जम्मू-कश्मीर की ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर में नशीले पदार्थों और अवैध हथियारों की तस्करी से जुड़े एक बड़े नेटवर्क के खिलाफ पुलिस ने निर्णायक कार्रवाई की है। डाउनटाउन इलाके में सक्रिय इस अंतर-राज्यीय सिंडिकेट पर शिकंजा कसते हुए पुलिस ने अब तक कुल आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। इस व्यापक अभियान के दौरान प्रतिबंधित दवाओं का भारी जखीरा, हेरोइन जैसा संदिग्ध पदार्थ, आग्नेयास्त्र, लाखों रुपये की नकदी, लग्जरी सामान और करीब एक किलोग्राम सोना बरामद किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, यह गिरोह सामान्य स्थानीय खुदरा विक्रेताओं का समूह नहीं था, बल्कि राज्यों के बीच फैली एक सुनियोजित और संगठित आपूर्ति श्रृंखला का संचालन कर रहा था।
जांच का दायरा और नेटवर्क का खुलासा
इस पूरे ऑपरेशन की रूपरेखा साझा करते हुए श्रीनगर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जी.वी. संदीप चक्रवर्ती ने बताया कि जांचकर्ताओं ने कई गुप्त सूचनाओं और कड़ियों को जोड़कर इस गिरोह का सुराग हासिल किया। इस पड़ताल की पहली ठोस कड़ी वसीम जरगर के रूप में सामने आई थी। उससे पूछताछ और उसके संपर्कों की पड़ताल करने के बाद पुलिस की विशेष टीमों ने परत-दर-परत आगे बढ़ते हुए नेटवर्क से जुड़े अन्य सदस्यों की पहचान की और उन्हें दबोच लिया। एसएसपी के अनुसार, पकड़े गए सभी आरोपियों की इस अवैध कारोबार में अलग-अलग और तय जिम्मेदारियां थीं। जांच में उनके बीच निरंतर संचार के सबूत, साझा तौर-तरीके और महत्वपूर्ण वित्तीय व बैंकिंग लेन-देन के मजबूत सुराग मिले हैं, जो यह साबित करते हैं कि यह रैकेट सुनियोजित तरीके से ड्रग्स मंगवाने और उन्हें अलग-अलग ठिकानों तक पहुंचाने का काम करता था।
लाखों की संख्या में नशीली दवाएं और कोडीन जब्त
छापेमारी की इस कार्रवाई में पुलिस ने बेहद चिंताजनक मात्रा में फार्मास्युटिकल नशीले पदार्थ जब्त किए हैं। बरामदगी के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, कुल 2,19,425 नशीली गोलियां और कैप्सूल बरामद किए गए हैं। इसके अलावा, कंटेनरों सहित 3.830 किलोग्राम कोडीन मिश्रित तरल पदार्थ भी अपने कब्जे में लिया गया है। तलाशी अभियान के दौरान लगभग 40 ग्राम हेरोइन जैसा संदिग्ध रासायनिक पदार्थ भी मिला है। जांच दल अब इस तकनीकी पहलू की गहराई से पड़ताल कर रहे हैं कि इतनी बड़ी खेप किस राज्य या स्रोत से खरीदी गई थी, इसे किन परिवहन माध्यमों से श्रीनगर के डाउनटाउन तक पहुंचाया गया और इस नेटवर्क में कौन से वितरक शामिल थे।
85.75 लाख रुपये नकद, सोना और लग्जरी सामान बरामद
इस सिंडिकेट की काली कमाई का अंदाजा आरोपियों के ठिकानों और बैंक लॉकरों से जब्त की गई संपत्ति से लगाया जा सकता है। पुलिस ने अलग-अलग ठिकानों से करीब 85.75 लाख रुपये की नकदी बरामद की है। इसके अतिरिक्त, सोने के 108 सिक्के, सोने के बिस्कुट और विभिन्न प्रकार के सोने के आभूषण व कीमती वस्तुएं जब्त की गई हैं, जिनका कुल वजन करीब एक किलोग्राम आंका गया है। आरोपियों के पास से उच्च मूल्य वाली विलासिता की वस्तुएं भी बरामद हुई हैं, जिनमें दो रोलेक्स घड़ियां, एक डायर ब्रांड का लेडीज बैग, विशेष लेंस से लैस एक डीएसएलआर कैमरा और एक आईफोन 16 प्रो मैक्स शामिल हैं।
हथियार, वाहन और आवासीय संपत्ति पर कानूनी शिकंजा
नशीली दवाओं के सिंडिकेट से हथियारों के कनेक्शन भी उजागर हुए हैं। तलाशी के दौरान पुलिस ने.32 बोर की एक पिस्तौल, दो खाली मैगजीन और एक धारदार खंजर बरामद किया है। तस्करी के काम में इस्तेमाल की जा रही दो गाड़ियों को भी संबंधित कानूनों के तहत जब्त कर लिया गया है। इसके साथ ही, वित्तीय नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए आरोपियों से जुड़े कई बैंक खातों की पड़ताल की गई, जिसके बाद करीब 1.07 करोड़ रुपये की जमा राशि को फ्रीज कर दिया गया है। कठोर कानूनी कार्रवाई के तहत सफाकदल क्षेत्र के पाटलीपोरा छत्ताबल स्थित मुख्य आरोपी मोहम्मद वसीम जरगर के एक रिहायशी मकान को भी पुलिस ने आधिकारिक तौर पर कुर्क व जब्त कर लिया है।
एनडीपीएस और आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज
इस पूरे मामले में स्थानीय सफाकदल पुलिस स्टेशन में एफआईआर संख्या 135/2026 दर्ज की गई है। पुलिस ने सभी आठों आरोपियों के खिलाफ स्वापक औषधि एवं मन प्रभावी पदार्थ अधिनियम यानी एनडीपीएस एक्ट, आर्म्स एक्ट और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के अंतर्गत सख्त कानूनी प्रावधान लागू किए हैं।
फार्मा कंपनियों और ट्रांसपोर्ट नेटवर्क की गहन जांच
एसएसपी जी.वी. संदीप चक्रवर्ती ने स्पष्ट किया कि मामले की जांच अभी प्राथमिक चरण से आगे बढ़ रही है और कई पहलुओं पर काम चल रहा है। पुलिस अब उन फार्मास्युटिकल कंपनियों और थोक दवा विक्रेताओं की पहचान करने में जुटी है, जहां से प्रतिबंधित दवाओं की यह खेप अवैध रूप से निकाली गई थी। साथ ही अंतर-राज्यीय ट्रांसपोर्ट एजेंसियों और मालवाहक वाहनों की भूमिका की भी जांच की जा रही है कि नियमों को दरकिनार कर यह स्टॉक कश्मीर घाटी तक कैसे पहुंचा। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस गिरोह के बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंकेज यानी उत्पादकों से लेकर अंतिम खरीदारों तक की श्रृंखला की जांच की जा रही है, जिससे आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां तथा संपत्तियों की जब्ती होने की पूरी संभावना है। गौरतलब है कि हाल ही में श्रीनगर में नशा तस्करी और आतंकी गतिविधियों से जुड़े मामलों में एनडीपीएस और यूएपीए के तहत 7 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियों को जब्त किया जा चुका है।





















