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प्रदर्शन में लापरवाही पड़ी भारी, रेलवे बोर्ड ने पांच सीनियर अधिकारियों को जबरन सेवानिवृत्त कियाबिहार
1 अग॰ 2026, 11:59 pm (6 घंटे पहले)· 0

प्रदर्शन में लापरवाही पड़ी भारी, रेलवे बोर्ड ने पांच सीनियर अधिकारियों को जबरन सेवानिवृत्त किया

रेल मंत्रालय की समीक्षा समितियों ने खराब प्रदर्शन और अनियमितताओं के चलते पांच वरिष्ठ अधिकारियों को नियम 1802(ए) के तहत जबरन सेवानिवृत्त कर दिया, इससे पहले मार्च में भी छह अफसरों पर ऐसी कार्रवाई हो चुकी है।

रेलवे बोर्ड ने प्रदर्शन में लगातार कमी और अनियमितताओं को देखते हुए पांच बड़े अधिकारियों को सेवा से समय से पहले हटाने का फैसला लिया है। रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव के निर्देश पर रेल मंत्रालय की समीक्षा समितियों ने भारतीय रेलवे स्थापना संहिता, खंड-2 के नियम 1802(ए) के तहत यह कार्रवाई की, जो मौलिक नियमों के नियम 56(जे) के बराबर माना जाता है। यह नियम प्रशासन को सार्वजनिक हित में किसी भी अधिकारी को जबरन सेवानिवृत्त करने का अधिकार देता है।

किन अधिकारियों पर गिरी गाज

समीक्षा समितियों की सिफारिश पर जिन पांच समूह 'ए' अधिकारियों को हटाया गया, उनमें भारतीय रेलवे स्वास्थ्य सेवा यानी आईआरएचएस के दो एसएजी स्तर के अधिकारी शामिल हैं। इनके अलावा उत्तर रेलवे में भारतीय रेलवे इंजीनियरिंग सेवा यानी आईआरएसई के एक जेएजी अधिकारी और उसी सेवा के एक और अधिकारी को भी सूची में रखा गया है। पश्चिम रेलवे में तैनात भारतीय रेलवे यातायात सेवा यानी आईआरटीएस के एक जेएजी अधिकारी पर भी यही कार्रवाई हुई है। यानी उत्तर रेलवे और पश्चिम रेलवे, दोनों जोन इस बार सीधे प्रभावित हुए हैं।

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कैसे हुई जांच, किन बिंदुओं पर हुआ आकलन

तय प्रक्रिया के मुताबिक समीक्षा समितियों ने पहले हर अधिकारी की सेवा फाइल का बारीकी से मूल्यांकन किया। इसमें उनकी सालाना कार्य प्रदर्शन आकलन रिपोर्ट यानी एपीएआर, ईमानदारी से जुड़ा रिकॉर्ड, सतर्कता विभाग से मिले इनपुट, अनुशासनात्मक कार्रवाइयों का इतिहास और सेवा से जुड़े अन्य जरूरी दस्तावेज खंगाले गए। इस पूरी पड़ताल के बाद समितियों ने सर्वसम्मति से यह राय बनाई कि इन अधिकारियों को सार्वजनिक हित में समय से पहले सेवानिवृत्त कर देना ही ठीक रहेगा। यानी यह फैसला किसी एक शिकायत पर नहीं, बल्कि रिकॉर्ड की पूरी समीक्षा के बाद लिया गया।

भ्रष्टाचार और लापरवाही पर जीरो टॉलरेंस

रेलवे की तरफ से जारी बयान में साफ कहा गया है कि भारतीय रेलवे भ्रष्टाचार, ईमानदारी में कमी और अक्षमता को लेकर कोई ढील नहीं देता। बयान में यह भी जोड़ा गया कि सार्वजनिक सेवा में ईमानदारी, अनुशासन और जवाबदेही जैसे मूल्यों से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। भारतीय रेलवे स्थापना संहिता के जिन प्रावधानों के तहत यह कार्रवाई हुई है, उनका मकसद इन्हीं मूल्यों को बनाए रखना बताया गया है। रेलवे ने यह भी कहा कि सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को इस कार्रवाई को गंभीरता से लेना चाहिए, क्योंकि प्रशासन ने साफ कर दिया है कि सेवा के जरूरी मानकों पर खरा न उतरने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

मार्च में भी हो चुकी है ऐसी कार्रवाई

यह पहला मौका नहीं है जब रेलवे ने इस तरह का कदम उठाया हो। इसी साल मार्च में भी रेलवे छह लापरवाह अधिकारियों को जबरन वीआरएस दे चुका है। उस वक्त जिन पदों पर तैनात अधिकारियों को हटाया गया था, उनमें उत्तर रेलवे में सीएमई/प्रोजेक्ट/एचक्यू, दक्षिण पश्चिम रेलवे में एनएफ-एचएजी/आईआरएसएमई, दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे में एसएजी/आईएसआरई, पूर्व रेलवे में एसएजी/आईआरएसएसई, रेलवे बोर्ड सचिवालय सेवा में ग्रेड-1 यानी अंडर सेक्रेटरी/डिप्टी डायरेक्टर स्तर का पद और पीपीएस, आरबीएसएसएस शामिल थे। नियम 1802(ए) प्रशासन को जनहित में किसी भी अधिकारी को रिटायर करने का अधिकार देता है, और बार-बार हो रही इस तरह की कार्रवाई से साफ संकेत मिलता है कि रेलवे संगठन के किसी भी स्तर पर खराब प्रदर्शन और अक्षमता बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।

सवाल-जवाब

कितने अधिकारियों को जबरन सेवानिवृत्त किया गया?
पांच समूह 'ए' अधिकारियों को नियम 1802(ए) के तहत जबरन सेवानिवृत्त किया गया।
यह कार्रवाई किस नियम के तहत हुई?
भारतीय रेलवे स्थापना संहिता, खंड-2 के नियम 1802(ए) के तहत, जो मौलिक नियमों के नियम 56(जे) के बराबर है।
किन सेवाओं और जोन के अधिकारी प्रभावित हुए?
आईआरएचएस के दो एसएजी अधिकारी, उत्तर रेलवे में आईआरएसई के दो अधिकारी और पश्चिम रेलवे में आईआरटीएस का एक जेएजी अधिकारी प्रभावित हुए।
फैसला किस आधार पर लिया गया?
एपीएआर, अखंडता रिकॉर्ड, सतर्कता इनपुट और अनुशासनात्मक इतिहास की समीक्षा के बाद समितियों ने सर्वसम्मति से यह सिफारिश की।
क्या पहले भी ऐसी कार्रवाई हुई है?
हां, इसी साल मार्च में छह अन्य अधिकारियों को भी जबरन वीआरएस दिया गया था।
यह आदेश किसके निर्देश पर हुआ?
यह कार्रवाई रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव के आदेश पर की गई।
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