घर पहुंचने से 40 किमी पहले सड़क दुर्घटना में सेना के जवान मोतीसिंह तंवर का निधन, रामदेवरा में सैन्य सम्मान से विदाईनागालैंड में कॉफी की खेती को बढ़ावा देने के लिए बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और बाजार पहुंच जरूरी: सतिंदर कुमार भल्लाराजस्थान के तीन छात्रों को समरकंद से मिला बुलावा, सिल्क रोड यूनिवर्सिटी में पूरी स्कॉलरशिप पर करेंगे मास्टर्समल्चिंग तकनीक से बस्तर में मिर्च की शानदार पैदावार, कम खर्च में किसान कमा रहे लाखों का मुनाफाबघेलखंडी जायका: ताजे बांस के कोमल अंकुरों से घर पर तैयार करें मसालेदार करील की सब्जीसपा प्रमुख पर केशव प्रसाद मौर्य का पलटवार, कहा भाजपा में आने के लिए मिले थे अखिलेशपलामू के खेतों में आलू की बंपर पैदावार के लिए वैज्ञानिक तरीके अपनाएं किसानबुरहानपुर के बाजारों में पहुंचा शेरनी फल, चोली के दानों संग तैयार करें पारंपरिक खट्टी-मीठी सब्जीबिग बॉस 20 से बाहर हुईं रीति तिवारी, फूट-फूटकर रोईं आम्रपाली दुबे और उदिति बनीं घर की नई कैप्टनघर के भीतर हवा शुद्ध करने और नमी बढ़ाने के लिए बेहद उपयोगी हैं ये 6 इनडोर पौधे
अलवर के खोह-दरीबा में बंदरों के उत्पात से तंग ग्रामीणों ने चलाया पकड़ो अभियान, 50 को सुरक्षित स्थानों पर भेजाराजस्थान
3 अक्तू॰ 2026, 10:43 am (41 मिनट पहले)· 0

अलवर के खोह-दरीबा में बंदरों के उत्पात से तंग ग्रामीणों ने चलाया पकड़ो अभियान, 50 को सुरक्षित स्थानों पर भेजा

राजस्थान के अलवर स्थित खोह-दरीबा गांव में बंदरों के लगातार हमलों और सामान उठाने से परेशान ग्रामीणों ने पंचायत स्तर पर विशेष अभियान चलाकर 50 बंदरों को पकड़ा है.

राजस्थान के अलवर जिले के अंतर्गत टहला इलाके में आने वाले खोह-दरीबा गांव में बंदरों का उपद्रव इस कदर बढ़ गया कि स्थानीय निवासियों को खुद आगे आकर कदम उठाना पड़ा. लंबे समय से आबादी वाले इलाकों में बंदरों की तादाद तेजी से बढ़ रही थी, जिसके चलते रोजमर्रा की जिंदगी बुरी तरह प्रभावित हो रही थी. इस गंभीर परेशानी को देखते हुए ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत के सहयोग से बंदरों को पकड़ने का एक सुनियोजित अभियान शुरू किया है.

पंचायत स्तर पर शुरू हुई कार्रवाई और 50 बंदर पकड़े गए

इस सामूहिक मुहिम के तहत अब तक लगभग 50 बंदरों को सफलतापूर्वक पकड़ा जा चुका है. पकड़े गए इन सभी बंदरों को पूरी सावधानी और सुरक्षित तरीके से गांव की सीमा से दूर दूसरे सुरक्षित प्राकृतिक इलाकों में छोड़ दिया गया है. ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान अभी थमा नहीं है, बल्कि इलाके में बचे हुए अन्य उत्पाती बंदरों को पकड़ने के लिए अभियान को निरंतर जारी रखा गया है.

ये भी पढ़ें

घरों में घुसपैठ, खाने की चोरी और बच्चों पर हमले का डर

गांव के निवासियों के अनुसार बंदरों के बड़े झुंड आए दिन बस्तियों में दाखिल होकर भारी परेशानी खड़ी कर रहे थे. ये बंदर बिना किसी खौफ के रिहायशी मकानों की छतों और कमरों में घुस जाते हैं और वहां रखा खाने-पीने का राशन तथा दूसरा घरेलू सामान उठाकर भाग जाते हैं. इतना ही नहीं, ग्रामीणों ने यह भी साझा किया कि कई मौकों पर बंदरों द्वारा छोटे बच्चों को काटने की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं.

दहशत के साए में ग्रामीण, राहत दिलाने की पुरजोर कोशिश

बंदरों के इस आक्रामक व्यवहार की वजह से पूरे इलाके में भय का माहौल बन गया था. लोग अपने घरों से बाहर सामान्य रूप से निकलने में भी हिचकिचा रहे थे, जबकि अभिभावक अपने बच्चों को अकेले गलियों में भेजने से पूरी तरह कतरा रहे थे. चूंकि यह समस्या काफी लंबे वक्त से बनी हुई थी और कोई ठोस हल नहीं निकल रहा था, इसलिए ग्राम पंचायत के स्तर पर यह ठोस फैसला लिया गया. ग्रामीणों का मुख्य मकसद गांव को बंदरों के इस खौफ से मुक्त कराना और आम जनजीवन को फिर से सामान्य व सुरक्षित बनाना है.

सवाल-जवाब

अलवर के किस गांव में बंदरों को पकड़ने का अभियान चलाया जा रहा है?
यह अभियान राजस्थान के अलवर जिले में टहला क्षेत्र के खोह-दरीबा गांव में चलाया जा रहा है.
ग्रामीणों ने अब तक कितने बंदरों को पकड़ा है?
अभियान के तहत अब तक लगभग 50 बंदरों को पकड़ा जा चुका है.
पकड़े गए बंदरों का क्या किया गया?
पकड़े गए सभी बंदरों को पूरी सुरक्षा के साथ गांव से दूर दूसरी जगह छोड़ दिया गया है.
ग्रामीणों को बंदरों से मुख्य रूप से क्या परेशानियां हो रही थीं?
बंदर घरों में घुसकर खाने-पीने का सामान ले जाते थे और बच्चों को काटने की घटनाएं भी सामने आ रही थीं.
क्या बंदरों को पकड़ने का यह अभियान अभी भी चल रहा है?
हां, बचे हुए बंदरों को पकड़ने के लिए यह अभियान लगातार जारी है.
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·4 मिनट पहले

पचास बंदर पकड़ लिए, पर क्या गारंटी है कि वे वापस लौटकर नहीं आएंगे? समस्या की जड़ तक जाना चाहिए था।

Rohan Verma@rohan-verma·3 मिनट पहले

करण भाई, आपकी बात बिल्कुल सही है। जब तक जंगलों के कटने से बंदरों का दायरा कम होना नहीं रुकेगा, वे वापस बस्तियों का रुख करेंगे ही।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp