अंतरराष्ट्रीय नशा तस्करी नेटवर्क और सीमा पार सक्रिय सिंडिकेट्स के विरुद्ध सुरक्षा एजेंसियों की रणनीतिक मुहिम को बड़ी सफलता मिली है. विदेश में बैठकर मादक पदार्थों की बड़ी खेप भेजने वाले कुख्यात तस्कर नवप्रीत सिंह को तुर्की से भारत डिपोर्ट कर लिया गया है. देश की धरती पर कदम रखते ही आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी की गईं और आरोपी को सीधे जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया गया.
फर्जी पहचान और तुर्की की नागरिकता की आड़
जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि नवप्रीत सिंह विदेश में नवाब विर्क के नाम से जाली पहचान बनाकर रह रहा था. उसने कानूनी शिकंजे से बचने के लिए इसी फर्जी पहचान के जरिए तुर्की की नागरिकता भी हासिल कर ली थी. हालांकि, नया नाम और विदेशी नागरिकता का रक्षा कवच भी उसे भारतीय एजेंसियों की नजरों से छिपा नहीं सका.
अफगानिस्तान से भारत में हेरोइन और आइस की सप्लाई
तुर्की में छिपने के दौरान भी वह लगातार अवैध नशीले पदार्थों के वैश्विक सिंडिकेट को संचालित कर रहा था. वह अफगानिस्तान से भारत के विभिन्न हिस्सों में हेरोइन और मेथामफेटामाइन, जिसे आमतौर पर आइस कहा जाता है, की भारी खेप पहुंचाने वाले नेटवर्क का संचालन कर रहा था. तकनीकी निगरानी और पुख्ता सूचनाओं के आधार पर भारतीय एजेंसियों ने विदेशी जमीन पर उसकी वास्तविक पहचान का पर्दाफाश किया. इसके बाद तुर्की के प्रशासन से कूटनीतिक समन्वय स्थापित कर उसके प्रत्यर्पण की प्रक्रिया को अंजाम दिया गया.
दिसंबर 2029 तक ड्रग नेटवर्क खत्म करने का लक्ष्य
इस पूरी कार्रवाई को मादक पदार्थों के अवैध कारोबार के खिलाफ चल रहे व्यापक अभियान के तहत एक कड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है. सरकार ने दिसंबर 2029 से पहले देश के भीतर सक्रिय हर बड़े ड्रग कार्टेल को पूरी तरह खत्म करने का संकल्प दोहराया है. अधिकारियों के अनुसार विदेशी धरती पर छिपे अपराधियों के खिलाफ इस प्रकार की सख्त कार्रवाइयां आने वाले समय में भी निरंतर जारी रहेंगी.





















