बिहार के जमुई इलाके में एक स्कूली छात्रा के साथ सरेराह हुई अश्लीलता और बदसलूकी के मामले ने पूरे देश में आक्रोश पैदा कर दिया है। इंटरनेट पर इस बर्बरता का वीडियो प्रसारित होने के तुरंत बाद हरकत में आई स्थानीय पुलिस ने मुख्य नामजद आरोपी नंदन यादव को मुठभेड़ के दौरान धर दबोचा। इस कार्रवाई में आरोपी के पैर पर गोली लगी, जिसे हाफ एनकाउंटर के रूप में देखा जा रहा है। पुलिस द्वारा उठाए गए इस सख्त कदम के बीच राष्ट्रीय राजधानी में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सदस्य रामजी लाल सुमन के एक विवादास्पद वक्तव्य ने मामले को पूरी तरह राजनीतिक रंग दे दिया है।
सपा सांसद का विवादित बयान और सियासी बचाव
राष्ट्रीय राजधानी में संवाददाताओं द्वारा जमुई की घटना पर सवाल किए जाने पर सपा के वरिष्ठ नेता ने अपराध की कड़े शब्दों में भर्त्सना करने के बजाय एक चौंकाने वाला दृष्टिकोण पेश किया। उन्होंने युवा पीढ़ी के मनोविज्ञान को जिम्मेदार ठहराते हुए इस घृणित कृत्य को मानसिक विकार से जोड़ दिया।
रामजी लाल सुमन ने कहा, “यह पूरी तरह से एक मानसिक बीमारी है।”
सांसद ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए इसे नई पीढ़ी में बढ़ती हताशा का नतीजा बताया। इसके साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो यानी एनसीआरबी के आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि महिलाओं के विरुद्ध ऐसी वारदातों की सर्वाधिक तादाद भाजपा शासित राज्यों में दर्ज की जा रही है। सुमन का तर्क था कि जब तक हुकूमत की तरफ से कोई बेहद कड़ा पैगाम नहीं दिया जाएगा, तब तक ऐसी दरिंदगी पर रोक लगाना संभव नहीं होगा। उन्होंने यह आरोप भी मढ़ दिया कि समाजविरोधी तत्वों को सियासी पनाह हासिल रहती है, जिसके दम पर उनके हौसले लगातार बढ़ते हैं।
विपक्ष की मानसिकता पर उठे तीखे सवाल
सपा सांसद द्वारा नाबालिग बच्ची के साथ सड़क पर की गई अभद्रता को महज युवाओं की कुंठा या दिमागी बीमारी बता देने से राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भारी नाराजगी है। विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल असल में एक जघन्य और अक्षम्य गुनाह की गंभीरता को हल्का करने जैसा है। इस पूरे प्रकरण में मुख्य आरोपी के तौर पर नंदन यादव की पहचान उजागर होने के बाद विपक्षी खेमे में असहजता देखी जा रही थी। ऐसे माहौल में अपराध को क्षेत्रीय या दलीय चश्मे से देखने और एनसीआरबी के सांख्यिकीय आंकड़ों की आड़ लेने को केवल राजनीतिक ढाल तैयार करने की कोशिश माना जा रहा है।
सख्त पुलिसिया एक्शन पर भाजपा का पलटवार
भारतीय जनता पार्टी ने सपा नेता के इस बयान पर फौरन तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। सत्तारूढ़ दल ने स्पष्ट किया कि जमुई प्रशासन ने मामले की नजाकत को भांपते हुए एक महिला पुलिस अधिकारी के निर्देशन में विशेष जांच दल यानी एसआईटी गठित कर त्वरित कार्रवाई की। इसी एसआईटी की तत्परता से नंदन यादव को मुठभेड़ में घायल कर सलाखों के पीछे पहुंचाया गया। भाजपा प्रवक्ताओं का कहना है कि जब खाकी वर्दी ने इतनी फुर्ती से अपराधी को कानून के शिकंजे में कस दिया, तब भी यह दावा करना कि कड़ा संदेश नहीं दिया जा रहा, असल में पुलिस बल के मनोबल और उसकी मुस्तैदी पर बेबुनियाद सवाल उठाना है।
कड़ी कार्रवाई बनाम अनर्गल बयानबाजी
जमुई के इस झकझोर देने वाले वाकये ने दो अलग-अलग तस्वीरें सामने ला दी हैं। एक तरफ जहां बिहार प्रशासन ने उत्तर प्रदेश की तर्ज पर त्वरित और सख्त कानूनी एक्शन अपनाकर अपराधियों के भीतर खौफ पैदा करने का स्पष्ट संकेत दिया है, वहीं दूसरी तरफ संवेदनशील मसलों पर राजनेताओं द्वारा दिए जाने वाले गैर-जिम्मेदाराना बयान पीड़िता के इंसाफ की राह में बाधा बनते दिख रहे हैं। जानकारों का कहना है कि बर्बर अपराधों को किसी मानसिक विकार या दलीय प्रतिद्वंद्विता के नजरिए से देखने के बजाय सियासतदानों को एकजुट होकर ऐसी घटनाओं पर जीरो टॉलरेंस की नीति का समर्थन करना चाहिए।





















