कैलिफोर्निया के पालो ऑल्टो स्थित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्टार्टअप एलोरियन ने अपना पहला एआई मॉडल पेश कर दिया है। उत्पाद बाजार में उतारने से पहले ही 30 करोड़ डॉलर के मूल्यांकन पर 5.5 करोड़ डॉलर का सीड फंड जुटाने वाली इस कंपनी ने शुक्रवार को अपने इस नए सिस्टम को सामने रखा। शोधकर्ताओं और डेवलपर्स के लिए लाया गया यह मॉडल ग्लिम्प्स नाम से उतारा गया है, जिसे चैट इंटरफेस और एपीआई एक्सेस के साथ रिसर्च प्रीव्यू के तौर पर उपलब्ध कराया जा रहा है। कंपनी का मूल तर्क यह है कि भाषा और कोडिंग में माहिर होने के बावजूद मौजूदा एआई सिस्टम असल में इंसानों की तरह देख और समझ नहीं पाते।
विजुअल स्क्रैच स्पेस तकनीक कैसे करती है काम
अधिकांश आधुनिक मल्टीमॉडल सिस्टम किसी भी तस्वीर को सिर्फ एक बार देखते हैं, उसे टेक्स्ट टोकन में बदलते हैं और फिर अपनी याददाश्त के सहारे उस पर विचार करते हैं। यह तरीका बिल्कुल वैसा ही है जैसे कोई इंसान किसी पुरानी तस्वीर को देखकर बाद में अपनी स्मृति से उसका वर्णन करने की कोशिश करे। इसके उलट ग्लिम्प्स बार-बार मूल तस्वीर की तरफ लौटता है। जब यह किसी जटिल सवाल पर विचार कर रहा होता है, तब यह तस्वीर के किसी खास हिस्से को क्रॉप कर सकता है, किसी वीडियो क्लिप से विशिष्ट फ्रेम निकाल सकता है या फिर चीजों को नापने और तुलना करने के लिए कोड चला सकता है।
कंपनी इस पूरी प्रक्रिया को विजुअल स्क्रैच स्पेस का नाम देती है। आसान शब्दों में समझें तो यह बिल्कुल उस व्यवहार जैसा है जब कोई इंसान स्मार्टफोन की स्क्रीन पर उंगलियों से पिंच करके फोटो को ज़ूम करता है, ताकि वह बारीकी से जांच सके कि उसने जो देखा था वह सही है या नहीं।
बोर्ड गेम और आइकिया निर्देशों से उपजा विचार
गूगल डीपमाइंड के पूर्व शोधकर्ता और एलोरियन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एंड्रयू दाई को एआई की इस बड़ी कमजोरी का अहसास एक गेम नाइट के दौरान हुआ। पिछले साल उन्होंने अपने दोस्तों के साथ खेले गए एक बोर्ड गेम के खत्म होने पर उसकी तस्वीर खींची और उस समय के एक अग्रणी फ्रंटियर मॉडल से पूछा कि इस खेल में कौन जीत रहा है। वह सिस्टम इस आसान से सवाल का जवाब नहीं दे सका। बोर्ड गेम के बारे में एंड्रयू दाई का कहना है कि हर खेल की अपनी एक विजुअल भाषा होती है, अपने खास चिन्ह और प्रतीक होते हैं। एक वयस्क इंसान बिना ज्यादा लिखावट के भी केवल चिन्हों को देखकर खेल की स्थिति समझ लेता है, लेकिन मौजूदा मॉडल्स इन प्रतीकों के अर्थ को सहजता से नहीं पकड़ पाते।
एंड्रयू दाई ने आइकिया फर्नीचर का उदाहरण देते हुए सवाल उठाया कि जब इंसान बिना किसी टेक्स्ट वाले केवल रेखाचित्रों को देखकर फर्नीचर को जोड़ सकते हैं, तो फिर एआई मॉडल्स ऐसा क्यों नहीं कर पा रहे हैं। इसी सोच ने ग्लिम्प्स के विकास की नींव रखी।
कम लागत और फ्रंटियर मॉडल्स से बेहतर प्रदर्शन का दावा
रीजनिंग के दौरान क्रॉप और ज़ूम करने का यह तरीका पूरी तरह नया नहीं है, क्योंकि ओपनएआई ने वर्ष 2025 में अपनी ओ-सीरीज के मॉडल्स में इस तरह की सुविधा जोड़ी थी। हालांकि एलोरियन का दावा है कि उसने अपने पूरे मॉडल का ढांचा ही इसी सोच के इर्द-गिर्द तैयार किया है और इसे बेहद कम लागत में बनाया गया है। कंपनी के मुताबिक एक छोटी सी टीम ने महज कुछ सौ जीपीयू पर ग्लिम्प्स को प्रशिक्षित किया है। आकार के मामले में भी यह उन फ्रंटियर सिस्टम्स से काफी छोटा है जिनके खिलाफ इसके प्रदर्शन की तुलना की जा रही है।
कीमत के लिहाज से ग्लिम्प्स के इनपुट टोकन की दर 0.60 डॉलर प्रति 10 लाख टोकन और आउटपुट टोकन की दर 3 डॉलर प्रति 10 लाख टोकन रखी गई है। यह सॉनेट और सोल जैसे मध्यम स्तर के मॉडल्स की तुलना में सस्ता पड़ता है, जबकि हाइकू और लूना जैसे हल्के मॉडल्स से महंगा है। कंपनी के अपने मूल्यांकन बताते हैं कि साइंटिफिक चार्ट रीजनिंग और शॉर्ट-फॉर्म वीडियो कैप्शनिंग में ग्लिम्प्स ने जीपीटी-6 एस्ट्रा को भी पीछे छोड़ दिया है, जबकि अन्य विजुअल रीजनिंग परीक्षणों में भी इसके नतीजे बेहद प्रतिस्पर्धी रहे हैं।
रोबोटिक्स और भविष्य की योजनाएं
एलोरियन छह महीने पहले ही अपने स्टील्थ मोड से बाहर आई थी। कंपनी के सीड राउंड का सह-नेतृत्व स्ट्राइकर वेंचर पार्टनर्स, मेनलो वेंचर्स और अल्टिमीटर कैपिटल ने किया था, जिसमें एनवीडिया और गूगल के मुख्य वैज्ञानिक जेफ डीन ने भी व्यक्तिगत रूप से निवेश किया था। शुरुआती चरण में कंपनी उन उद्योगों को लक्षित कर रही है जिनके पास भारी मात्रा में वीडियो डेटा मौजूद है, जिनमें रोबोटिक्स कंपनियां, वैज्ञानिक प्रयोगशालाएं, मीडिया हाउस और क्रिएटिव फर्में शामिल हैं।
लंबी अवधि में कंपनी केवल विजुअल को देखने तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि देखने से आगे बढ़कर काम करने की क्षमता विकसित करना चाहती है। इसका सीधा मतलब है कि एआई किसी भी दृश्य का संपूर्ण 3डी या विजुअल मॉडल तैयार करे और उसके आधार पर फैसला लेकर रोबोट्स को सीधे नियंत्रित कर सके। एंड्रयू दाई के अनुसार अगले साल कंपनी का लक्ष्य दुनिया का सबसे बेहतरीन विजुअल रीजनिंग मॉडल तैयार करना है, जो हर विजुअल रीजनिंग टेस्ट में शीर्ष स्थान हासिल करे।



















