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अतुल कासबेकर ने याद की नाना पाटेकर की सादगी, फार्महाउस पर क्रू को खुद खिलाया था खानाबॉलीवुड
9 अक्तू॰ 2026, 11:57 am (19 दिन पहले)· 0

अतुल कासबेकर ने याद की नाना पाटेकर की सादगी, फार्महाउस पर क्रू को खुद खिलाया था खाना

नाना पाटेकर के निधन के बाद विख्यात फोटोग्राफर अतुल कासबेकर ने उनके फार्महाउस के आतिथ्य सत्कार और अनूठी हास्य भावना से जुड़ी भावुक यादें साझा की हैं।

भारतीय सिनेमा के प्रभावशाली अभिनेता नाना पाटेकर के 75 वर्ष की अवस्था में हुए देहावसान के बाद कला जगत स्तब्ध है। उनके जाने से उपजे शून्य के बीच अब उनसे जुड़े निजी संस्मरण सामने आ रहे हैं। अभिनय की दुनिया में अपने गंभीर तेवरों और अनूठे संवाद अदायगी के लिए पहचाने जाने वाले नाना पाटेकर निजी जीवन में बेहद सरल और आत्मीय मेजबान थे। उनके निधन के उपरांत जाने-माने फैशन और पोर्ट्रेट फोटोग्राफर अतुल कासबेकर ने एक भावुक संस्मरण साझा करते हुए बताया कि किस तरह पर्दे पर रौबदार दिखने वाला यह कलाकार अपने मेहमानों की सेवा में पूरी विनम्रता से जुट जाता था।

पुणे के निकट फार्महाउस पर हुआ था यादगार पोर्ट्रेट सेशन

अतुल कासबेकर ने अपनी विशेष पोर्ट्रेट शृंखला 'ऑनेस्ट: पोर्ट्रेट्स ऑफ कैरेक्टर' के दौरान नाना पाटेकर से मुलाकात की स्मृतियां ताजा कीं। यह संभवतः नाना साहेब के जीवन के अंतिम औपचारिक फोटो सत्रों में शामिल था। नाना ने उन्हें पुणे के पास स्थित अपने निजी फार्म पर आमंत्रित किया था। जब फोटोग्राफी टीम सफर पर निकली, तो नाना ने खुद फोन करके सबसे पहला सवाल यही पूछा कि उनके साथ कितने व्यक्ति आ रहे हैं। इस पूछताछ का मकसद किसी तरह की सीमा तय करना नहीं था, बल्कि यह सुनिश्चित करना था कि दोपहर के भोजन में किसी भी सदस्य को कोई कमी न रहे।

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स्पॉट बॉय से लेकर ड्राइवर तक को खुद परोसा भोजन

फार्महाउस पर पहुंचने के बाद का दृश्य किसी भी चकाचौंध से परे एक संवेदनशील इंसान की तस्वीर पेश करता था। अतुल कासबेकर के दल में शामिल हर सहायक, स्पॉट बॉय और वाहन चालक को नाना पाटेकर ने अपने भोजन कक्ष में बराबर बैठाया। अभिनेता ने खुद आगे बढ़कर सबको गरमा-गरम रोटियां और अपना विशेष मटन परोसा। एक ऐसा कलाकार जो कैमरे के सामने केवल आंखें तरेरकर पूरे सेट पर सन्नाटा खींच सकता था, वह अपने घर आए साधारण कामगारों की थाली में खुद खाना परोस रहा था। भोजन के उपरांत नाना ने अपनी पूरी संपत्ति और कसरतशाला दिखाई। वहां उन्होंने बिना किसी पूर्व तैयारी या वॉर्म-अप के सहजता से दर्जन भर ट्राइसेप डिप्स लगाकर अपनी शारीरिक तंदुरुस्ती का भी परिचय दिया।

अंतिम संस्कार की लकड़ियों पर भी की थी चुटीली टिप्पणी

इस मुलाकात के दौरान नाना पाटेकर ने फार्म पर जमा सूखी लकड़ियों का एक ढेर दिखाते हुए अपनी चिरपरिचित हास्य शैली का परिचय दिया था। उन्होंने बताया कि यह ढेर उनके अपने अंतिम संस्कार के लिए तैयार रखा गया है। लकड़ियों को पूरी तरह सूखा इसलिए रखा गया था ताकि जलते समय उनसे धुआं न उठे। नाना ने मुस्कुराते हुए कहा था कि वह नहीं चाहते कि उनकी शवयात्रा में आए लोग सिर्फ आंखों में धुआं लगने की वजह से आंसू बहाएं। अपने जाने के बारे में भी इस तरह का गहरा व्यंग्य केवल नाना पाटेकर जैसा निडर व्यक्तित्व ही कर सकता था।

डोंजे में राजकीय सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई

गोवा में अंतिम सांस लेने के बाद नाना पाटेकर के पार्थिव शरीर को पुणे ग्रामीण क्षेत्र के डोंजे गांव ले जाया गया। गुरुवार को इस पैतृक गांव में उनका अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ संपन्न हुआ। उनके पुत्र मल्हार ने पिता की पार्थिव देह को मुखाग्नि दी। इस दौरान विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक क्षेत्र की हस्तियों ने डोंजे पहुंचकर दिवंगत कलाकार को नमन किया। महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार, एकनाथ शिंदे, राज्य के मंत्री चंद्रकांत पाटिल, केंद्रीय राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल और कांग्रेस नेता भाई जगताप ने मौके पर मौजूद रहकर श्रद्धा सुमन अर्पित किए। परिवार के प्रति संवेदना जताते हुए उनके प्रशंसकों और करीबियों ने नाना साहेब के जीवन और उनकी सादगी को नमन किया।

सवाल-जवाब

नाना पाटेकर का निधन किस उम्र में और कहां हुआ?
नाना पाटेकर का निधन 75 वर्ष की उम्र में गोवा में हुआ।
नाना पाटेकर का अंतिम संस्कार कहां और किस तरह संपन्न हुआ?
उनका अंतिम संस्कार पुणे ग्रामीण के डोंजे गांव में राजकीय सम्मान के साथ किया गया, जहां उनके बेटे मल्हार ने मुखाग्नि दी।
अतुल कासबेकर ने नाना पाटेकर के फार्महाउस से जुड़ा कौन सा किस्सा बताया?
कासबेकर ने बताया कि फार्महाउस पहुंचने से पहले नाना ने दल के सदस्यों की संख्या पूछी थी और फिर वहां सभी ड्राइवर्स और सहायकों को खुद खाना परोसा था।
नाना पाटेकर के अंतिम संस्कार में कौन से प्रमुख नेता शामिल हुए?
अंतिम संस्कार में महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार, एकनाथ शिंदे, चंद्रकांत पाटिल, मुरलीधर मोहोल और भाई जगताप ने पहुंचकर श्रद्धांजलि दी।
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