पंजाब में नशीले पदार्थों के कारोबार और उसके खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों पर हो रहे हमलों का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। केंद्र सरकार ने इस पूरे घटनाक्रम पर बेहद सख्त रुख अपनाते हुए भगवंत मान सरकार से कई गंभीर मामलों में जवाब तलब किया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मंत्रालय ने राज्य के प्रशासनिक तंत्र से जुड़ी विभिन्न घटनाओं का पूरा ब्योरा मांगा है, जिनमें कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर गहरी चिंता जताई गई है।
गुरदासपुर में कार्यकर्ताओं पर हमला
गृह मंत्रालय के पास उपलब्ध जानकारी के अनुसार, गुरुवार रात गुरदासपुर जिले के मारी पनवां गांव में नशे के खिलाफ मुहिम चलाने वाले लोगों को निशाना बनाया गया। इस घटना में बिक्रमजीत सिंह, निशान सिंह और गुरमुख सिंह पर हमला हुआ, जिसे कथित तौर पर नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार से जोड़कर देखा जा रहा है। इस प्रकार की वारदातों ने उन नागरिकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं जो समाज को नशामुक्त करने के लिए आगे आ रहे हैं। केंद्र ने राज्य प्रशासन से पूछा है कि आखिर किन परिस्थितियों में यह घटना घटी और इस पर अब तक क्या कानूनी कदम उठाए गए हैं।
मानसा हत्या और संगरूर आत्महत्या का मामला
इस सख्ती के दायरे में केवल गुरदासपुर की घटना ही नहीं, बल्कि मानसा में हुई परविंदर सिंह झोटा की हत्या का मामला भी शामिल है। इसके अलावा संगरूर जिले में गुलजार सिंह की कथित आत्महत्या ने प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक कटघरे में खड़ा कर दिया है। मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, गुलजार सिंह एक ऐसे व्यक्ति के पिता थे जो खुद ड्रग्स की लत से जूझ रहा था। उन्होंने अपने क्षेत्र में खुलेआम मिल रहे नशीले पदार्थों की उपलब्धता पर तीखे सवाल उठाए थे और पंजाब के एक मंत्री पर भी गंभीर आरोप लगाए थे।
पंचायत के दबाव और प्रताड़ना के आरोप
संगरूर की घटना को लेकर यह भी सामने आया है कि गुलजार सिंह को स्थानीय ग्राम पंचायत की तरफ से कथित तौर पर प्रताड़ित किया गया था। उन पर अपनी शिकायतों को वापस लेने के लिए भारी दबाव बनाया जा रहा था, और ऐसा आरोप है कि इसी मानसिक दबाव के चलते उन्होंने अपनी जान दे दी। हालांकि, इन तमाम आरोपों की सच्चाई क्या है और इसमें किन लोगों की संलिप्तता है, इसकी पुष्टि पूरी तरह से जांच के बाद ही हो सकेगी, लेकिन शुरुआती स्तर पर इन मामलों ने राजनीतिक सरगर्मी बढ़ा दी है।
नारकोटिक्स नियंत्रण दृष्टिपत्र पर भी जवाब तलब
इन तमाम आपराधिक और संदिग्ध घटनाओं के अलावा, गृह मंत्रालय ने पंजाब सरकार से एक अन्य महत्वपूर्ण विषय पर भी रिपोर्ट मांगी है। यह मामला केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा देश के सभी मुख्यमंत्रियों के साथ साझा किए गए नारकोटिक्स नियंत्रण दृष्टिपत्र से जुड़ा हुआ है। इस विजन डॉक्यूमेंट की समयसीमा 2026 से 2029 तक निर्धारित की गई है। केंद्र ने राज्य प्रशासन से जानना चाहा है कि इस दृष्टिपत्र के तहत अब तक जमीनी स्तर पर क्या प्रगति हुई है और नशा रोकने के लिए किन उपायों को लागू किया गया है।
आगे की प्रशासनिक कार्रवाई पर निगाहें
केंद्र के इस कड़े हस्तक्षेप के बाद पंजाब में नशे के खिलाफ चल रही जंग और प्रशासनिक तैयारियों की नए सिरे से समीक्षा शुरू हो गई है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि भगवंत मान सरकार इन सभी मामलों पर गृह मंत्रालय को क्या जवाब देती है और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं की सुरक्षा के साथ-साथ निष्पक्ष जांच कैसे सुनिश्चित की जाती है।



















