बॉलीवुड अभिनेता अजय देवगन ने जब फिल्म 'फूल और कांटे' से अपने अभिनय सफर का शानदार आगाज किया था, तब उनके सामने इंडस्ट्री में खुद को एक स्थापित और लोकप्रिय कलाकार के रूप में बनाए रखने की चुनौती थी। दर्शक और समीक्षक उन्हें एक सफल डेब्यू स्टार तो मान चुके थे, लेकिन उन्हें अपनी पहचान को आम दर्शकों के बीच और मजबूत करने के लिए एक बड़ी ब्लॉकबस्टर की सख्त जरूरत थी। यह इंतजार 5 अगस्त 1994 को खत्म हुआ, जब सिनेमाघरों में एक्शन और पारिवारिक ड्रामे से भरपूर फिल्म 'विजयपथ' प्रदर्शित की गई। इस फिल्म में अजय देवगन द्वारा निभाए गए करण के किरदार, उनके जबरदस्त एक्शन दृश्यों, चेहरे के आक्रामक हावभाव और निडर अंदाज ने दर्शकों का दिल जीत लिया। बदला और न्याय की इस कहानी को दर्शकों का ऐसा भरपूर प्यार मिला कि सिनेमाघरों में हर दृश्य पर तालियां और सीटियां गूंजने लगीं। इस सफलता के साथ ही 90 के दशक में अजय देवगन एक दमदार अभिनेता के रूप रूप में स्थापित हो गए।
बॉक्स ऑफिस पर 2.75 करोड़ के बजट से रचा इतिहास
फिल्म 'विजयपथ' का निर्माण टाइम मैग्नेटिक बैनर के तले किया गया था। उस दौर के सिनेमाई मानकों के आधार पर यह मध्यम बजट की फिल्म मानी जाती थी, जिसे तैयार करने में लगभग 2.75 करोड़ रुपये का खर्च आया था। जब यह फिल्म बड़े पर्दे पर रिलीज हुई, तो इसने अपनी निर्माण लागत से चार गुना से भी अधिक की कमाई करके सभी को चौंका दिया। भारत के साथ-साथ विदेशी बाजारों से भी इस फिल्म को दर्शकों का शानदार प्रतिसाद मिला, जिसके चलते इसका कुल वैश्विक कलेक्शन 11.54 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इस ऐतिहासिक वित्तीय सफलता की बदौलत 'विजयपथ' वर्ष 1994 की चौथी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली हिट फिल्मों की सूची में शामिल हो गई।
डैनी डेन्जोंगपा का खौफ और तब्बू के साथ पहली जोड़ी
फिल्म की इस अभूतपूर्व कामयाबी के पीछे सिर्फ मुख्य अभिनेता का एक्शन ही नहीं, बल्कि इसकी मजबूत सहायक स्टारकास्ट और खलनायक का दमदार अभिनय भी एक बड़ी वजह रहा। डैनी डेन्जोंगपा ने फिल्म में मुख्य खलनायक दिलावर सिंह की भूमिका निभाई थी। उनके खौफनाक और क्रूर अभिनय की समीक्षकों ने जमकर सराहना की। इसके अलावा, 'विजयपथ' भारतीय सिनेमा के लिए इसलिए भी खास रही क्योंकि इसमें अजय देवगन और तब्बू की जोड़ी पहली बार बड़े पर्दे पर एक साथ नजर आई। दर्शकों ने स्क्रीन पर उनकी केमिस्ट्री और रोमांटिक सीन्स को हाथों-हाथ लिया। इस फिल्म के बाद अजय देवगन और तब्बू की ऑन-स्क्रीन जोड़ी 90 के दशक और उसके बाद भी बॉलीवुड की सबसे पसंदीदा और चर्चित जोड़ियों में शुमार हो गई।
अनु मलिक का संगीत और गानों की जबरदस्त लोकप्रियता
90 के दशक में किसी भी व्यावसायिक फिल्म को ब्लॉकबस्टर बनाने में उसके संगीत का बहुत बड़ा योगदान होता था, और 'विजयपथ' का म्यूजिक एल्बम उस पूरे साल का सबसे बड़ा हिट साबित हुआ। मशहूर संगीतकार अनु मलिक द्वारा तैयार किए गए इस फिल्म के गानों ने महीनों तक रेडियो स्टेशन और म्यूजिक चार्ट्स पर अपना दबदबा बनाए रखा। गायक कुमार सानू और अलका याग्निक की आवाज में सजा रोमांटिक गाना 'राह में उनसे मुलाकात हो गई' और अलीसा चिनॉय का गाया हुआ पेपी ट्रैक 'रुक रुक रुक अरे बाबा रुक' हर किसी की जुबान पर चढ़ गया। इन ब्लॉकबस्टर गानों ने दर्शकों को आकर्षित करके सिनेमाघरों के टिकट खिड़की तक खींचने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
अजय देवगन के करियर का सबसे बड़ा टर्निंग प्वाइंट
व्यावसायिक मोर्चे पर झंडे गाड़ने के साथ-साथ 'विजयपथ' अजय देवगन के करियर का एक बड़ा टर्निंग प्वाइंट साबित हुई। इसने उन्हें सिर्फ एक एक्शन स्टार के टैग से बाहर निकालकर एक हरफनमौला (ऑल-राउंडर) अभिनेता के रूप में स्थापित किया। इस फिल्म की अपार सफलता के बाद बॉलीवुड के कई बड़े निर्देशकों और प्रतिष्ठित प्रोडक्शन बैनर ने अजय देवगन को अपनी बड़ी फिल्मों के ऑफर देने शुरू कर दिए। फिल्म के असरदार संवादों और बेहतरीन पटकथा ने 90 के दशक के मसाला सिनेमा को एक नया आयाम दिया। 1994 में आई इस एक्शन-ड्रामा फिल्म ने अजय देवगन के लिए हिंदी सिनेमा का अगला सुपरस्टार बनने का रास्ता पूरी तरह से साफ कर दिया।



















