हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के झीड़ी में कीतरपुर-मनाली फोरलेन प्रोजेक्ट के तहत बनाए जा रहे फ्लाईओवर और अंडरपास का रास्ता साफ हो गया है। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने इस निर्माण कार्य पर रोक लगाने से स्पष्ट इनकार कर दिया है, जिससे प्रोजेक्ट को बड़ी राहत मिली है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर करीब 33 करोड़ रुपये की लागत आ रही है, और अदालत के इस निर्णय के बाद निर्माण कार्य के जल्द गति पकड़ने की उम्मीद है।
हाईकोर्ट ने क्या दिए निर्देश
न्यायाधीश संदीप शर्मा की अदालत में 10 सितंबर को इस मामले पर सुनवाई हुई थी। कोर्ट ने अपने फैसले में यह स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय राजमार्ग जैसे महत्वपूर्ण और जनहित से जुड़े प्रोजेक्ट्स के कार्यों पर रोक लगाना किसी भी लिहाज से उचित नहीं है। अदालत ने मंडी जिला प्रशासन और पुलिस विभाग को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे निर्माण स्थल पर पहुंचाई जा रही किसी भी प्रकार की बाधा को तुरंत दूर करें और वहां पर्याप्त पुलिस सुरक्षा मुहैया कराएं। इस मामले की अगली सुनवाई अब 15 अक्तूबर को तय की गई है। तब तक नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया, जिला प्रशासन और पुलिस को अपनी प्रगति रिपोर्ट अदालत में पेश करनी होगी।
क्यों हो रहा है स्थानीय स्तर पर विरोध
इस फ्लाईओवर के निर्माण को लेकर स्थानीय स्तर पर काफी विरोध देखने को मिल रहा है। झीड़ी इलाके के कुछ लोग लगातार इस निर्माण का विरोध कर रहे हैं और उनका तर्क है कि इस संरचना के खड़ा होने से उनके स्थानीय व्यापार पर बहुत बुरा असर पड़ेगा। विरोध प्रदर्शन कर रहे ग्रामीण भूख हड़ताल जैसे कदम भी उठा चुके हैं। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग यह है कि फ्लाईओवर की जगह पर एक रोटरी का निर्माण किया जाए। स्थानीय लोगों के विरोध के दबाव के चलते एनएचएआई द्वारा शुरू किया गया निर्माण कार्य बीच में ही बंद करवाना पड़ा था।
प्रशासन और अदालत का पक्ष
प्रशासन और परियोजना से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि यह फ्लाईओवर कम अंडरपास फोरलेन के केवल एक हिस्से पर ही तैयार किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में यातायात व्यवस्था को पूरी तरह से सुगम और सुरक्षित बनाना है। वर्तमान में इस तरह की उचित सुविधा न होने की वजह से राहगीरों और वाहन चालकों को फोरलेन पर आवाजाही करने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, जिसके कारण आए दिन हादसे भी पेश आ रहे हैं। इन्हीं सुरक्षा और यातायात संबंधी कारणों को ध्यान में रखते हुए यह मामला अदालत तक पहुंचा था। इससे पहले भी इस फ्लाईओवर के निर्माण को रोकने के लिए एक याचिका दायर की गई थी जिसे अदालत पहले ही खारिज कर चुकी है। ताजा आदेश के साथ ही अदालत ने एक बार फिर निर्माण कार्य को सुचारू रूप से जारी रखने का फरमान सुनाया है।



















