फिल्म जगत में चर्चित हस्तियों के आशियाने अपनी विलासिता और चमक-दमक के लिए जाने जाते हैं, मगर मशहूर गायक और संगीतकार अदनान सामी का ठिकाना एक अलग ही पहचान रखता है। मुंबई के लोखंडवाला इलाके में स्थित उनका पेंटहाउस महज एक आलीशान आशियाना नहीं है, बल्कि दुनिया भर के संगीत इतिहास और दुर्लभ विरासतों का अनूठा ठिकाना बन चुका है। फिल्ममेकर फराह खान जब इस विशाल पेंटहाउस का जायजा लेने पहुंचीं, तो वहां सजा एक-एक दुर्लभ दस्तावेज और ऐतिहासिक रिकॉर्ड देखकर उनकी आंखें फटी की फटी रह गईं। इस आशियाने में भारतीय सिनेमा की शुरुआती यादों से लेकर पश्चिमी क्लासिकल संगीत के शीर्ष उस्तादों तक की अमूल्य धरोहरें संजोकर रखी गई हैं।
प्रवेश द्वार पर परिवार की यादें और सुरुचिपूर्ण बैठक
इस पेंटहाउस की सजावट में मुख्य रूप से शांत और सुरुचिपूर्ण ऑफ-व्हाइट रंगों का इस्तेमाल किया गया है। मुख्य द्वार से भीतर कदम रखते ही अदनान सामी और उनकी जीवनसंगिनी रोया फरयाबी की खूबसूरत तस्वीरों का एक कोलाज आगंतुकों का स्वागत करता है। इसके आगे एक विस्तृत बैठक क्षेत्र खुलता है, जिसे व्यवस्थित ढंग से कई हिस्सों में बांटा गया है। इसमें परिजनों और मेहमानों के बैठने के लिए आरामदायक स्थान, एक डाइनिंग एरिया और संगीत साधकों के लिए एक समर्पित कोना शामिल है।
घर के प्रवेश क्षेत्र में बने इस छोटे से संगीत कोने में एक खूबसूरत पियानो सजाया गया है। यह स्थान खास तौर पर अनौपचारिक महफिलों और संगीत प्रेमियों के साथ निजी मुलाकातों के उद्देश्य से तैयार किया गया है। पियानो के ठीक सामने सुरुचिपूर्ण ऑफ-व्हाइट डाइनिंग टेबल रखी गई है। कमरे की दीवारों पर पुरानी कलाकृतियां, चांदी के ऐतिहासिक कलेक्टिबल्स और विंटेज रिकॉर्ड करीने से सजाए गए हैं।
राजनयिक पृष्ठभूमि और दुनिया भर से आई चांदी की क्रॉकरी
घर के कोनों में रखी अनोखी और बेशकीमती चांदी की क्रॉकरी को देखकर फराह खान ने इसके इतिहास के बारे में सवाल किया। अदनान सामी ने खुलासा किया कि यह सारा संग्रह दुनिया के अलग-अलग मुल्कों से उनके परिवार के पास जमा हुआ है। उनके माता-पिता राजनयिक सेवा में रहे थे, जिसके चलते उनका बचपन दुनिया के कई देशों में बीता।
विभिन्न संस्कृतियों और ऐतिहासिक परंपराओं के बीच बड़े होने का असर उनके इस आशियाने पर साफ झलकता है। घर में सजी विदेशी वस्तुओं और औपचारिक नफासत को देखते हुए फराह खान ने चुटकी लेते हुए कहा कि यह जगह किसी दूतावास जैसी प्रतीत होती है। हालांकि, इस घर का असली खजाना अभी सामने आना बाकी था।
सुनहरे दौर की कालजयी फिल्मों के मूल विनाइल रिकॉर्ड
बैठक की एक पूरी दीवार भारतीय सिनेमा के स्वर्णिम काल के अमर गीतों के मूल रिकॉर्ड्स को समर्पित की गई है। इस संग्रह में 'शोले', 'पाकीजा', 'आराधना', 'यादों की बारात', 'अमर अकबर एंथनी', 'हरे रामा हरे कृष्णा' और 'बैजू बावरा' जैसी ऐतिहासिक कृतियों के वास्तविक विनाइल रिकॉर्ड प्रदर्शित हैं।
अदनान सामी ने स्पष्ट किया कि ये रिकॉर्ड उनके लिए केवल सजावट की वस्तुएं नहीं हैं। वह बचपन में इन्हीं कालजयी धुनों को सुनते हुए बड़े हुए और इनके साथ उनका गहरा भावनात्मक और संगीतमय नाता रहा है। इसी दीवार पर भारतीय सिनेमा के मील के पत्थर मानी जाने वाली वर्ष 1931 की पहली बोलती फिल्म 'आलम आरा' का मूल रिकॉर्ड भी मौजूद है। सिनेमाई इतिहास के इतने दुर्लभ दस्तावेज को अपने सामने देखकर फराह खान अपनी हैरानी नहीं छिपा सकीं।
एल्विस प्रेस्ली और द बीटल्स के अंतरराष्ट्रीय गोल्ड रिकॉर्ड
संगीत का यह अनूठा संग्रहालय केवल भारतीय सिनेमा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें पश्चिमी संगीत के दिग्गजों की विरासत भी शामिल है। पेंटहाउस की दीवारों पर वैश्विक पॉप और रॉक संगीत के प्रतीक द बीटल्स और एल्विस प्रेस्ली से जुड़े वास्तविक गोल्ड रिकॉर्ड्स फ्रेम किए हुए नजर आते हैं।
अदनान सामी ने बताया कि उन्होंने इनमें से कई दुर्लभ संगीत ट्राफियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजित प्रतिष्ठित नीलामियों में बोली लगाकर हासिल किया है। ये वही आधिकारिक रिकॉर्ड हैं जो इन महान संगीतकारों को उनके अभूतपूर्व योगदान के लिए सम्मान स्वरूप भेंट किए गए थे। इन दुर्लभ संग्रहों के कारण उनका घर किसी निजी संगीत संग्रहालय जैसा अहसास कराता है।
बीथोवन की वास्तविक हस्तलिखित पांडुलिपि
इस पूरे दौरे का सबसे विस्मयकारी क्षण तब सामने आया जब फराह खान की नजर महान क्लासिकल संगीतकार लुडविग वैन बीथोवन की कालजयी रचना 'मूनलाइट सोनाटा' से जुड़ी एक मूल पांडुलिपि पर पड़ी। शुरुआत में फराह को लगा कि यह किसी संग्रहालय में रखे ऐतिहासिक दस्तावेज की प्रतिलिपि या आधुनिक प्रिंट है।
जब अदनान सामी ने बताया कि यह कोई प्रतिकृति नहीं बल्कि बीथोवन की अपनी मूल पांडुलिपि है, तो फराह खान पूरी तरह स्तब्ध रह गईं। अदनान ने जानकारी दी कि दुनिया भर की ऐतिहासिक नीलामियों में बीथोवन के मूल ऑटोग्राफ और हस्तलिखित संगीत पन्नों की कीमत करोड़ों रुपये तक पहुंच जाती है। संगीत के इतिहास के लिहाज से इस दस्तावेज का महत्व किसी भी आर्थिक मूल्यांकन से कहीं ऊपर है।
करियर की यादगार यात्रा और पद्मश्री सम्मान की झलक
घर के एक विशेष हिस्से में अदनान सामी के निजी और पेशेवर संगीत सफर को समेटने वाली मेमोरी वॉल बनाई गई है। इस दीवार पर उनके करियर के शुरुआती दिनों से लेकर आज तक के महत्वपूर्ण पड़ावों की तस्वीरें सजी हैं। इसमें देश-विदेश के दिग्गज फिल्मी सितारों के साथ यादगार मुलाकातें, ऐतिहासिक स्टेज प्रस्तुतियां और भारत सरकार द्वारा दिए गए प्रतिष्ठित पद्मश्री सम्मान से जुड़े महत्वपूर्ण पल शामिल हैं।
मुलाकात के दौरान फराह खान ने अदनान की मशहूर डिनर पार्टियों का भी जिक्र छेड़ा, जिनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर अक्सर ध्यान खींचती हैं। फराह ने मजाकिया अंदाज में कहा कि अगली बार वह बिना न्योते के ही उनकी पार्टी में पहुंच जाएंगी। इस पर अदनान ने मुस्कुराते हुए कहा कि भले ही उनकी अपनी खानपान की आदतें पहले जैसी नहीं रहीं और वह सीमित आहार लेते हैं, लेकिन दूसरों को लजीज व्यंजन परोसना और खिलाना उन्हें आज भी बेहद पसंद है।
फिल्म स्ट्रिप्स से सजा निजी होम थिएटर
मनोरंजन के लिए तैयार किया गया निजी होम थिएटर बाकी कमरों से बिल्कुल भिन्न अंदाज में डिजाइन किया गया है। यह कमरा पूरी तरह साउंडप्रूफ है और इसके अंदरूनी हिस्से को गहरे भूरे रंगों, आरामदायक कुशन और विंटेज फिल्म पोस्टरों से सजाया गया है। यहां की साज-सज्जा 'दीवार' और 'लॉरेंस ऑफ अरेबिया' जैसी ऐतिहासिक फिल्मों की याद दिलाती है।
इस कक्ष में दुर्लभ विंटेज फिल्म स्ट्रिप्स का भी एक संग्रह रखा गया है। अदनान ने बताया कि उन्होंने विदेशी स्रोतों से इन फिल्म स्ट्रिप्स को खरीदा है। इस संग्रह में 'टाइटैनिक' और 'बैटमैन' जैसी ऐतिहासिक हॉलीवुड फिल्मों की वास्तविक फिल्म रील स्ट्रिप्स शामिल हैं।
रचनात्मक ऊर्जा से भरपूर लाल रंग का म्यूजिक स्टूडियो
अदनान सामी का रिकॉर्डिंग और कंपोजिंग स्टूडियो ईंट जैसे गहरे लाल रंगों के संयोजन में तैयार किया गया है। इस स्टूडियो में फर्श, सोफे, टेबल और कुर्सियों का चयन एक जीवंत और रचनात्मक वातावरण तैयार करता है। अदनान के अनुसार यह स्थान मात्र तकनीकी रिकॉर्डिंग का कमरा नहीं है, बल्कि एक ऐसा व्यक्तिगत स्पेस है जो उन्हें मानसिक सुकून और नई धुनों को रचने की प्रेरणा देता है।
स्टूडियो से सटी बालकनी को प्राकृतिक रूप में ही रखा गया है, जहां से बाहर की हरियाली, घने पेड़ और शांत सड़क दिखाई देती है। स्टूडियो को पूरी तरह ध्वनि-रोधी बनाया गया है और भीतर एक छोटा वोकल बूथ मौजूद है। इस गायन बूथ के आसपास अदनान ने अपने सबसे प्रिय और प्रेरणादायी व्यक्तियों की तस्वीरें लगा रखी हैं।
मदीना की यादों से जुड़ा आध्यात्मिक कक्ष
पेंटहाउस के अंतिम छोर पर एक शांत और पूरी तरह आध्यात्मिकता को समर्पित कक्ष बनाया गया है। इस कक्ष में पवित्र काबा से जुड़ा एक अत्यंत नफीस उर्दू मोटिफ स्थापित है। कमरे के शांत और रूहानी माहौल से प्रभावित होकर फराह खान ने वहां सिर झुकाकर प्रार्थना की।
अदनान सामी ने इस स्थान के पीछे की भावुक कहानी साझा करते हुए बताया कि वर्ष 1987 में जब वह पहली बार मदीना गए थे, तो वहां के आध्यात्मिक वातावरण, अजान की रूहानी आवाज और लोगों के आतिथ्य ने उनके दिल पर अमिट छाप छोड़ी थी। उसी यात्रा के दौरान उन्होंने संकल्प लिया था कि जीवन में पुत्र होने पर उसका नाम अजान और पुत्री होने पर उसका नाम मदीना रखेंगे, जिसे उन्होंने आगे चलकर पूरा भी किया।
हालांकि लोखंडवाला स्थित इस भव्य पेंटहाउस की आधिकारिक बाजार कीमत सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन रियल एस्टेट जानकारों के अनुसार इस क्षेत्र में ऐसे विशाल पेंटहाउस की कीमत कई करोड़ रुपये होती है। इसके बावजूद, इस घर की वास्तविक पहचान इसकी कंक्रीट की दीवारों में नहीं, बल्कि इसके भीतर सहेजे गए सदियों पुराने वैश्विक संगीत खजाने में बसती है।


















