चीनी की कीमतों पर नियंत्रण के लिए भारत सरकार का फैसला, मिलों के लिए लागू होगा पखवाड़े का नया बिक्री ढांचास्टैनफोर्ड सर्वेक्षण का बड़ा खुलासा: अमेरिका में राजनीतिक ध्रुवीकरण को खत्म करने को लेकर जेन ज़ी सबसे अधिक आशावादीबीकानेर निकाय चुनाव के बीच चोरी के गहने खरीदने के आरोप में संजय सोनी गिरफ्तार, भाजपा ने पद से हटायाएमएससीआई इंडिया इंडेक्स में बड़ा फेरबदल: लौरस लैब्स और लेंसकार्ट समेत 4 शेयर शामिल, 3 कंपनियां बाहरदिशा सालियन मृत्यु जांच याचिका पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित, आदित्य ठाकरे के वकील ने दी राजनीतिक द्वेष की दलीलधौलपुर जिला जेल में रक्षाबंधन पर उमड़ा जज्बात का सैलाब बहनों ने बंदियों की कलाई पर बांधी राखीकभी खुशी कभी गम से वॉर तक ऋतिक रोशन की 5 ब्लॉकबस्टर फिल्में जिन्होंने बॉक्स ऑफिस पर रचा इतिहासजैक्सन होल सम्मेलन में केविन वॉर्श के भाषण से पहले अमेरिकी डॉलर में हलचल, सोने और क्रिप्टो बाजार पर बनी नजरेंफेडेरल रिजर्व चेयरमैन केविन वॉश के पहले जैक्सन होल भाषण से पहले करेंसी मार्केट सतर्क, अमेरिकी डॉलर में बड़े फेरबदल के आसारआईटी शेयरों की धमाकेदार तेजी से उभरा शेयर बाजार, सेंसेक्स 330 अंक सुधरा
फरीदाबाद के सोतई और जवा गांव में आगरा नहर का गंदा पानी खेतों में जहर घोल रहा, किसानों ने की जांच की मांगहरियाणा
28 अग॰ 2026, 5:10 pm (1 घंटे पहले)· 2

फरीदाबाद के सोतई और जवा गांव में आगरा नहर का गंदा पानी खेतों में जहर घोल रहा, किसानों ने की जांच की मांग

फरीदाबाद के सोतई और जवा गांवों में आगरा नहर के जरिए आ रहे रासायनिक कचरे और सीवेज के पानी से किसान बेहद परेशान हैं। फसलों और उपजाऊ मिट्टी को हो रहे भारी नुकसान के बीच स्थानीय किसानों ने पानी के रासायनिक परीक्षण और अनिवार्य ट्रीटमेंट की मांग उठाई है।

हरियाणा के फरीदाबाद जिले में स्थित कई कृषि प्रधान गांवों के किसान इन दिनों एक गंभीर जल संकट का सामना कर रहे हैं। खेतों की सिंचाई के लिए मुख्य आधार मानी जाने वाली आगरा नहर का पानी इतना ज्यादा दूषित हो चुका है कि यह फसलों को सींचने के बजाय उन्हें बर्बाद कर रहा है। नहर में साफ पानी की आपूर्ति के बजाय औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला जहरीला रसायन और नालों का काला कचरा सीधे बहाया जा रहा है। सिंचाई के किसी अन्य विकल्प के अभाव में स्थानीय किसान इसी प्रदूषित पानी से अपने खेतों को सींचने के लिए मजबूर हैं, जिससे फसलें नष्ट हो रही हैं और भूमि की उर्वरता पर भी गहरा नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।

औद्योगिक कचरे और गंदे नालों से विषैला हुआ पानी

दिल्ली से शुरू होकर फरीदाबाद के विभिन्न ग्रामीण इलाकों से गुजरने वाली आगरा नहर में प्रदूषण का स्तर खतरनाक सीमा तक पहुंच गया है। बल्लभगढ़ के पास स्थित जवा गांव के रहने वाले किसान देवी सिंह लंबा का कहना है कि आसपास चालू केमिकल कारखानों से निकलने वाला अपशिष्ट बिना किसी उपचार के सीधे नहर के पानी में गिराया जा रहा है। विषैले रसायनों से युक्त यह गंदा पानी जब खेतों में पहुंचता है तो खड़ी फसलों की गुणवत्ता को भारी नुकसान पहुंचाता है। इतना ही नहीं, नहर के आसपास बसे गांवों में रहने वाले लोग पानी के इस प्रदूषण के कारण विभिन्न गंभीर बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। देवी सिंह लंबा के अनुसार, औद्योगिक संस्थानों को नहर में तरल कचरा प्रवाहित करने से पूर्व वाटर ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित करने चाहिए ताकि पानी पूरी तरह साफ होकर ही बाहर निकले।

ये भी पढ़ें

सोतई गांव और आसपास के कृषि क्षेत्र पर असर

सोतई गांव के किसान नारायण लगभग 6 एकड़ कृषि भूमि पर खेती करते हैं। उनका कहना है कि आगरा नहर में न केवल फैक्ट्रियों का रसायन मिला पानी आ रहा है, बल्कि शहर के बड़े नालों और गटरों का कचरा भी सीधे इसी जलस्रोत में छोड़ा जा रहा है। वैकल्पिक सिंचाई साधनों की कमी के कारण किसान इसी बदबूदार और दूषित पानी से फसलों की सिंचाई करने पर विवश हैं। किसानों के मन में इस बात को लेकर गहरा डर बना हुआ है कि जहरीले तत्वों से युक्त यह पानी पैदावार और आम जनता के स्वास्थ्य को लंबे समय तक नुकसान पहुंचाएगा।

सोतई गांव के ही एक अन्य किसान संदीप कुमार ने बताया कि उनके गांव में लगभग 700 से 800 एकड़ उपजाऊ जमीन पर खेती की जाती है। मौजूदा समय में आगरा नहर का पानी बिल्कुल रंग में काला और गटर के कचरे जैसा दिखता है। संदीप कुमार के अनुसार, करीब 10 वर्ष पूर्व नहर में स्वच्छ जल प्रवाहित होता था और उस समय किसानों को सिंचाई में किसी प्रकार की कठिनाई नहीं आती थी। हालांकि, पिछले एक दशक के दौरान इलाके में हुए तीव्र औद्योगिक विकास के साथ-साथ यह जल संकट लगातार गहराता चला गया। चूंकि क्षेत्र का अधिकांश किसान वर्ग सिंचाई के लिए पूरी तरह इसी नहर पर निर्भर है, इसलिए दूषित पानी का सीधा असर उनकी आजीविका और पैदावार पर पड़ रहा है।

फसलों की बर्बादी, उपजाऊ मिट्टी पर मार और बढ़ता स्वास्थ्य संकट

नहर के दूषित पानी से होने वाला नुकसान केवल फसलों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह खेत की मिट्टी की संरचना और गुणवत्ता को भी स्थायी रूप से खराब कर रहा है। रसायनों के नियमित जमाव से मिट्टी की नमी सोखने और पोषक तत्व प्रदान करने की क्षमता प्रभावित हो रही है। इसके साथ ही नहर के आसपास रहने वाले ग्रामीणों में त्वचा संबंधी संक्रमण और अन्य बीमारियां बढ़ रही हैं। किसान देवी सिंह लंबा का यह भी कहना है कि किसान पहले से ही सरकारी या सहकारी स्तर पर समय पर खाद न मिलने की समस्या से जूझ रहे हैं। अक्सर खाद की किल्लत के कारण उन्हें खुले बाजार से अत्यधिक ऊंचे दामों पर उर्वरक खरीदना पड़ता है। ऐसे में सिंचाई के लिए जहरीले पानी का मिलना किसानों की आर्थिक स्थिति को और कमजोर कर रहा है।

किसानों की मांग: पानी की जांच और अनिवार्य ट्रीटमेंट

लगातार बिगड़ते हालात को देखते हुए क्षेत्र के किसानों ने प्रशासन और संबंधित विभागों से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। देवी सिंह लंबा और अन्य स्थानीय किसानों का कहना है कि सरकार को आगरा नहर में बह रहे पानी के नमूनों की प्रयोगशाला में त्वरित जांच करानी चाहिए। यदि जांच में विषैले रासायनिक तत्व पाए जाते हैं, तो कंपनियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। किसानों की स्पष्ट मांग है कि औद्योगिक अपशिष्ट को सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट में पूरी तरह साफ करने के बाद ही नहर में छोड़े जाने का नियम कड़ाई से लागू किया जाए, जिससे कृषि और जनस्वास्थ्य दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

सवाल-जवाब

फरीदाबाद के कौन से गांव आगरा नहर के पानी से प्रभावित हैं?
फरीदाबाद के सोतई और जवा गांव सहित बल्लभगढ़ क्षेत्र के कई आसपास के ग्रामीण इलाके इससे बुरी तरह प्रभावित हैं।
आगरा नहर का पानी दूषित होने की मुख्य वजह क्या है?
आसपास की केमिकल फैक्ट्रियों से निकलने वाला जहरीला कचरा और गटर तथा नालों का पानी सीधे नहर में छोड़ना इसका मुख्य कारण है।
सोतई गांव में कितने एकड़ जमीन पर खेती होती है?
सोतई गांव में लगभग 700 से 800 एकड़ कृषि भूमि पर खेती की जाती है, जो सिंचाई के लिए इसी नहर पर निर्भर है।
दूषित पानी से खेती करने पर किसानों को क्या नुकसान हो रहा है?
इससे फसलें खराब हो रही हैं, खेतों की मिट्टी की उर्वरता नष्ट हो रही है और स्थानीय निवासियों में बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है।
स्थानीय किसानों ने प्रशासन से क्या मांगें रखी हैं?
किसानों ने नहर के पानी की प्रयोगशाला जांच कराने और कारखानों तथा सीवेज के पानी को ट्रीट करने के बाद ही नहर में छोड़ने की मांग की है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·51 मिनट पहले

फरीदाबाद के सोतई और जवा गांवों में आगरा नहर के पानी का इस तरह जहरीला होना सिर्फ एक स्थानीय जल संकट नहीं, बल्कि पर्यावरण और कानून-व्यवस्था के गंभीर उल्लंघन का मामला है। यदि समय रहते प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और जिला प्रशासन ने अवैध रूप से कचरा फेंकने वाली औद्योगिक इकाइयों पर आपराधिक लापरवाही और पर्यावरण संरक्षण कानूनों के तहत सख्त कार्रवाई नहीं की, तो यह स्थिति न केवल किसानों की आजीविका को पूरी तरह तबाह कर देगी, बल्कि ग्रामीण आबादी के स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा सार्वजनिक खतरा बन जाएगी।

Rohan Verma@rohan-verma·51 मिनट पहले

फरीदाबाद के सोतई और जवा गांवों में अनियंत्रित औद्योगिक कचरे का आगरा नहर में मिलना सीधे तौर पर भूजल और खाद्य सुरक्षा के लिए एक गंभीर चेतावनी है। यदि समय रहते फरीदाबाद और दिल्ली के सीमावर्ती औद्योगिक क्षेत्रों में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट्स की सख्त निगरानी नहीं की गई, तो यह संकट आगामी चुनावों में ग्रामीण मतदाताओं के असंतोष का एक बड़ा मुद्दा बन सकता है। प्रशासन को तुरंत संयुक्त निरीक्षण टीम गठित कर दोषी फैक्ट्रियों पर भारी जुर्माना लगाना चाहिए ताकि किसानों की उपजाऊ जमीन और स्वास्थ्य सुरक्षित रह सके।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR