हिंदी सिनेमा के उस दौर में जहां दिलीप कुमार अपनी सादगी और शालीनता, राज कपूर अपनी शानदार मेजबानी, देव आनंद अपने जिंदादिल अंदाज और राजेश खन्ना अपने अनोखे स्टारडम के लिए पहचाने जाते थे, वहीं धर्मेंद्र की पहचान उनकी बेहतरीन अदाकारी के साथ-साथ उनके विशाल हृदय से भी रही। धर्मेंद्र के लिए उनका घर महज चार दीवारों की सीमा नहीं था, बल्कि हर उस व्यक्ति के लिए एक खुला ठिकाना था जो अपनेपन की भावना लेकर आता था। गांव-देहात से आया कोई परिचित हो या अनजान मेहमान, उनके निवास पर स्वागत में कभी कोई कमी नहीं रखी जाती थी। उनके इस निराले अंदाज और दरियादिली के कायल सदी के महानायक अमिताभ बच्चन भी रहे हैं।
कौन बनेगा करोड़पति के मंच पर याद आए पुराने दिन
धर्मेंद्र भले ही अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनसे जुड़ी यादें और उनकी इंसानियत के किस्से आज भी उनके दोस्तों और करीबियों के दिलों में ताजा हैं। टेलीविजन रियलिटी शो कौन बनेगा करोड़पति के मंच पर अमिताभ बच्चन ने अपने सबसे खास दोस्त और ब्लॉकबस्टर फिल्म शोले के सह-कलाकार धर्मेंद्र को याद करते हुए एक अत्यंत दिलचस्प संस्मरण सुनाया। बिग बी ने बताया कि धर्मेंद्र के घर पर लोगों के आने-जाने पर कभी कोई रोक-टोक या औपचारिकता नहीं होती थी। उनके पैतृक गांव से आने वाले लोग बिना किसी झिझक के सीधे उनके घर में प्रवेश कर जाते थे।
सीढ़ियों पर अनजान मेहमानों का रोचक किस्सा
इस दरियादिली को उजागर करते हुए अमिताभ बच्चन ने एक घटना याद की। उन्होंने बताया कि एक बार धर्मेंद्र ने अपने ही घर की सीढ़ियों से 4-5 लोगों को ऊपर की ओर जाते देखा। स्वाभाविक उत्सुकता में उन्होंने उन लोगों से पूछा कि वे कौन हैं और कहां से आए हैं। इस पर उन मेहमानों ने सहजता से उत्तर दिया कि वे शायद गांव से आए हैं और संभवतः उनकी माताजी ने उन्हें ऊपर बुलाया होगा। अमिताभ ने मजाकिया लहजे में टिप्पणी करते हुए कहा कि स्थिति यह थी कि धर्मेंद्र को स्वयं भी कई बार यह अंदाजा नहीं रहता था कि उनके घर में कितने लोग आ-जा रहे हैं। बिग बी के अनुसार, धर्मेंद्र के लिए घर की चौखट कभी औपचारिकताओं का दायरा नहीं रही, जो भी आया वह सहर्ष परिवार का हिस्सा बन गया।
1975 की फिल्म शोले से अमर हुई जय-वीरू की जोड़ी
अमिताभ बच्चन और धर्मेंद्र की यह दोस्ती सिर्फ असल जिंदगी तक सीमित नहीं रही, बल्कि बड़े पर्दे पर भी इसने इतिहास रचा। वर्ष 1975 में निर्देशक रमेश सिप्पी की कालजयी फिल्म शोले में धर्मेंद्र ने वीरू और अमिताभ बच्चन ने जय का अविस्मरणीय किरदार निभाया था। 15 अगस्त 1975 को सिनेमाघरों में प्रदर्शित हुई यह फिल्म भारतीय सिनेमा के इतिहास की सबसे प्रतिष्ठित और सफल फिल्मों में शुमार हुई। फिल्म का प्रसिद्ध गीत 'ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे' आज भी दोस्ती की मिसाल माना जाता है और इस जोड़ी ने पर्दे पर भारतीय मित्रता का एक नया मानक स्थापित किया।
24 नवंबर 2025 को हुआ धर्मेंद्र का निधन
वर्षों पुरानी इस अटूट दोस्ती का एक दुखद मोड़ 24 नवंबर 2025 को आया, जब 89 वर्ष की आयु में धर्मेंद्र का निधन हो गया। उनके अंतिम संस्कार के समय अमिताभ बच्चन अपने बेटे अभिषेक बच्चन के साथ पवन हंस श्मशान घाट पहुंचे थे और अपने प्रिय मित्र को अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि दी थी। कौन बनेगा करोड़पति के मंच पर आज भी जब धर्मेंद्र का उल्लेख होता है, तो बिग बी की आंखों में अपने उस अजीज दोस्त के प्रति अपार सम्मान, स्नेह और स्मृतियों की चमक साफ नजर आती है।



















