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असम में बाढ़ का कहर जारी: 104 हुई मृतकों की संख्या, अलीगढ़ से मदद के लिए रवाना हुई 8 डॉक्टरों की टीमअसम
15 अग॰ 2026, 11:20 am (4 घंटे पहले)· 2

असम में बाढ़ का कहर जारी: 104 हुई मृतकों की संख्या, अलीगढ़ से मदद के लिए रवाना हुई 8 डॉक्टरों की टीम

असम में बाढ़ के कारण अब तक 104 लोगों की जान जा चुकी है और 78 हजार से अधिक लोग प्रभावित हैं। राहत कार्यों में सहयोग के लिए जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के आठ डॉक्टरों का एक दल दवाओं के साथ असम पहुंचा है।

असम में विनाशकारी बाढ़ से उपजे संकट के बीच राहत और चिकित्सा सहायता पहुंचाने के प्रयास तेज हो गए हैं। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज स्थित रेसिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के आठ डॉक्टरों की एक विशेष मेडिकल टीम शुक्रवार को असम के बाढ़ प्रभावित इलाकों के लिए रवाना हुई। यह टीम वहां के प्रभावित क्षेत्रों में जाकर स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन करेगी, मरीजों की जांच करेगी और जरूरतमंदों के बीच आवश्यक दवाएं बांटेगी।

स्वास्थ्य शिविरों और राहत सामग्री की व्यवस्था

रेसिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ अख्तर अली के अनुसार, यह मेडिकल टीम कम से कम चार दिनों तक बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में डेरा डाले रहेगी। डॉक्टरों का यह दल अपने साथ भारी मात्रा में आवश्यक दवाएं और जीवनरक्षक राहत सामग्री लेकर गया है। इस टीम को अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के जनसंपर्क अधिकारी और उपकुलपति प्रोफेसर मोहसिन खान ने जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। टीम का मुख्य उद्देश्य बाढ़ पीड़ितों को तत्काल मानवीय और चिकित्सीय सहायता उपलब्ध कराना है।

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बाढ़ की स्थिति और जिलों का हाल

असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में बाढ़ से प्रभावित जिलों की संख्या सात बनी हुई है। शिवसागर जिले में शुक्रवार को एक और व्यक्ति की मौत दर्ज की गई, जिससे इस साल बाढ़ के कारण जान गंवाने वालों का कुल आंकड़ा 104 तक पहुंच गया है। राज्यभर में बाढ़ से प्रभावित लोगों की संख्या बढ़कर 78,000 से अधिक हो गई है। वर्तमान में सात जिलों के 20 राजस्व सर्किलों के अंतर्गत आने वाले 313 गांव जलमग्न हैं।

राहत शिविर और सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र

जिलेवार स्थिति पर नजर डालें तो गोलाघाट बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित जिला बनकर उभरा है, जहां 30,778 लोग जलभराव की समस्या का सामना कर रहे हैं। इसके बाद नौगांव में 26,292 लोग और शिवसागर जिले में 12,480 लोग बाढ़ से सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। इसके अलावा कामरूप, होजाई, जोरहाट और लखीमपुर जिलों में भी बाढ़ का पानी बस्तियों में भरा हुआ है। स्थानीय प्रशासन की ओर से विस्थापित लोगों को शरण देने के लिए 31 राहत शिविर संचालित किए जा रहे हैं, जिनमें 5,000 से अधिक लोगों ने आश्रय लिया हुआ है। साथ ही प्रभावित आबादी तक राहत सामग्री पहुंचाने के लिए 37 राहत वितरण केंद्र भी लगातार काम कर रहे हैं।

सवाल-जवाब

असम बाढ़ में मदद के लिए कितने डॉक्टर रवाना हुए हैं?
जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के रेसिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के आठ डॉक्टरों की टीम रवाना हुई है।
मेडिकल टीम बाढ़ प्रभावित इलाकों में कितने दिन रुकेगी?
डॉक्टरों की टीम बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में कम से कम चार दिनों तक रुककर स्वास्थ्य शिविर आयोजित करेगी और दवाएं बांटेगी।
असम में बाढ़ से अब तक कितने लोगों की मौत हो चुकी है?
असम में इस साल बाढ़ के कारण जान गंवाने वाले लोगों की कुल संख्या 104 तक पहुंच गई है।
असम का कौन सा जिला बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित है?
गोलाघाट जिला बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित है, जहां 30,778 लोग प्रभावित हुए हैं।
बाढ़ पीड़ितों के लिए कितने राहत शिविर चलाए जा रहे हैं?
प्रशासन द्वारा 31 राहत शिविर चलाए जा रहे हैं, जिनमें 5,000 से अधिक विस्थापित लोगों ने शरण ली है, साथ ही 37 राहत वितरण केंद्र काम कर रहे हैं।
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टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·2 घंटे पहले

असम में 104 मौतों और 78 हजार से अधिक प्रभावितों के बीच, अलीगढ़ के डॉक्टरों की यह पहल मानवीय और चिकित्सा सहायता के दृष्टिकोण से बेहद अहम है। हालांकि, आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत ऐसे संकटों में अंतर-राज्यीय मेडिकल दलों की तैनाती और राहत शिविरों में महामारी नियंत्रण के लिए प्रशासनिक समन्वय सुनिश्चित करना जिला प्रशासन की सबसे बड़ी चुनौती होगी।

Arjun Mehta@arjun-mehta·2 घंटे पहले

असम में बाढ़ और 104 मौतों के इस संकट के बीच, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के डॉक्टरों की यह पहल मानवीय और चिकित्सा सहायता के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। सात जिलों और 313 गांवों में फैले इस आपदा के बीच, जिला प्रशासन और राहत शिविरों के लिए सबसे बड़ी चुनौती विस्थापितों के बीच संक्रामक रोगों को रोकना और चिकित्सा आपूर्ति की निरंतरता बनाए रखना होगी।

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