सिनेमा जगत में किरदारों की तह तक जाने वाले संजीदा कलाकारों में मनोज बाजपेयी का नाम हमेशा पहली कतार में रखा जाता है। किसी भी भूमिका की तैयारी के लिए वे कितनी गहराई तक उतरते हैं, इसका एक दुर्लभ उदाहरण शेखर कपूर द्वारा निर्देशित बहुचर्चित फिल्म ‘बैंडिट क्वीन’ के निर्माण के दौरान देखने को मिला था। उस प्रोजेक्ट के दौरान अपने अभिनय को स्वाभाविक और प्रामाणिक बनाने के मकसद से मनोज बाजपेयी को सीधे एक वास्तविक डकैत मान सिंह के तौर तरीकों का बारीकी से अध्ययन करना पड़ा था। इस दौरान वे लगातार मान सिंह की गतिविधियों पर नजर रखते थे और उनके साथ काफी समय भी गुजारते थे। इस बेहद साहसिक अनुभव से जुड़ा उनका एक पुराना बयान सोशल मीडिया पर एक बार फिर लोगों का ध्यान खींच रहा है।
कपिल शर्मा के मंच पर जब साझा हुआ बीहड़ का अनुभव
कॉमेडी शो के मंच पर बातचीत करते हुए कपिल शर्मा ने जब मनोज बाजपेयी से यह सवाल किया कि क्या वास्तविक जिंदगी में उनका कभी किसी डकैत से सीधा आमना सामना हुआ है, तो अभिनेता ने तुरंत ‘बैंडिट क्वीन’ की शूटिंग के उन तनाव भरे दिनों को याद किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उस दौर की कई घटनाएं और अहसास आज भी उनकी स्मृतियों में पूरी तरह ताजा हैं। मनोज ने बताया कि फिल्म के निर्देशक शेखर कपूर ने ही उन्हें यह खास जिम्मेदारी सौंपी थी कि वे डकैत मान सिंह के रहन सहन, हाव भाव और बात करने के ढंग को बहुत नजदीक से समझें। इस निर्देश के बाद मनोज लगातार मान सिंह के साथ रहे ताकि पर्दे पर वे उस चरित्र को बिना किसी कृत्रिमता के पेश कर सकें।
कार की पिछली सीट और हर मोड़ पर घात का डर
दिन भर की शूटिंग और पैकअप समाप्त होने के बाद जब टीम लौटती थी, तब रात के घने अंधेरे में मान सिंह उसी गाड़ी में उनके साथ सफर करता था। मनोज बाजपेयी के अनुसार, गाड़ी में मान सिंह का व्यवहार किसी सामान्य यात्री जैसा कतई नहीं होता था। वह कभी भी आराम से टेक लगाकर नहीं बैठता था, बल्कि उसकी शारीरिक मुद्रा हमेशा ऐसी रहती थी जैसे वह किसी भी क्षण हमले का जवाब देने के लिए तैयार खड़ा हो। वह चारों तरफ की गतिविधियों और सड़क किनारे की हलचलों पर पैनी नजर रखता था। उसकी चौकसी इतनी अधिक थी कि वह अचानक ड्राइवर को गाड़ी बहुत तेज भगाने का आदेश देता, और कुछ ही पलों बाद अप्रत्याशित रूप से रफ्तार बिल्कुल धीमी करने को कह देता था।
पुरानी रंजिश और अनवरत सतर्कता का सबक
सफर के दौरान जब मनोज बाजपेयी ने उसकी इस अजीब बेचैनी और सतर्कता की वजह जानने की कोशिश की, तो यह हकीकत सामने आई कि बीहड़ की पुरानी रंजिशें कभी खत्म नहीं होतीं और विरोधी गिरोह का हमला किसी भी मोड़ पर हो सकता था। मान सिंह किसी भी संभावित खतरे को हल्के में लेने का जोखिम नहीं उठा सकता था। इसलिए वह सफर के प्रत्येक सेकंड में पूरी तरह सावधान रहता था। मनोज के लिए एक अपराधी के भीतर लगातार चलने वाले इस खौफ, चौकसी और मानसिक तनाव को इतने करीब से देखना एक रोंगटे खड़े कर देने वाला व्यावहारिक अनुभव साबित हुआ।
1994 की ऐतिहासिक फिल्म बैंडिट क्वीन और उसका असर
शेखर कपूर के निर्देशन में बनी फिल्म ‘बैंडिट क्वीन’ साल 1994 में रिलीज हुई थी। यह पूरी फिल्म फूलन देवी के जीवन संघर्ष, उनके बीहड़ में जाने की मजबूरियों और कई विवादित एवं कठिन पहलुओं पर आधारित थी। इस सिनेमाई कृति में मुख्य भूमिका यानी फूलन देवी का किरदार अभिनेत्री सीमा बिस्वास ने निभाया था, जिसे हिंदी सिनेमा के इतिहास के सबसे सशक्त और यादगार अभिनयों में गिना जाता है। मनोज बाजपेयी ने भी इस फिल्म में अपनी सशक्त मौजूदगी दर्ज कराई थी, जिसकी जमीन इसी तरह की गहन और जोखिम भरी तैयारी से तैयार हुई थी।

















