छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल के दूरदराज इलाकों में महिलाओं की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करने के उद्देश्य से एक अनोखी पहल शुरू की गई है। बस्तर स्थित नेतानार पुलिस कैंप में विशेष रूप से सेवा डेरा की स्थापना की गई है, जहां स्थानीय महिलाओं को निशुल्क सिलाई का प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। इस कल्याणकारी योजना का मुख्य ध्येय वनांचल की महिलाओं को हुनरमंद बनाकर उन्हें आत्मनिर्भरता के पथ पर अग्रसर करना है।
सिलाई कौशल और चॉइस सेंटर की ऑनलाइन सेवाएं
नेतानार पुलिस कैंप में संचालित इस सेवा डेरा केंद्र पर बस्तर के अत्यंत सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों से महिलाएं सिलाई का व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त करने पहुंच रही हैं। प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान अभ्यर्थियों को आधुनिक सिलाई मशीनें संचालित करने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके साथ ही, विभिन्न परिधानों की कटाई और सिलाई में दक्षता हासिल करने के गुर भी सिखाए जा रहे हैं, ताकि वे बाजार की जरूरतों के अनुसार बेहतर गुणवत्ता का काम कर सकें।
यह तकनीकी एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण पूर्ण होने के उपरांत महिलाएं अपने स्वयं के गांवों तथा समीपवर्ती ग्रामीण बाजारों में सिलाई का स्वतंत्र कार्य प्रारंभ कर सकेंगी। इससे वे न केवल सम्मानजनक आजीविका अर्जित करेंगी बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी। उल्लेखनीय है कि बस्तर क्षेत्र के कुछ पुलिस कैंपों को केवल सुरक्षा तंत्र तक सीमित न रखकर, ग्रामीणों के लिए चॉइस सेंटर और कौशल विकास प्रशिक्षण केंद्र के रूप में भी विकसित किया जा रहा है। इन केंद्रों के माध्यम से ग्रामीणों को विभिन्न ऑनलाइन सरकारी सुविधाएं भी उनके घर के निकट ही उपलब्ध कराई जा रही हैं।
नांगुर की महिलाओं के अनुभव और स्वावलंबन के सपने
सेवा डेरा में सिलाई का प्रशिक्षण ले रही महिलाओं ने अपनी इस नई यात्रा के अनुभवों को साझा किया है। नांगुर गांव की रहने वाली इंद्रकांत सेठिया ने बताया कि वे बीते लगभग एक महीने से इस केंद्र पर बिना किसी शुल्क के सिलाई सीख रही हैं। उन्होंने साझा किया कि पूर्व में वे एक साधारण गृहिणी के रूप में घर तक सीमित थीं और किसी भी आर्थिक गतिविधि से नहीं जुड़ी थीं। हालांकि, एक स्थानीय समूह के जरिए जब उन्हें इस सिलाई प्रशिक्षण की जानकारी मिली, तो उन्होंने इसमें भाग लेने का निर्णय लिया। अब वे प्रशिक्षण समाप्त होने के बाद अपने गांव में स्वयं का सिलाई सेंटर खोलने की योजना बना रही हैं।
इसी प्रकार नांगुर गांव की ही एक अन्य प्रशिक्षार्थी खुशबू शोरी ने बताया कि केंद्र पर मौजूद ट्रेनर बेहद बारीकी और धैर्य के साथ सिलाई की तकनीकें सिखा रहे हैं। खुशबू को यहां विशेष रूप से फ्रॉक, लेडीज सूट और ब्लाउज तैयार करने का गहन प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उच्च शिक्षा प्राप्त खुशबू ने कॉलेज की पढ़ाई पूरी कर ली है और अब वे सिलाई कला में पारंगत होकर अपनी खुद की टेलरिंग दुकान स्थापित करना चाहती हैं, जिससे वे बेहतर आय अर्जित कर आत्मनिर्भर जीवन जी सकें।



















