कोलकाता में प्रवर्तन निदेशालय ने जमीन पर कब्जा जमाने और दस्तावेजों में कथित हेरफेर से जुड़े एक बड़े मामले में अमित गांगुली को धर दबोचा है। केंद्रीय जांच एजेंसी के कोलकाता जोनल ऑफिस द्वारा यह बड़ी कार्रवाई की गई है। इस पूरे प्रकरण में मुख्य रूप से 100 करोड़ रुपये से अधिक की मनी लॉन्ड्रिंग का संदेह जताया जा रहा है, जिसकी परतें जांच के दौरान तेजी से खुल रही हैं।
गिरफ्तारी और आपराधिक तौर-तरीके
प्रवर्तन निदेशालय के अनुसार, अमित गांगुली की यह गिरफ्तारी 15 सितंबर 2026 की रात को अमल में लाई गई। जांच के दौरान यह बात सामने आई कि आरोपी ने विभिन्न लोगों और संस्थाओं की संपत्तियों पर गैरकानूनी तरीकों से अपना नियंत्रण स्थापित किया था। संपत्तियों को हड़पने के लिए फर्जी बोर्ड रेजोल्यूशन, जाली हस्ताक्षर वाले फर्जी एग्रीमेंट फॉर सेल, फर्जी डीड और तमाम अन्य जाली दस्तावेजों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया था।
मुकदमे और जबरन वसूली
जांच एजेंसी के मुताबिक, केवल कागजी हेरफेर ही नहीं बल्कि लैंड रिकॉर्ड में भी गंभीर छेड़छाड़ की गई थी। झूठे और फर्जी दावों के आधार पर कई सिविल मुकदमे भी अदालतों में दाखिल किए गए ताकि कानूनी दांव-पेंच के जरिए संपत्तियों पर कब्जा पक्का किया जा सके। इसके अलावा, असली जमीन मालिकों के वैध अधिकारों को सिरे से नकारा गया और जो लोग भी अपने हक के लिए आवाज उठाते थे, उन्हें कथित तौर पर डराया-धमकाया जाता था तथा उन पर शारीरिक बल का प्रयोग किया जाता था।
पश्चिम बंगाल पुलिस के रिकॉर्ड और 23 एफआईआर
जांच एजेंसी के रिकॉर्ड के अनुसार, अमित गांगुली के खिलाफ अकेले पश्चिम बंगाल पुलिस में ही कुल 23 एफआईआर दर्ज हैं। इतने सारे आपराधिक मामलों में उसकी संलिप्तता इस बात की ओर स्पष्ट इशारा करती है कि वह लगातार और सुनियोजित तरीके से आपराधिक गतिविधियों में लिप्त रहा है। एजेंसी का मानना है कि इन तमाम मामलों से एक ऐसा पैटर्न सामने आता है, जिसमें संपत्तियों को धोखाधड़ी के जरिए हड़पने और फिर उनके अवैध लेन-देन का एक सिलसिला लगातार चल रहा था।


















