हिंदी सिनेमा जगत में कई ऐसे चेहरे आए जिन्होंने अपनी सादगी और गंभीर अभिनय से दर्शकों के दिलों में एक खास जगह बनाई। इन्हीं में से एक नाम अभिनेता कुणाल कपूर का है, जो आज भले ही बड़े पर्दे पर पहले की तुलना में कम नजर आते हों, लेकिन उनकी चुनिंदा भूमिकाएं दर्शकों के जेहन में हमेशा ताजा रहती हैं। अमिताभ बच्चन के परिवार से करीबी दामाद का नाता रखने वाले कुणाल कपूर ने अपने करियर की शुरुआत सीधे अभिनय से नहीं की थी, बल्कि उन्होंने फिल्म निर्माण की तकनीकी बारीकियों को समझने के लिए पहले कैमरे के पीछे सहायक निर्देशक के रूप में पसीना बहाया था।
शुरुआती जीवन और अभिनय का रुझान
कुणाल कपूर का जन्म 18 अक्टूबर 1977 को मुंबई शहर में हुआ था। उनका परिवार मूल रूप से पंजाब से ताल्लुक रखता है। उनके पिता अविकिशोर कपूर कंस्ट्रक्शन के कारोबार से जुड़े हुए थे, जबकि उनकी मां कानन एक पेशेवर गायिका हैं। घर में कला और रचनात्मकता का माहौल होने के कारण कुणाल का रुझान भी बहुत कम उम्र में सिनेमा की ओर हो गया था। अभिनय की दुनिया में कदम रखने की चाहत के चलते उन्होंने बाकायदा एक्टिंग क्लासेज में दाखिला लिया और मंच तथा कैमरे के सामने खुद को तराशना शुरू किया।
पर्दे के पीछे से मुख्य भूमिका तक का सफर
सिनेमा उद्योग में अपने करियर को आगे बढ़ाने के लिए कुणाल ने सबसे पहले फिल्म निर्देशन के काम में हाथ बंटाया। उन्होंने चर्चित फिल्म अक्स में एक सहायक निर्देशक के तौर पर काम किया। इस फिल्म में अमिताभ बच्चन और मनोज बाजपेयी जैसे अनुभवी कलाकारों ने मुख्य भूमिकाएं निभाई थीं। सेट पर काम सीखने के बाद उन्हें मशहूर चित्रकार और निर्देशक एमएफ हुसैन की कलात्मक फिल्म मीनाक्षी: अ टेल ऑफ थ्री सिटीज में काम करने का मौका मिला। साल 2004 में रिलीज हुई इस फिल्म में वे अभिनेत्री तब्बू के साथ स्क्रीन साझा करते दिखे थे। हालांकि इस कलात्मक फिल्म से उन्हें वह व्यापक पहचान नहीं मिल सकी जिसकी तलाश हर उभरते कलाकार को होती है।
रंग दे बसंती और यशराज फिल्म्स के साथ बड़ा ब्रेक
कुणाल कपूर के फिल्मी सफर का सबसे बड़ा मोड़ उनकी दूसरी फिल्म के साथ आया। साल 2006 में आई निर्देशक राकेश ओमप्रकाश मेहरा की फिल्म रंग दे बसंती ने बॉक्स ऑफिस पर इतिहास रच दिया। आमिर खान के मुख्य अभिनय वाली इस फिल्म में कुणाल कपूर ने असलम का सौम्य और भावनात्मक किरदार निभाया, जिसे दर्शकों और समीक्षकों दोनों ने खूब सराहा। इस फिल्म की अपार सफलता के बाद यशराज फिल्म्स ने उन्हें एक साथ तीन बड़ी फिल्मों के लिए अनुबंधित किया। इसके तहत वे लागा चुनरी में दाग, आजा नचले और बचना ऐ हसीनों जैसी प्रमुख व्यावसायिक फिल्मों में अहम भूमिकाओं में नजर आए।
व्यक्तिगत जीवन और बाद के प्रोजेक्ट्स
करियर में विविधता लाते हुए कुणाल ने साल 2010 में निर्देशक राहुल ढोलकिया की थ्रिलर फिल्म लम्हा में काम किया, जिसमें संजय दत्त और बिपाशा बसु मुख्य किरदारों में थे। इसके बाद उन्होंने कई अलग तरह की पटकथाओं पर काम जारी रखा। निजी जिंदगी की बात करें तो कुणाल कपूर ने साल 2015 में अमिताभ बच्चन के भाई अजिताभ बच्चन की सुपुत्री नैना बच्चन से विवाह किया। इस पारिवारिक रिश्ते के चलते वे बच्चन परिवार के दामाद हैं।
पुरस्कार और हालिया अभिनय कार्य
अपने पूरे करियर के दौरान कुणाल कपूर ने विभिन्न मंचों पर अपने काम के लिए सम्मान हासिल किया है। फिल्म रंग दे बसंती में शानदार अभिनय के लिए उन्हें जूरी अवॉर्ड से नवाजा गया था। इसके अलावा साल 2006 में उन्हें डेब्यू एक्टर के लिए जूम ग्लैम अवॉर्ड मिला, जबकि साल 2007 में ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर आधारित फिल्म वीरम के लिए भी उनके काम को पुरस्कृत किया गया। वेब सीरीज की दुनिया में कदम रखते हुए उन्होंने साल 2022 में पीरियड ड्रामा सीरीज द एंपायर के लिए बेस्ट डेब्यू सीरीज एक्टर का सम्मान अपने नाम किया। हाल के दिनों में वे फिल्म ज्वेल थीफ में एक पुलिस अधिकारी के रूप में दिखाई दिए थे।



















