बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन ने गेम शो कौन बनेगा करोड़पति 18 के हालिया एपिसोड में 1975 की कालजयी सिनेमाई रचना शोले से जुड़ी एक बेहद दिलचस्प वैश्विक कहानी साझा की है। हॉट सीट पर बैठे डॉ. गणेश बरैया के साथ बातचीत करते हुए अमिताभ बच्चन ने बताया कि इटली के ऐतिहासिक शहर बोलोन्या में इस हिंदी सिनेमा के मील के पत्थर को देखने के लिए करीब 2000 इतालवी दर्शक रात 11 बजे से सुबह 3 बजे तक खुले आसमान के नीचे डटे रहे थे।
बोलोन्या के पियाजा मैजियोरे में 50वीं सालगिरह का जश्न
रमेश सिप्पी द्वारा निर्देशित फिल्म शोले का यह प्रदर्शन कोई साधारण शो नहीं था, बल्कि यह इस महान फिल्म की 50वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित एक विशेष अंतरराष्ट्रीय स्क्रीनिंग थी। 27 जून 2025 को बोलोन्या के प्रसिद्ध पियाजा मैजियोरे चौक पर 'इल सिनेमा रिट्रोवाटो' फिल्म फेस्टिवल के दौरान फिल्म के रिस्टोर्ड और अनकट संस्करण का वर्ल्ड प्रीमियर आयोजित किया गया था। इस 204 मिनट लंबे महाकाव्य को देखने के लिए शहर का मुख्य आंगन नागरिकों और सिनेमा प्रेमियों से खचाखच भर गया था।
फिल्म हेरिटेज फाउंडेशन के संस्थापक शिवेंद्र सिंह डुंगरपुर ने शोले के मूल प्रिंट को तकनीकी रूप से रिस्टोर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। वह इस नए डिजिटल रूप से तराशे गए प्रिंट को इटली लेकर गए थे, जहां बोलोन्या के ऐतिहासिक पियाजा मैजियोरे में विशाल स्क्रीन लगाकर दर्शकों को 1975 की इस क्लासिक कृति का भव्य अनुभव कराया गया। देर रात 11 बजे शुरू हुई स्क्रीनिंग तड़के 3 बजे तक चली, और दर्शकों का उत्साह अंत तक बना रहा।
आपातकाल और सेंसर बोर्ड द्वारा बदला गया असली क्लाइमैक्स
इस रिस्टोर किए गए 204 मिनट के अनकट संस्करण का सबसे मुख्य आकर्षण इसका मूल क्लाइमैक्स था, जिसे भारतीय दर्शकों ने 1975 की सिनेमाघरों में रिलीज के दौरान नहीं देखा था। निर्देशक रमेश सिप्पी की मूल कहानी में ठाकुर बलदेव सिंह अपनी नुकीली जूतियों से गब्बर सिंह को मार डालते हैं। हालांकि, अगस्त 1975 में भारत में लागू आपातकाल के कारण तत्कालीन सेंसर बोर्ड ने इस हिंसक अंत पर कड़ी आपत्ति जताई थी और क्लाइमैक्स बदलने का निर्देश दिया था।
सेंसर बोर्ड के हस्तक्षेप के बाद फिल्म का अंत बदलकर दिखाया गया कि ठाकुर गब्बर सिंह को घायल हालत में छोड़ देते हैं और ऐन मौके पर पुलिस आकर गब्बर को गिरफ्तार कर लेती है। इटली में दिखाई गई नई रिस्टोर्ड कॉपी में निर्देशक का वही वास्तविक और अनकट क्लाइमैक्स शामिल किया गया, जिससे अंतरराष्ट्रीय दर्शकों को फिल्म का वही रूप देखने को मिला जैसा इसके निर्माताओं ने मूल रूप से सोचा था।
1975 का वह ऐतिहासिक दौर और सलीम-जावेद की जादुई जोड़ी
15 अगस्त 1975 को भारत के सिनेमाघरों में पहली बार प्रदर्शित हुई शोले ने भारतीय पॉप कल्चर पर अमिट छाप छोड़ी है। इस फिल्म में अमिताभ बच्चन ने जय, धर्मेंद्र ने वीरू, संजीव कुमार ने ठाकुर बलदेव सिंह, हेमा मालिनी ने बसंती, जया बच्चन ने राधा और अमजद खान ने खूंखार डाकू गब्बर सिंह की अमर भूमिकाएं निभाई थीं।
फिल्म की पटकथा और प्रसिद्ध संवाद सलीम-जावेद की महान लेखक जोड़ी ने तैयार किए थे, जबकि आर.डी. बर्मन द्वारा संगीतबद्ध किए गए गीत आज भी हर पीढ़ी के जुबान पर बसे हुए हैं। बोलोन्या में हुई इस भव्य स्क्रीनिंग ने एक बार फिर साबित कर दिया कि भारतीय सिनेमा की यह धरोहर भाषा और देश की सीमाओं से परे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दर्शकों के दिलों को छूने की अटूट क्षमता रखती है।



















