पौराणिक महागाथा पर आधारित आगामी फिल्म रामायण को लेकर चल रही चर्चाओं और इंटरनेट पर हो रही तीखी बहसों के बीच अभिनेता यश ने इस विशालकाय प्रोजेक्ट के पक्ष में खुलकर अपनी बात रखी है। पंद्रह अक्टूबर को आयोजित ट्रेलर लॉन्च कार्यक्रम के दौरान अभिनेता ने फिल्म के 4,000 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट को लेकर उठ रहे सवालों का विस्तार से जवाब दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्माता नमित मल्होत्रा द्वारा इस आंकड़े को सार्वजनिक रूप से साझा करने के पीछे एक बहुत ही सोची-समझी अंतरराष्ट्रीय रणनीति है, जिसे घरेलू दर्शकों को संकीर्ण नजरिए के बजाय वैश्विक परिप्रेक्ष्य में देखना चाहिए।
वैश्विक पहचान के लिए बड़े पैमाने का प्रदर्शन जरूरी
यश ने अंतरराष्ट्रीय फिल्म बाजार की वास्तविकताओं का उल्लेख करते हुए बताया कि भारतीय सिनेमा को विदेशी धरती पर तब तक वह सम्मान और गंभीरता नहीं मिल सकती, जब तक हम अपनी परियोजनाओं के विशाल आकार को पूरे आत्मविश्वास के साथ दुनिया के सामने न रखें। जब कोई फिल्म अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रिलीज की जाती है और उसके प्रचार अभियान विदेशी दर्शकों के बीच चलाए जाते हैं, तो वहां बजट का आंकड़ा परियोजना की गंभीरता को दर्शाता है। यदि निर्माता विदेश में जाकर यह कहेंगे कि उन्होंने बहुत ही सीमित संसाधनों या छोटे बजट में काम किया है, तो वैश्विक दर्शक और वहां का बाजार शायद उस फिल्म को वह तवज्जो नहीं देगा जिसकी वह वास्तविक हकदार है।
अपनी क्षमताओं को दुनिया के सामने आत्मविश्वास के साथ प्रस्तुत करने की वकालत करते हुए यश ने कहा कि हमें वैश्विक मंच पर यह बताने में कोई झिझक नहीं होनी चाहिए कि हमने अपनी संस्कृति और सिनेमा में कितना बड़ा निवेश किया है। यह भारी पूंजीगत निवेश इस बात का प्रमाण है कि भारतीय फिल्म उद्योग अब हॉलीवुड के स्तर पर दुनिया भर के सिनेमाघरों में मुकाबला करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
बजट में शामिल हैं दोनों हिस्से और अंतरराष्ट्रीय प्रचार खर्च
फिल्म के निर्माण खर्च की बारीकियों पर प्रकाश डालते हुए यश ने स्पष्ट किया कि 4,000 करोड़ रुपये का यह आंकड़ा किसी एक हिस्से का नहीं है, बल्कि यह रामायण के दोनों भागों को मिलाकर निर्धारित किया गया कुल बजट है। इस संपूर्ण धनराशि में केवल शूटिंग और सेट का खर्च ही शामिल नहीं है, बल्कि दोनों फिल्मों का व्यापक वीएफएक्स कार्य, वैश्विक रिलीज से जुड़ी तैयारियां और दुनिया भर में होने वाले विशाल प्रचार अभियानों की लागत भी जुड़ी हुई है।
अभिनेता के अनुसार, इस विशाल आंकड़े की बार-बार चर्चा करने का उद्देश्य फिजूलखर्ची का प्रदर्शन करना कतई नहीं है। इसका मुख्य ध्येय यह प्रदर्शित करना है कि भारतीय सिनेमा अब किस अभूतपूर्व स्तर पर कहानियों को पर्दे पर उतारने का साहस जुटा रहा है। जब इतने बड़े पैमाने का काम हो रहा हो, तो उस पर गर्व करने के बजाय निर्माता को लगातार कटघरे में खड़ा करना बेहद निराशाजनक मानसिकता को दर्शाता है।
नकारात्मकता और अंग्रेजों की फूट डालो नीति पर प्रहार
घरेलू स्तर पर फिल्म के विभिन्न पहलुओं को लेकर हो रही आलोचनाओं पर यश ने गहरा क्षोभ व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि जैसे ही नमित मल्होत्रा ने इस 4,000 करोड़ रुपये के बजट की घोषणा की, वैसे ही सोशल मीडिया पर लोगों ने उनका उपहास उड़ाना और उन पर तंज कसना शुरू कर दिया। अभिनेता ने दर्शकों और समीक्षकों से पुरजोर अपील की कि वे अपने ही देश के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट्स को नीचा दिखाने की आदत छोड़ें।
इतिहास का संदर्भ देते हुए यश ने कहा कि हमारे समाज को अंग्रेजों की उस पुरानी बांटो और राज करो वाली मानसिकता से बाहर निकलना होगा, जहां अपनों को ही गिराने की कोशिशें की जाती हैं। उन्होंने पूरे देश से एकजुट होकर इस फिल्म को सफल बनाने की दिशा में सकारात्मक ऊर्जा लगाने का आह्वान किया। इसके साथ ही, यश ने विशेष रूप से कर्नाटक के लोगों से आग्रह किया कि वे सिनेमाघरों में जाकर अपने पूरे परिवार के साथ इस महाकाव्य का आनंद लें और भारतीय सिनेमा के इस ऐतिहासिक प्रयास का हिस्सा बनें।
टीजर रिलीज होते ही तुलना और मीन-मेख निकालने की प्रवृत्ति
फिल्म की कास्टिंग, स्पेशल इफेक्ट्स और प्रोमोशनल सामग्री पर लगातार हो रही टिप्पणियों पर भी यश ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने रेखांकित किया कि हमारे देश में यह एक सामान्य चलन बन चुका है कि किसी भी बड़ी फिल्म का टीजर या ट्रेलर सामने आते ही लोग तुरंत अन्य विदेशी या घरेलू फिल्मों से उसकी अनुचित तुलना शुरू कर देते हैं। बिना पूरी फिल्म देखे लोग तुरंत यह निर्णय सुनाने लगते हैं कि वीएफएक्स का स्तर कैसा होना चाहिए था या फलां किरदार के लिए किसी अन्य अभिनेता को चुना जाना चाहिए था।
यश ने इस बात पर विशेष बल दिया कि किसी प्रोजेक्ट के आधिकारिक रूप से पर्दे पर आने से पहले ही उसका इस तरह पोस्टमार्टम करना कलाकारों और तकनीशियनों के मनोबल को चोट पहुंचाता है। देश के भीतर एक-दूसरे को नीचा दिखाने और घरेलू स्तर पर ही विभाजन पैदा करने की यह प्रवृत्ति हमारे अपने उद्योग के विकास में सबसे बड़ा रोड़ा है, जिसे अब पूरी तरह समाप्त किया जाना चाहिए।
मंच पर दिग्गज कलाकारों और तकनीशियनों की मौजूदगी
इस बहुचर्चित ट्रेलर लॉन्च समारोह में फिल्म जगत की कई प्रमुख हस्तियां एक साथ नजर आईं। फिल्म में भगवान राम की भूमिका निभा रहे रणबीर कपूर और माता सीता के किरदार में नजर आने वाली साई पल्लवी भी मंच पर मौजूद थीं। इनके अलावा अभिनेता रवि दुबे, अभिनेत्री रकुल प्रीत सिंह, राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता निर्देशक नितेश तिवारी और विश्वविख्यात ऑस्कर विजेता संगीतकार एआर रहमान ने भी इस विशेष अवसर पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। यश स्वयं इस भव्य महागाथा में लंकाधिपति रावण का अत्यंत महत्वपूर्ण किरदार निभाने के साथ-साथ एक सह निर्माता के रूप में भी पूरी परियोजना का नेतृत्व कर रहे हैं।



















