लाईओवर की तरफ जाने वाले रास्ते के पास गाड़ी को रोकने का प्रयास कर रही थी, तभी तस्करों की तरफ से अचानक फायरिंग शुरू हो गई। इस गोलीबारी में आरक्षी अजीत कुमार सीधे गोली की जद में आ गए और लहूलुहान होकर गिर पड़े।
पावापुरी विम्स से PMCH रेफर, देर रात तोड़ा दम
गोलीबारी में गंभीर रूप से जख्मी जवान को उनके सहकर्मी तुरंत नजदीक के पावापुरी स्थित वर्धमान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज यानी विम्स अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां डॉक्टरों ने आपातकालीन स्थिति में प्राथमिक उपचार दिया, लेकिन उनकी बिगड़ती हालत और सीने व नाजुक अंगों में गहरे घाव को देखते हुए बेहतर चिकित्सा के लिए पटना स्थित PMCH रेफर कर दिया गया। पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद रात करीब डेढ़ बजे अजीत कुमार ने अंतिम सांस ली। ड्यूटी पर तैनात एक युवा सिपाही की इस तरह जान चले जाने से प्रशासनिक हलके में हड़कंप मच गया है।
उत्पाद अधीक्षक ने की पुष्टि, तस्करों की तलाश में लगातार दबिश
घटना की अधिकारिक जानकारी देते हुए नालंदा के उत्पाद अधीक्षक संजय कुमार चौधरी ने स्पष्ट किया कि शराब तस्करी रोकने के अभियान के तहत यह कार्रवाई की जा रही थी। उन्होंने बताया कि खुफिया तंत्र से पिकअप वैन में शराब लाए जाने की पक्की सूचना मिलने के बाद ही संदिग्ध वाहन को रोकने की कोशिश की गई थी। इसी अभियान के दौरान फायरिंग की घटना घटी, जिसमें EIB सिपाही अजीत कुमार गंभीर रूप से जख्मी हुए और अस्पताल में उनका निधन हो गया। अधीक्षक के अनुसार, कानून हाथ में लेने वाले अपराधियों की पहचान कर उनकी धरपकड़ के लिए पुलिस और उत्पाद विभाग की संयुक्त टीमें विभिन्न ठिकानों पर सघन छापेमारी कर रही हैं और पूरे मामले की गहन तफ्तीश जारी है।
परिजनों ने उठाए सवाल और जताई साजिश की आशंका
इस दुखद घटना के बाद जवान के परिजनों में भारी आक्रोश और निराशा देखने को मिल रही है। शहीद सिपाही अजीत कुमार के रिश्तेदार विक्रम कुमार ने पूरे घटनाक्रम पर सवाल खड़े करते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। विक्रम कुमार का कहना है कि परिवार को अजीत के घायल होने की खबर मिली थी, लेकिन अस्पताल में भर्ती कराए जाने के बाद टीम के कुछ सदस्य करीब दो से तीन घंटे तक वहां से गायब रहे और जब परिजनों का गुस्सा फूटा तब वे वापस पहुंचे। इसी आधार पर उन्होंने आशंका जताई कि घटना के पीछे कोई सोची-समझी साजिश हो सकती है। हालांकि इन आरोपों पर अभी तक किसी अधिकारी ने आधिकारिक मुहर नहीं लगाई है और प्रशासन का कहना है कि विस्तृत जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति साफ होगी।
कुम्हरार कार्यालय में गार्ड ऑफ ऑनर, पिता के छलके आंसू
शहीद जवान का पार्थिव शरीर पटना के कुम्हरार स्थित मद्य निषेध एवं उत्पाद विभाग के मुख्यालय लाया गया, जहां उन्हें पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। विभाग के आला अधिकारियों की मौजूदगी में अजीत कुमार को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इस भावुक मौके पर उनके पिता मदन कुमार अपने आंसुओं को रोक नहीं पाए और बेटे के पार्थिव शरीर से लिपटकर फूट-फूटकर रो पड़े। सात साल की अनाथ हो चुकी बेटी और रोती-बिलखती पत्नी का विलाप देखकर वहां मौजूद हर अधिकारी और जवान की आंखें नम हो गईं। विभाग ने शोक संतप्त परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए दोषियों को जल्द से जल्द कानून के शिकंजे में लाने का भरोसा दिलाया है।























