देशभर में कल्याणकारी योजनाओं और छात्रवृत्तियों का लाभ पाने के लिए अब तक अनिवार्य रूप से आधार सत्यापन पर जोर दिया जाता रहा है। हालांकि, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नए दिशा-निर्देशों के बाद उन लोगों को बड़ी राहत मिल गई है, जिनके पास आधार कार्ड उपलब्ध नहीं है। मंत्रालय की ओर से स्पष्ट किया गया है कि केवल आधार न होने की वजह से किसी भी पात्र व्यक्ति को सरकारी मदद से वंचित नहीं किया जा सकता है। इस व्यवस्था के तहत पहचान पुख्ता करने के लिए कई अन्य वैकल्पिक दस्तावेजों को मान्यता दी गई है, ताकि जरूरतमंदों तक सहायता आसानी से पहुंच सके।
किन योजनाओं पर लागू होंगे नए नियम
मंत्रालय की यह अधिसूचना मुख्य रूप से दो महत्वपूर्ण योजनाओं से जुड़ी हुई है। इनमें पहली योजना अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के बच्चों के लिए संचालित निशुल्क कोचिंग योजना है, जो पीएम केयर फॉर चिल्ड्रेन स्कीम के अंतर्गत आती है। वहीं दूसरी योजना अनुसूचित जाति के छात्रों को उच्च स्तर की शिक्षा प्रदान करने के लिए दी जाने वाली छात्रवृत्ति से संबंधित है। इस पूरे प्रावधान को आधार अधिनियम, 2016 की धारा 7 के तहत अधिसूचित किया गया है। इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य सरकारी सहायता में पारदर्शिता बढ़ाना, पूरी प्रक्रिया को सरल बनाना और सही लाभार्थी की सटीक पहचान करना है।
अठारह साल से कम उम्र के बच्चों के लिए वैकल्पिक दस्तावेज
यदि किसी लाभार्थी की उम्र 18 वर्ष से कम है और उसे अभी तक आधार संख्या आवंटित नहीं की गई है, तो सत्यापन के लिए कई अन्य प्रमाण स्वीकार किए जाएंगे। इन दस्तावेजों में आधार नामांकन की रसीद, जिसमें इनरोलमेंट आईडी दर्ज हो, सबसे प्रमुख है। इसके अलावा जन्म प्रमाण पत्र, पासपोर्ट, मान्यता प्राप्त शिक्षा बोर्ड द्वारा जारी 10वीं या 12वीं की अंकतालिका और प्रमाण पत्र का उपयोग किया जा सकता है। सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त बाल संरक्षण संस्थानों द्वारा जारी जन्मतिथि प्रमाण पत्र भी मान्य होगा। यदि बच्चे के पास ये दस्तावेज नहीं हैं, तो माता-पिता या अभिभावक का राशन कार्ड, जाति प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, पासपोर्ट या अंकतालिका के जरिए भी सत्यापन किया जा सकता है। कानूनी अभिभावक की स्थिति में सक्षम अधिकारी या अदालत का आदेश प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। विदेशी नागरिकों के मामले में उनकी श्रेणी के अनुसार ओसीआई कार्ड, नेपाली या भूटानी पासपोर्ट, तथा निर्धारित वीजा या पासपोर्ट का इस्तेमाल किया जा सकता है।
वयस्कों के लिए पहचान सत्यापित करने के अन्य विकल्प
अठारह वर्ष से अधिक आयु के वे नागरिक जिनके पास आधार नंबर नहीं है, वे इनरोलमेंट रसीद के साथ अपनी फोटोयुक्त किसी भी अन्य पहचान का दस्तावेज दिखाकर प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। ऐसे लाभार्थियों के लिए मतदाता पहचान पत्र, राशन कार्ड, जाति प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, मेडिकल या बीमा पहचान पत्र, पासपोर्ट, और 10वीं या 12वीं की मार्कशीट का उपयोग वैध माना गया है। इसके अलावा सरकारी सेवा में कार्यरत या सेवानिवृत्त कर्मचारियों का पहचान पत्र, दिव्यांग प्रमाण पत्र और ड्राइविंग लाइसेंस भी स्वीकार किए जाएंगे। यदि कोई कानूनी अभिभावक है, तो अदालत के आदेश की प्रति दिखाना आवश्यक होगा।
बायोमीट्रिक विफल होने पर अपनाई जाने वाली प्रक्रिया
सत्यापन के दौरान यदि किसी तकनीकी कारण से फिंगरप्रिंट यानी उंगलियों के निशान का बायोमीट्रिक प्रमाणीकरण विफल हो जाता है, तो चेहरे या आंख की पुतली यानी आइरिस स्कैन का उपयोग किया जा सकता है। यदि यह दूसरा बायोमीट्रिक विकल्प भी उपलब्ध न हो, तो रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर आने वाले वन-टाइम पासवर्ड के माध्यम से सत्यापन पूरा किया जा सकता है। यदि बायोमीट्रिक और ओटीपी दोनों ही तरीकों से प्रक्रिया पूरी होना संभव न हो, तो कुछ निश्चित शर्तों के अधीन क्यूआर कोड या ऑफलाइन ई-केवाईसी के जरिए भी पहचान की पुष्टि की जा सकती है। हालांकि, यह सुनिश्चित करना जरूरी होगा कि क्यूआर कोड या ई-केवाईसी का उपयोग करते समय भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण के डिजिटल हस्ताक्षर के प्रमाणीकरण की जांच अवश्य की जाए।
छात्रवृत्ति और सहायता राशि रोकने पर रोक
मंत्रालय की अधिसूचना में इस बात पर विशेष जोर दिया गया है कि किसी भी पात्र छात्र की छात्रवृत्ति केवल इस आधार पर नहीं रोकी जा सकती कि उसका आधार कार्ड नहीं बना है। ऐसी परिस्थितियों में लाभार्थी की पहचान उसके माता-पिता या कानूनी अभिभावक के माध्यम से सुनिश्चित की जा सकती है। इस तरह के सभी मामलों का पूरा रिकॉर्ड संधारित किया जाएगा और संबंधित विभाग समय-समय पर इसकी समीक्षा करेगा। इसके साथ ही अधिकारियों को यह जिम्मेदारी भी सौंपी गई है कि वे ऐसे मामलों में लाभार्थियों का आधार नामांकन कराने और उनके विवरण में सुधार से जुड़ी जानकारियों को अपडेट कराने में मदद करें।



















