अनुराग कश्यप की फिल्म के बाद नवाजुद्दीन सिद्दीकी को मिले थे 200 ऑफर, ब्लैंक चेक तक ठुकराएगमले में गेंदे के पौधे से पाएं ढेरों बड़े फूल, जानिए बीज बोने और पोषण की सही तकनीकनियम तोड़ने पर बिग बॉस का कड़ा प्रहार, दूसरे नॉमिनेशन में कंटेस्टेंट्स की चालाकी पर फिरा पानीफिल्म टार्जन से बॉलीवुड में कदम रख सकते हैं शेरा के बेटे अबीर, सूरज पंचोली भी आ सकते हैं नजरधोखेबाज बिल्डर के खिलाफ सड़क पर उतरी अनुपमा, पीड़ितों को इंसाफ दिलाने की खाई कसमवीकेंड पर भी नहीं संभली अक्षय और सैफ की 'हैवान', तीन दिन में घरेलू बॉक्स ऑफिस पर केवल 7.35 करोड़प्लास्टिक के नीले ड्रम से छत पर बनाएं किचन गार्डन, इन पांच सब्जियों की होगी बंपर पैदावारचंदन रॉय का भोजपुरी धुन पर धमाकेदार डांस क्लिप इंटरनेट पर छाया, फैंस ने याद किया फुलेरा का दौरछोटे पर्दे को कूड़ादान कहे जाने पर बोले चेतन हंसराज, टीवी अभिनेताओं की क्षमता सिनेमाई कलाकारों से किसी मायने में कम नहींहिंदी सिनेमा का तख्तापलट: कैसे दो दिग्गज खन्ना अभिनेताओं के दौर ने अमिताभ बच्चन को बनाया महानायक
बैंडिट क्वीन की तैयारी के दौरान डकैत मान सिंह के साथ रहे थे मनोज बाजपेयी, कार सफर का सुनाया खौफनाक अनुभवबॉलीवुड
20 सित॰ 2026, 1:31 am (1 घंटे पहले)· 1

बैंडिट क्वीन की तैयारी के दौरान डकैत मान सिंह के साथ रहे थे मनोज बाजपेयी, कार सफर का सुनाया खौफनाक अनुभव

शेखर कपूर की चर्चित फिल्म बैंडिट क्वीन में अपने किरदार को जीवंत करने के लिए मनोज बाजपेयी ने असली डकैत मान सिंह के साथ वक्त बिताया था, जिसका पुराना किस्सा अब चर्चा में है।

सिनेमा जगत में किरदारों की तह तक जाने वाले संजीदा कलाकारों में मनोज बाजपेयी का नाम हमेशा पहली कतार में रखा जाता है। किसी भी भूमिका की तैयारी के लिए वे कितनी गहराई तक उतरते हैं, इसका एक दुर्लभ उदाहरण शेखर कपूर द्वारा निर्देशित बहुचर्चित फिल्म ‘बैंडिट क्वीन’ के निर्माण के दौरान देखने को मिला था। उस प्रोजेक्ट के दौरान अपने अभिनय को स्वाभाविक और प्रामाणिक बनाने के मकसद से मनोज बाजपेयी को सीधे एक वास्तविक डकैत मान सिंह के तौर तरीकों का बारीकी से अध्ययन करना पड़ा था। इस दौरान वे लगातार मान सिंह की गतिविधियों पर नजर रखते थे और उनके साथ काफी समय भी गुजारते थे। इस बेहद साहसिक अनुभव से जुड़ा उनका एक पुराना बयान सोशल मीडिया पर एक बार फिर लोगों का ध्यान खींच रहा है।

कपिल शर्मा के मंच पर जब साझा हुआ बीहड़ का अनुभव

कॉमेडी शो के मंच पर बातचीत करते हुए कपिल शर्मा ने जब मनोज बाजपेयी से यह सवाल किया कि क्या वास्तविक जिंदगी में उनका कभी किसी डकैत से सीधा आमना सामना हुआ है, तो अभिनेता ने तुरंत ‘बैंडिट क्वीन’ की शूटिंग के उन तनाव भरे दिनों को याद किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उस दौर की कई घटनाएं और अहसास आज भी उनकी स्मृतियों में पूरी तरह ताजा हैं। मनोज ने बताया कि फिल्म के निर्देशक शेखर कपूर ने ही उन्हें यह खास जिम्मेदारी सौंपी थी कि वे डकैत मान सिंह के रहन सहन, हाव भाव और बात करने के ढंग को बहुत नजदीक से समझें। इस निर्देश के बाद मनोज लगातार मान सिंह के साथ रहे ताकि पर्दे पर वे उस चरित्र को बिना किसी कृत्रिमता के पेश कर सकें।

ये भी पढ़ें

कार की पिछली सीट और हर मोड़ पर घात का डर

दिन भर की शूटिंग और पैकअप समाप्त होने के बाद जब टीम लौटती थी, तब रात के घने अंधेरे में मान सिंह उसी गाड़ी में उनके साथ सफर करता था। मनोज बाजपेयी के अनुसार, गाड़ी में मान सिंह का व्यवहार किसी सामान्य यात्री जैसा कतई नहीं होता था। वह कभी भी आराम से टेक लगाकर नहीं बैठता था, बल्कि उसकी शारीरिक मुद्रा हमेशा ऐसी रहती थी जैसे वह किसी भी क्षण हमले का जवाब देने के लिए तैयार खड़ा हो। वह चारों तरफ की गतिविधियों और सड़क किनारे की हलचलों पर पैनी नजर रखता था। उसकी चौकसी इतनी अधिक थी कि वह अचानक ड्राइवर को गाड़ी बहुत तेज भगाने का आदेश देता, और कुछ ही पलों बाद अप्रत्याशित रूप से रफ्तार बिल्कुल धीमी करने को कह देता था।

पुरानी रंजिश और अनवरत सतर्कता का सबक

सफर के दौरान जब मनोज बाजपेयी ने उसकी इस अजीब बेचैनी और सतर्कता की वजह जानने की कोशिश की, तो यह हकीकत सामने आई कि बीहड़ की पुरानी रंजिशें कभी खत्म नहीं होतीं और विरोधी गिरोह का हमला किसी भी मोड़ पर हो सकता था। मान सिंह किसी भी संभावित खतरे को हल्के में लेने का जोखिम नहीं उठा सकता था। इसलिए वह सफर के प्रत्येक सेकंड में पूरी तरह सावधान रहता था। मनोज के लिए एक अपराधी के भीतर लगातार चलने वाले इस खौफ, चौकसी और मानसिक तनाव को इतने करीब से देखना एक रोंगटे खड़े कर देने वाला व्यावहारिक अनुभव साबित हुआ।

1994 की ऐतिहासिक फिल्म बैंडिट क्वीन और उसका असर

शेखर कपूर के निर्देशन में बनी फिल्म ‘बैंडिट क्वीन’ साल 1994 में रिलीज हुई थी। यह पूरी फिल्म फूलन देवी के जीवन संघर्ष, उनके बीहड़ में जाने की मजबूरियों और कई विवादित एवं कठिन पहलुओं पर आधारित थी। इस सिनेमाई कृति में मुख्य भूमिका यानी फूलन देवी का किरदार अभिनेत्री सीमा बिस्वास ने निभाया था, जिसे हिंदी सिनेमा के इतिहास के सबसे सशक्त और यादगार अभिनयों में गिना जाता है। मनोज बाजपेयी ने भी इस फिल्म में अपनी सशक्त मौजूदगी दर्ज कराई थी, जिसकी जमीन इसी तरह की गहन और जोखिम भरी तैयारी से तैयार हुई थी।

सवाल-जवाब

मनोज बाजपेयी किस फिल्म की तैयारी के लिए डकैत मान सिंह के साथ रहे थे?
मनोज बाजपेयी ने 1994 में रिलीज हुई निर्देशक शेखर कपूर की फिल्म ‘बैंडिट क्वीन’ की तैयारी के दौरान डकैत मान सिंह के साथ समय बिताया था।
मनोज बाजपेयी को असली डकैत के साथ रहने का निर्देश किसने दिया था?
फिल्म के निर्देशक शेखर कपूर ने मनोज बाजपेयी को मान सिंह के हाव भाव और तौर तरीकों को करीब से समझने की जिम्मेदारी सौंपी थी।
गाड़ी में सफर करते समय डकैत मान सिंह का व्यवहार कैसा होता था?
मान सिंह गाड़ी में कभी आराम से नहीं बैठता था, बल्कि चारों तरफ नजर रखते हुए अचानक ड्राइवर को गाड़ी तेज या धीमी करने के निर्देश देता रहता था।
मान सिंह सफर के दौरान इतनी अधिक सतर्कता क्यों बरतता था?
पुरानी आपसी रंजिश के चलते कभी भी दुश्मन गिरोह के हमले का खतरा बना रहता था, इसलिए वह किसी भी आशंका को हल्के में नहीं लेता था।
फिल्म ‘बैंडिट क्वीन’ किस वर्ष रिलीज हुई थी और यह किसके जीवन पर आधारित थी?
यह फिल्म वर्ष 1994 में रिलीज हुई थी और यह फूलन देवी के जीवन की सच्ची घटनाओं और संघर्षों पर आधारित थी।
‘बैंडिट क्वीन’ में फूलन देवी की मुख्य भूमिका किस अभिनेत्री ने निभाई थी?
फिल्म ‘बैंडिट क्वीन’ में फूलन देवी का मुख्य किरदार अभिनेत्री सीमा बिस्वास ने निभाया था।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Tanvi Desai@tanvi-desai·42 मिनट पहले

मनोज बाजपेयी की यह पुरानी संस्मरण कहानी इस बात का जीवंत प्रमाण है कि नब्बे के दशक के भारतीय सिनेमा में यथार्थवाद लाने के लिए अभिनेताओं और निर्देशकों को कितनी जोखिम भरी कार्यप्रणालियों से गुजरना पड़ता था। आज के समय में जब अधिकांश स्ट्रीमिंग प्रोजेक्ट्स और हॉलीवुड-शैली के थ्रिलर वीएफएक्स या नियंत्रित स्टूडियो सेट पर रचे जाते हैं, तब इस तरह के बीहड़ के अनुभव डिजिटल कंटेंट के दौर में मेथड एक्टिंग की मूल परिभाषा को गहराई से रेखांकित करते हैं।

Sneha Kulkarni@sneha-kulkarni·42 मिनट पहले

यह वाकया दिखाता है कि नब्बे के दशक के सिनेमा में प्रामाणिकता सिर्फ एक शब्द नहीं, बल्कि जमीन पर किया गया कड़ा संघर्ष था। आज जब ओटीटी और सिनेमाघरों में रॉ और अनफिल्टर्ड कहानियों की मांग बढ़ रही है, तब मनोज बाजपेयी जैसे कलाकारों का यह समर्पण इस बात की याद दिलाता है कि वर्चुअल दुनिया और वीएफएक्स कभी भी बीहड़ के उस असली डर और मानवीय अनुभव की जगह नहीं ले सकते, जो परदे पर एक अमिट छाप छोड़ता है।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp