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अभिनेता विनय पाठक ने सख्त पुलिस अधिकारी पिता से चार साल तक छिपाया करियर बदलने का सच, ऐसे मिली सफलताबॉलीवुड
11 जुल॰ 2026, 4:17 pm (18 दिन पहले)· 6

अभिनेता विनय पाठक ने सख्त पुलिस अधिकारी पिता से चार साल तक छिपाया करियर बदलने का सच, ऐसे मिली सफलता

शीर्ष 10 मेधावी छात्रों में शामिल रहने वाले विनय पाठक ने अपनी कॉरपोरेट राह छोड़कर अभिनय की दुनिया चुनी और वर्षों तक इसे अपने परिवार से छुपा कर रखा।

रामधारी सिंह दिनकर की प्रसिद्ध रचना 'रश्मिरथी' और हरिवंश राय बच्चन की कालजयी कृति 'मधुशाला' की कविताएं कंठस्थ रखने वाले बिहार के इस प्रतिभावान युवक का वास्तविक जीवन किसी रोमांचक सस्पेंस फिल्म से कम नहीं है। 1990 के दशक की शुरुआत में, वह एक कॉलेज में MBA की पढ़ाई कर रहे थे और अपनी कक्षा के शीर्ष 10 मेधावी छात्रों में शामिल थे। एक सुरक्षित और शानदार कॉरपोरेट करियर उनका इंतजार कर रहा था, लेकिन तभी कॉलेज के ही थियेटर में पीटर शेफर के नाटक 'ऐकव्स' को देखने के बाद उनका पूरा जीवन बदल गया। इस नाटक का उन पर ऐसा असर हुआ कि उन्होंने अपने घर पर किसी को भी सूचित किए बिना चुपके से अपना दाखिला 'बैचलर ऑफ फाइन आर्ट्स' यानी BFA में करा लिया।

चार साल तक छिपाया पढ़ाई बदलने का बड़ा राज

इस पूरे बदलाव की सबसे असाधारण बात यह थी कि विनय पाठक ने अपने करियर और पढ़ाई की धारा बदलने की बात को पूरे चार वर्षों तक अपने परिवार से छिपाकर रखा। जब उनकी पढ़ाई पूरी होने वाली थी और दीक्षांत समारोह में महज कुछ ही दिन बचे थे, तब उन्होंने अपने पिता सच्चिदानंद पाठक को इस सच से अवगत कराया। उनके पिता बिहार पुलिस में एक बेहद कड़क और अनुशासित पुलिस उपाधीक्षक यानी DSP के पद पर कार्यरत थे। हालांकि, पिता ने उनकी कलात्मक रुचि का सम्मान किया और उनके इस फैसले का पूरा समर्थन करते हुए उनका हौसला बढ़ाया।

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पारंपरिक माहौल में बीता बचपन और शुरुआती शिक्षा

विनय पाठक का जन्म 12 जुलाई 1968 को बिहार के भोजपुर जिले के बिहिया में हुआ था। उनका लालन-पालन बेहद अनुशासित और पारंपरिक माहौल में हुआ। उनकी माता किशोरी पाठक एक कुशल गृहिणी थीं और उनके बड़े भाई शशि शेखर पाठक बाद में प्राध्यापक बने। पिता के पुलिस विभाग की नौकरी में बार-बार होने वाले स्थानांतरण के कारण उनका बचपन रांची और धनबाद जैसे शहरों में बीता। उनकी शुरुआती पढ़ाई रांची के एक बोर्डिंग स्कूल में संपन्न हुई। इसके बाद उन्होंने हजारीबाग के सेंट कोलंबा कॉलेज से शिक्षा प्राप्त की और फिर इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से इंग्लिश ऑनर्स की डिग्री हासिल की।

रंगमंच से जुड़ाव और निजी जीवन की शुरुआत

अपने थियेटर मेंटर डॉ. फारले रिचमंड की महत्वपूर्ण सलाह पर विनय पाठक ने वर्ष 1995 में भारतीय रंगमंच की ओर रुख करने का फैसला किया। मुंबई आने के बाद विज्ञापन फिल्मों की शूटिंग के दौरान उनकी मुलाकात सोनिका सहाय से हुई। यही मुलाकात धीरे-धीरे प्यार में बदली और बाद में दोनों ने शादी कर ली।

मुंबई का कठिन संघर्ष और अभिनय की दुनिया में पहचान

90 के दशक में जब वह सपनों की नगरी मुंबई पहुंचे, तो उन्हें करियर के शुरुआती दौर में कड़े संघर्ष का सामना करना पड़ा। उन्होंने शुरुआत में छोटे विज्ञापनों और टीवी सीरियल्स से अपनी राह बनाई। साल 1998 में आए मशहूर युवा धारावाहिक 'हिप हिप हुर्रे' में 'विन्नी सर' की भूमिका से उन्हें पहली बड़ी और लोकप्रिय पहचान मिली। इसके बाद उन्होंने रणवीर शौरी के साथ मिलकर 'रणवीर, विनय और कौन?' तथा 'द ग्रेट इंडियन कॉमेडी शो' जैसे हास्य कार्यक्रमों को पेश किया, जिसने उनकी गजब की हास्य टाइमिंग को दर्शकों के सामने निखारा।

सिनेमा के यादगार किरदार और अभिनय की विविधता

फिल्मों के पर्दे पर साल 2006 में आई फिल्म 'खोसला का घोसला' में आसिफ इकबाल के किरदार और साल 2007 में आई 'भेजा फ्राई' में सीधे-सादे टैक्स इंस्पेक्टर 'भारत भूषण' की भूमिका ने उन्हें दर्शकों का चहेता बना दिया और स्टारडम की बुलंदियों पर पहुंचा दिया। विनय पाठक ने कभी खुद को केवल एक ही तरह के किरदारों तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने 'जॉनी गद्दार' में प्रकाश के रूप में एक नकारात्मक भूमिका निभाई, तो 'रब ने बना दी जोड़ी' में राज के वफादार दोस्त बॉबी का किरदार निभाया। इसके अलावा 'गौर हरि दास्तान' में अपनी पहचान की लड़ाई लड़ते बुजुर्ग स्वतंत्रता सेनानी के संवेदनशील चरित्र को भी उन्होंने बखूबी जीवंत किया। सुधीर मिश्रा की फिल्म 'खोया खोया चांद' में उनके अभिनय को समीक्षकों द्वारा बेहद सराहा गया।

सवाल-जवाब

विनय पाठक ने MBA की जगह चुपके से किस विषय की पढ़ाई की थी?
विनय पाठक ने कैंपस थियेटर में एक नाटक देखने के बाद चुपके से 'बैचलर ऑफ फाइन आर्ट्स' (BFA) में दाखिला ले लिया था।
करियर बदलने की बात जानकर विनय पाठक के पिता की क्या प्रतिक्रिया थी?
एक सख्त पुलिस अधिकारी होने के बावजूद, जब विनय ने आखिरकार सच बताया तो उनके पिता ने उनकी कलात्मक रुचि का पूरा समर्थन किया।
किस किरदार ने विनय पाठक को भारतीय सिनेमा में घर-घर लोकप्रिय बना दिया?
'भेजा फ्राई' में सीधे-सादे टैक्स इंस्पेक्टर 'भारत भूषण' और 'खोसला का घोसला' में 'आसिफ इकबाल' के किरदारों ने उन्हें बेहद लोकप्रिय बनाया।
विनय पाठक का बचपन कहां बीता और उन्होंने अपनी कॉलेज की पढ़ाई कहां से की?
अपने पिता के स्थानांतरण के कारण उनका बचपन रांची और धनबाद में बीता, और उन्होंने हजारीबाग के सेंट कोलंबा कॉलेज और इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से इंग्लिश ऑनर्स की पढ़ाई की।
किसने और कब उन्हें भारतीय रंगमंच से जुड़ने की सलाह दी थी?
उनके थियेटर मेंटर डॉ. फारले रिचमंड ने उन्हें साल 1995 में भारतीय रंगमंच की ओर रुख करने की सलाह दी थी।
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