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नेपाल बाढ़ के कारण तिब्बत में फंसे छह कैलाश यात्रियों की वापसी शुरू, विदेश मंत्रालय की निगरानी में रेस्क्यूबिहार
28 अग॰ 2026, 4:20 pm (1 घंटे पहले)· 4

नेपाल बाढ़ के कारण तिब्बत में फंसे छह कैलाश यात्रियों की वापसी शुरू, विदेश मंत्रालय की निगरानी में रेस्क्यू

नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के कारण तिब्बत के जिलोंग में फंसे छह भारतीय कैलाश मानसरोवर यात्रियों को सुरक्षित निकालने का काम शुरू कर दिया गया है। दो बीमार महिलाओं की स्थिति को देखते हुए भारतीय दूतावास और विदेश मंत्रालय इस अभियान पर नजर बनाए हुए हैं।

नेपाल और सीमावर्ती क्षेत्रों में अचानक आई भीषण फ्लैश फ्लड के कारण तिब्बत के जिलोंग शहर में फंसे छह भारतीय नागरिकों की सुरक्षित निकासी की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। कैलाश मानसरोवर यात्रा पर निकले ये श्रद्धालु प्राकृतिक आपदा के कारण सीमा पर ही फंस गए थे। अब भारतीय विदेश मंत्रालय और चीन में स्थित भारतीय दूतावास की सीधी देखरेख में इन्हें नेपाल के रास्ते वापस भारत लाने की तैयारी की जा रही है। चीनी अधिकारियों के साथ हुए प्रशासनिक समन्वय के बाद सभी छह यात्री फिलहाल जिलोंग से नेपाल सीमा की ओर बढ़ रहे हैं।

बाढ़ से इमिग्रेशन दफ्तर बहने के कारण ठप हुआ जमीनी मार्ग

प्राप्त विवरण के अनुसार यह पूरा समूह तिब्बत के जिलोंग शहर स्थित एक होटल में ठहरा हुआ था। ये सभी नागरिक वैध कैलाश मानसरोवर ग्रुप वीजा पर यात्रा कर रहे थे और प्रक्रिया के तहत वापसी की तैयारी में थे। हालांकि नेपाल सीमा पर स्थित इमिग्रेशन कार्यालय अचानक आई विनाशकारी बाढ़ के तेज बहाव में पूरी तरह बह गया। इस घटना के कारण चीन से बाहर निकलने का सामान्य जमीनी मार्ग पूरी तरह बंद हो गया और यात्रियों के सामने संकट खड़ा हो गया।

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मार्ग बंद होने और बिगड़ते मौसम को देखते हुए इन भारतीय नागरिकों ने तुरंत मदद की गुहार लगाई थी। 26 अगस्त को भारतीय अधिकारियों के पास भेजे गए एक आपातकालीन अनुरोध में समूह ने चीनी प्रशासन से बातचीत कर तुरंत सहायता दिलाने की मांग की थी। इसके बाद भारतीय कूटनीतिक अधिकारियों ने तत्परता दिखाते हुए चीनी अधिकारियों से संपर्क साधा और निकासी अभियान को हरी झंडी दिलवाई।

हाई एल्टीट्यूड पर ऑक्सीजन की भारी कमी और मेडिकल इमरजेंसी

फंसे हुए छह भारतीय नागरिकों में से चार लोग महाराष्ट्र के रहने वाले हैं, जबकि दो नागरिक दिल्ली के निवासी हैं। यात्रा के दौरान समूह की दो महिला सदस्यों, स्मिता पवार और योगिनी पाटिल, को मानसरोवर क्षेत्र में अत्यधिक ऊंचाई पर होने के कारण गंभीर हाइपोक्सिया यानी ऑक्सीजन की भारी कमी की समस्या का सामना करना पड़ा। स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद दोनों को तुरंत नीचे जिलोंग शहर लाया गया, जहां उन्हें लगातार ऑक्सीजन सपोर्ट की आवश्यकता पड़ी।

समूह के सदस्यों और उनके परिजनों ने बताया कि जिलोंग में उपलब्ध स्थानीय चिकित्सा सुविधाएं उनकी गंभीर स्थिति के उपचार के लिए पर्याप्त नहीं थीं। इसी वजह से 26 अगस्त को भेजे गए आपातकालीन संदेश में दोनों महिलाओं की गंभीर मेडिकल स्थिति का हवाला देते हुए जिलोंग से सीधे काठमांडू तक एयरलिफ्ट या हेलीकॉप्टर द्वारा रेस्क्यू करने की मांग की गई थी। फिलहाल उन्हें जमीनी रास्ते से सुरक्षित सीमा तक पहुंचाया जा रहा है।

विदेश मंत्रालय की पहल और अन्य फंसे भारतीयों की सुरक्षा

यह निकासी अभियान नेपाल और आसपास के इलाकों में आई बाढ़ के कारण पैदा हुए बड़े मानवीय संकट के बीच चलाया जा रहा है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि आपदा से प्रभावित भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और कुशलक्षेम सुनिश्चित करना भारतीय मिशनों की सर्वोच्च प्राथमिकता है। सरकार उन लोगों को प्राथमिकता के आधार पर तत्काल मदद पहुंचा रही है जिन्हें चिकित्सा सहायता की जरूरत है।

विदेश मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक प्राकृतिक आपदा के बाद चीन में करीब 400 भारतीय नागरिक फंसे हुए हैं, जिनसे संपर्क स्थापित कर लिया गया है। भारतीय राजनयिक अधिकारी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और फंसे हुए सभी भारतीयों की सुरक्षित स्वदेश वापसी सुनिश्चित करने के लिए चीनी तथा नेपाली अधिकारियों के साथ निरंतर वार्ता कर रहे हैं।

सवाल-जवाब

तिब्बत के जिलोंग में कितने भारतीय नागरिक फंसे थे?
तिब्बत के जिलोंग शहर में कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए छह भारतीय नागरिक फंसे हुए थे, जिन्हें सुरक्षित निकालने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
फंसे हुए भारतीय यात्री भारत के किन राज्यों के रहने वाले हैं?
इन छह फंसे हुए भारतीयों में से चार नागरिक महाराष्ट्र के रहने वाले हैं, जबकि दो यात्री दिल्ली के निवासी हैं।
कैलाश मानसरोवर यात्रा के दौरान दो महिलाओं की स्वास्थ्य स्थिति क्यों बिगड़ी?
मानसरोवर में अत्यधिक ऊंचाई के कारण स्मिता पवार और योगिनी पाटिल को गंभीर हाइपोक्सिया यानी ऑक्सीजन की कमी की समस्या हो गई थी, जिसके कारण उन्हें निरंतर ऑक्सीजन सपोर्ट देना पड़ा।
यात्री तिब्बत से नेपाल के रास्ते बाहर क्यों नहीं निकल पा रहे थे?
नेपाल सीमा पर स्थित इमिग्रेशन दफ्तर अचानक आई भीषण बाढ़ में बह गया था, जिससे चीन से बाहर निकलने का जमीनी रास्ता पूरी तरह बंद हो गया था।
कुल कितने भारतीय नागरिक बाढ़ के बाद चीन में फंसे हुए हैं?
विदेश मंत्रालय के अनुसार बाढ़ के बाद चीन में करीब 400 भारतीय नागरिक फंसे हुए हैं, जिनसे भारतीय राजनयिक लगातार संपर्क बनाए हुए हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·1 घंटे पहले

यह घटना उच्च हिमालयी क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन और आपदा प्रबंधन की बढ़ती चुनौतियों को उजागर करती है। नेपाल में अचानक आई बाढ़ के कारण सीमाई बुनियादी ढांचे और इमिग्रेशन कार्यालयों का बहना यह साबित करता है कि सामरिक और धार्मिक यात्राओं के दौरान त्वरित प्रतिक्रिया दल और मजबूत डिजिटल संचार नेटवर्क कितना आवश्यक है। विदेश मंत्रालय और चीनी प्रशासन के बीच यह समन्वय भविष्य में इस मार्ग पर यात्रा करने वाले नागरिकों के लिए एक मानक प्रोटोकॉल बन सकता है, बशर्ते उच्च ऊंचाई वाले चिकित्सा संकटों से निपटने के लिए स्थानीय स्तर पर उन्नत स्वास्थ्य सुविधाएं विकसित की जाएं।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

इस घटना से सीमावर्ती कूटनीति और आपदा प्रतिक्रिया तंत्र की गंभीर परीक्षा हुई है। जब प्राकृतिक आपदाओं के कारण इमिग्रेशन और संपर्क मार्ग नष्ट हो जाते हैं, तब नागरिकों को बचाने के लिए कूटनीतिक चैनलों का तुरंत सक्रिय होना अत्यंत आवश्यक होता है। भविष्य में ऐसी यात्राओं के दौरान उच्च ऊंचाई पर होने वाले स्वास्थ्य संकटों से निपटने के लिए एक स्थायी मेडिकल इमरजेंसी प्रोटोकॉल तैयार किया जाना चाहिए, ताकि फंसे हुए यात्रियों को समय पर सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।

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