गोप्रो के नाम से आमतौर पर पानी और धूल में बेफिक्र इस्तेमाल होने वाले मजबूत एक्शन कैमरों की छवि सामने आती है, लेकिन मिशन 1 प्रो आईएलएस इस धारणा को पूरी तरह बदल देता है। आईएलएस यानी इंटरचेंजेबल लेंस सिस्टम से लैस यह डिवाइस असल में सामान्य एक्शन कैमरा नहीं, बल्कि एक कॉम्पैक्ट सिनेमा कैमरा है जिसे एक छोटे फ्रेम में समेटा गया है। इसमें वाटरप्रूफिंग मौजूद नहीं है और नाजुक बाहरी लेंस लगाने की व्यवस्था दी गई है। यह बदलाव उन स्वतंत्र फिल्मकारों, वीडियो क्रिएटर्स और कैमरा विशेषज्ञों के लिए पेश किया गया है जो वर्षों से एक ऐसे बेहद छोटे 8K वीडियो सिस्टम की मांग कर रहे थे जिसे जरूरत के मुताबिक अलग-अलग लेंस के साथ ढाला जा सके।
मिशन 1 प्रो के समान बुनियादी संरचना और वजन
अगर इसके बाहरी डिजाइन और नियंत्रण प्रणाली की बात करें, तो मिशन 1 प्रो आईएलएस अपने मूल मॉडल मिशन 1 प्रो जैसा ही अनुभव कराता है। कंपनी ने मुख्य बॉडी को बरकरार रखा है, जिसमें से फिक्स्ड लेंस हटाकर माइक्रो फोर थर्ड्स लेंस माउंट जोड़ दिया गया है। बिना कोई अतिरिक्त लेंस लगाए इस कैमरे का वजन ठीक 207 ग्राम रहता है। इसके स्क्रीन, फिजिकल बटन और मेनू सेटिंग्स पूरी तरह पुराने गोप्रो मॉडल जैसे ही हैं, जिससे इसे संभालने में किसी तरह की नई तकनीकी परेशानी नहीं होती।
वीडियो रिकॉर्डिंग क्षमताओं के मामले में भी यह मिशन 1 के उच्चतम स्तर को छूता है। यह डिवाइस 60 फ्रेम प्रति सेकंड पर 8K वीडियो रिकॉर्ड करने में सक्षम है। इसके साथ ही इसमें बेहद प्रभावशाली स्लो मोशन विकल्प मिलते हैं, जिनमें 240 फ्रेम प्रति सेकंड पर 4K वीडियो और 960 फ्रेम प्रति सेकंड तक 1080p वीडियो शूट करने की सुविधा शामिल है। हालांकि भौतिक रूप से सबसे बड़ा अंतर इसकी सुरक्षा सीमा में है, क्योंकि लेंस माउंट के खुले डिजाइन के कारण यह कैमरा वाटरप्रूफ नहीं है।
सिनेमा निर्माण और छोटे प्रोडक्शन में उपयोग
बड़े कैमरों में बदले जाने वाले लेंस का महत्व हमेशा से अलग-अलग फोकल लंबाई और मनचाहे दृश्य माहौल को गढ़ने के लिए रहा है। लेकिन इस क्षमता को गोप्रो जैसे छोटे ढांचे में उतारने के पीछे फिल्म उद्योग की व्यावहारिक जरूरतें हैं। हॉलीवुड से लेकर स्वतंत्र सिनेमा तक, छोटे कैमरों का इस्तेमाल संकरी जगहों में शूट करने या ऐसी खतरनाक जगहों पर लगाने के लिए किया जाता रहा है जहां महंगे सिनेमा रिग्स का नुकसान होने का जोखिम रहता है। सोनी, निकॉन और कैनन जैसी दिग्गज कंपनियों ने भी इसी वजह से कॉम्पैक्ट सिनेमा मॉडल तैयार किए हैं।
मिशन 1 प्रो आईएलएस मुख्य रूप से दो बड़े क्षेत्रों में सबसे ज्यादा उपयोगी साबित होता है। पहला काम इसे बड़ी फिल्मों में क्रैश कैमरा के रूप में तैनात करना है, जहां कार चेज या भारी एक्शन सीक्वेंस के दौरान कैमरे के नष्ट होने का खतरा बना रहता है। दूसरा बड़ा काम इसे वन्यजीव शूटिंग के दौरान सेकेंडरी या बी-कैम के रूप में इस्तेमाल करना है, क्योंकि इसका अत्यंत छोटा आकार जानवरों को असहज नहीं करता और वे इसे अनदेखा कर देते हैं। इसके अलावा कम बजट वाली शादियों और स्वतंत्र प्रोजेक्ट्स पर काम करने वाले सोलो क्रिएटर्स के लिए भी यह एक किफायती विकल्प बनकर उभरता है, जिनके पास महंगे सिनेमा गियर पर खर्च करने का बजट नहीं होता।
माइक्रो फोर थर्ड्स माउंट और क्रॉप फैक्टर का गणित
इस कैमरे में एमएफटी यानी माइक्रो 4/3 लेंस माउंट का चयन लागत और आकार दोनों लिहाज से व्यावहारिक कदम माना गया है। माइक्रो फोर थर्ड्स लेंस तुलनात्मक रूप से सस्ते होते हैं और पुराने विंटेज लेंस को एडॉप्टर के जरिए जोड़कर कई अनूठे विजुअल परिणाम पाए जा सकते हैं। कई सिनेमैटोग्राफर्स का मानना है कि कैमरा बॉडी से ज्यादा अहमियत लेंस की होती है, और यह छोटा कैमरा उस लेंस को पूरी आजादी के साथ काम करने का मौका देता है। ओलिंपस, जिसे अब ओएम सिस्टम के नाम से जाना जाता है, और पैनासोनिक ने जब एमएफटी प्रारूप बनाया था, तब उनका मकसद मिररलेस कैमरों को बेहद कॉम्पैक्ट और सस्ता रखना था।
हालांकि तकनीकी स्तर पर उपयोगकर्ताओं को सेंसर आकार और क्रॉप फैक्टर के अंतर को समझना होगा। भले ही इस कैमरे में माइक्रो फोर थर्ड्स लेंस माउंट दिया गया है, लेकिन इसके भीतर लगा सेंसर 1-इंच साइज का ही है। इसका मतलब यह है कि सामान्य एमएफटी सेंसर की तुलना में यहां क्रॉप फैक्टर अधिक देखने को मिलता है। फुल फ्रेम कैमरे की तुलना में इसका क्रॉप फैक्टर 2.7X बैठता है जब गोप्रो की हाइपरस्मूथ इमेज स्टेबलाइजेशन तकनीक बंद हो। जब हाइपरस्मूथ फीचर चालू किया जाता है, तो यह क्रॉप बढ़कर 3X तक पहुंच जाता है।
इसे समझने के लिए लाओवा 7.5 मिमी लेंस का उदाहरण देखा जा सकता है। जब कैमरे में हाइपरस्मूथ चालू रहता है, तो यह 7.5 मिमी लेंस फुल फ्रेम पर 23 मिमी के बराबर दृश्य विस्तार देता है। हाइपरस्मूथ बंद करने पर यह लगभग 20 मिमी के समकक्ष चौड़ा दृश्य पेश करता है। इसका सीधा निष्कर्ष यह है कि यदि किसी क्रिएटर को इस कैमरे पर अत्यंत चौड़ा या अल्ट्रा-वाइड फ्रेम शूट करना हो, तो उसे बेहद छोटी फोकल लंबाई वाले या फिशआई लेंस का चयन करना पड़ेगा।
इलेक्ट्रॉनिक संपर्कों की कमी और मैनुअल फोकस की चुनौती
मिशन 1 प्रो आईएलएस की सबसे बड़ी तकनीकी खामी इसके माउंट में किसी भी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक कॉन्टैक्ट्स या पिन का न होना है। इसका सीधा असर यह होता है कि जो लेंस पूरी तरह से इलेक्ट्रॉनिक फोकस या अपर्चर नियंत्रण पर निर्भर करते हैं, वे इस पर सही ढंग से काम नहीं करेंगे। उदाहरण के तौर पर पैनासोनिक का मूल 20 मिमी पैनकेक लेंस इस पर काम नहीं कर पाता क्योंकि उसमें कोई फिजिकल या मैनुअल अपर्चर रिंग नहीं दी गई है।
इलेक्ट्रॉनिक तालमेल न होने के कारण फोकस भी पूरी तरह हाथ से मैनुअल करना पड़ता है। कैमरे की छोटी इनबिल्ट स्क्रीन पर बारीक मैनुअल फोकस साधना काफी मुश्किल साबित होता है। हालांकि पेशेवर फिल्म निर्माता इस समस्या से निपटने के लिए स्मार्टफोन या बाहरी मॉनिटर स्क्रीन का सहारा लेते हैं, लेकिन अपर्चर को इलेक्ट्रॉनिक तरीके से नियंत्रित न कर पाना कई आधुनिक लेंसों के इस्तेमाल पर रोक लगा देता है। भविष्य के संस्करणों में लेंस आईरिस और मैनुअल फोकस को इलेक्ट्रॉनिक सपोर्ट देना एक बेहद जरूरी सुधार होगा।
तस्वीरों की गुणवत्ता और माउंट वजन की सीमा
एक्शन कैमरों में पारंपरिक रूप से लगे छोटे फिक्स्ड लेंस ही अब तक वीडियो और फोटो की गुणवत्ता को सीमित करते रहे हैं, और आईएलएस संस्करण ने यह साबित कर दिया है कि बेहतर ग्लास जोड़ते ही फुटेज का स्तर पूरी तरह बदल जाता है। इस नए सिस्टम से मिलने वाली फुटेज किसी भी सामान्य एक्शन कैमरे से कहीं बेहतर और सिनेमाई नजर आती है। ग्रिप और केस के साथ संतुलित रखने पर लाओवा 7.5 मिमी जैसा लेंस भी शूटिंग के दौरान सहज संतुलन प्रदान करता है।
गोप्रो ने आधिकारिक तौर पर स्पष्ट किया है कि इसके माउंट पर लेंस के वजन की अधिकतम सीमा 250 ग्राम है। यदि कोई क्रिएटर इससे भारी लेंस जोड़ना चाहता है, तो उसे कैमरे और लेंस को अतिरिक्त सपोर्ट देने के लिए किसी बाहरी केज या रिग की आवश्यकता होगी। 300 मिमी जैसे विशालकाय लेंस इस पर बिना भारी सेटअप के इस्तेमाल नहीं किए जा सकते। वहीं फोटो खींचने के मामले में 50 मेगापिक्सल रॉ इमेज किसी भी 1-इंच सेंसर कैमरे की तरह बेहतरीन डिटेल्स दर्ज करती हैं। बेहतर शार्पनेस और डेप्थ ऑफ फील्ड के चलते यह केवल साधारण एक्शन कैमरा नहीं रह जाता बल्कि हाई क्वालिटी इमेजिंग टूल बन जाता है।
कीमत और लक्षित उपयोगकर्ताओं का दायरा
बिना किसी लेंस के मिशन 1 प्रो आईएलएस की कीमत $700 रखी गई है। सामान्य खरीदारों या गोप्रो हीरो 13 ब्लैक जैसे पारंपरिक एक्शन कैमरों के ग्राहकों के लिए यह कीमत अधिक लग सकती है, लेकिन यह उत्पाद उन साधारण उपयोगकर्ताओं के लिए बनाया भी नहीं गया है। उन स्वतंत्र वीडियोग्राफर्स, फिल्म क्रू और क्रिएटर्स के लिए जिनके पास पहले से ही उपयुक्त एमएफटी लेंस मौजूद हैं, यह कीमत काफी संतुलित मानी जा रही है।
यह नया मॉडल एक्शन कैमरे के पारंपरिक बंधनों को तोड़कर प्रयोग करने और नए विजुअल एंगल्स तलाशने का माध्यम बनता है। इलेक्ट्रॉनिक नियंत्रणों की कमी के बावजूद, गोप्रो का यह कदम छोटे कैमरों में पेशेवर सिनेमाई रिकॉर्डिंग की दिशा में एक साहसिक प्रयोग है जो अब तक के सबसे उच्च गुणवत्ता वाले विजुअल्स पेश करता है।


















