अभिनेता पुनीत इस्सर ने 1980 के दशक की शुरुआत में बड़े सपनों के साथ हिंदी फिल्म जगत में कदम रखा था। लेकिन साल 1983 में एक फिल्म के सेट पर हुए एक हादसे ने उनके पूरे करियर की दिशा को बदलकर रख दिया। मनमोहन देसाई के निर्देशन में बन रही फिल्म 'कुली' में पुनीत इस्सर को मुख्य खलनायक का किरदार निभाने का मौका मिला था, जहां उनके सामने सदी के महानायक अमिताभ बच्चन थे। एक एक्शन सीन की शूटिंग के दौरान दोनों के बीच लड़ाई का दृश्य फिल्माया जा रहा था। स्क्रिप्ट के मुताबिक, पुनीत को अमिताभ बच्चन को एक मुक्का मारना था। लेकिन शूटिंग के दौरान यह टाइमिंग बिगड़ गई और मुक्का सीधे अमिताभ बच्चन को लग गया। इस हादसे में अमिताभ बच्चन गंभीर रूप से जख्मी हो गए और उन्हें नाजुक हालत में अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा, जहां वे लंबे समय तक जिंदगी और मौत के बीच जूझते रहे।
हादसे के बाद फिल्म निर्माताओं का डर और पुनीत का संघर्ष
अमिताभ बच्चन के अस्पताल में भर्ती होने के बाद देश भर में उनके प्रशंसक दुआएं कर रहे थे, लेकिन दूसरी तरफ पुनीत इस्सर के लिए एक नया संघर्ष शुरू हो चुका था। पुनीत ने बाद में अपने कई साक्षात्कारों में खुलासा किया कि इस एक हादसे के बाद फिल्म जगत में उनके प्रति एक बेहद नकारात्मक धारणा बन गई थी। फिल्म निर्माताओं और साथी कलाकारों के मन में यह डर बैठ गया था कि पुनीत के साथ काम करने पर कहीं किसी अन्य अभिनेता को भी चोट न लग जाए। उनकी भारी-भरकम कद-काठी के कारण लोगों को उनसे डर लगने लगा था। इस अघोषित डर का सीधा असर पुनीत के काम पर पड़ा। उन्होंने अपने कई प्रोजेक्ट्स खो दिए और इंडस्ट्री के लोग उन्हें फिल्मों में लेने से कतराने लगे। एक उभरता हुआ करियर शुरुआत में ही पूरी तरह से पटरी से उतर गया।
बीआर चोपड़ा की महाभारत और दुर्योधन के रूप में पुनर्जन्म
जब पुनीत का करियर पूरी तरह से अंधकार में डूब चुका था, तब साल 1988 में उनके जीवन में एक बड़ा बदलाव आया। मशहूर फिल्मकार बीआर चोपड़ा अपने ऐतिहासिक टीवी धारावाहिक 'महाभारत' के लिए कलाकारों का चयन कर रहे थे। उन्होंने पुनीत इस्सर की दमदार आवाज, शानदार कद-काठी और अभिनय क्षमता को भांप लिया और उन्हें दुर्योधन का मुख्य नकारात्मक किरदार सौंप दिया। पुनीत के लिए यह भूमिका उनके डूबते करियर को बचाने का आखिरी और सबसे बड़ा मौका थी। उन्होंने इस किरदार को जीवंत बनाने के लिए दिन-रात एक कर दिया। अपनी कद-काठी को दुर्योधन के योद्धा रूप के अनुकूल ढालने के लिए पुनीत ने कड़ी मेहनत की और करीब 22 किलो वजन बढ़ाया, जिससे उनका कुल वजन लगभग 108 किलो तक पहुंच गया। टीवी पर उनके इस अभिनय और संवाद अदायगी ने इतिहास रच दिया और वे घर-घर में दुर्योधन के रूप में मशहूर हो गए।
निर्देशन की पारी और फिल्मों में वापसी
महाभारत की अपार सफलता के बाद पुनीत इस्सर के करियर की गाड़ी एक बार फिर तेजी से दौड़ पड़ी। इसके बाद उन्होंने बॉलीवुड की कई बड़ी फिल्मों में अलग-अलग तरह के किरदार निभाए। उनके फिल्मी सफर में 'राम जाने', 'बॉर्डर', 'कृष', 'बचना ऐ हसीनों', 'रेडी', 'सन ऑफ सरदार' और हालिया दौर की 'द कश्मीर फाइल्स' जैसी कई महत्वपूर्ण फिल्में शामिल हैं। अभिनय के साथ-साथ पुनीत ने कैमरे के पीछे की दुनिया में भी अपनी किस्मत आजमाई। साल 2004 में उन्होंने सलमान खान और शिल्पा शेट्टी जैसे बड़े सितारों को लेकर फिल्म 'गर्व: प्राइड एंड ऑनर' का सफल निर्देशन किया। इसके बाद उन्होंने 'आई एम सिंह' नामक फिल्म का भी निर्देशन किया। पुनीत छोटे पर्दे पर भी लगातार सक्रिय रहे और उन्होंने लोकप्रिय रियलिटी शो 'बिग बॉस 8' में भी भाग लिया, जहां वे काफी समय तक घर में बने रहे।


















