धार्मिक गुरु नीम करोली बाबा के दिव्य जीवन से प्रेरित सिनेमाई प्रस्तुति 'हनुमान अंश' इन दिनों भारतीय सिनेमाघरों में बॉक्स ऑफिस पर एक असाधारण सफलता की कहानी लिख रही है। केवल 26 दिनों के भीतर इस फिल्म ने 63 करोड़ रुपये से अधिक की शानदार कमाई कर ट्रेड विशेषज्ञों और आम दर्शकों दोनों को पूरी तरह से चौंका दिया है। शुरुआती दो हफ्तों में बहुत सीमित कमाई करने के बाद तीसरे हफ्ते में फिल्म के बिजनेस में एक अभूतपूर्व उछाल देखने को मिला। इसी बीच फिल्म की प्रोड्यूसर अनुप्रिया नागर का एक पुराना वीडियो सामने आया है जिसमें वह फिल्म की रिलीज से ठीक पहले प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु प्रेमानंद महाराज के आश्रम में उनका मार्गदर्शन प्राप्त करती नजर आ रही हैं।
बॉक्स ऑफिस पर जादुई उछाल और 'टॉक्सिक' से सीधा मुकाबला
थिएटर्स में 7 अगस्त 2026 को दस्तक देने वाली इस फिल्म का शुरुआती सफर बेहद धीमा रहा था। फिल्म ने अपने पहले सप्ताह में महज 1.08 करोड़ रुपये का कारोबार किया था, जबकि दूसरे सप्ताह में इसकी कमाई घटकर केवल 40 लाख रुपये रह गई थी। हालांकि, सकारात्मक समीक्षाओं और दर्शकों के बीच बढ़ते रुझान के कारण तीसरे सप्ताह से फिल्म के कलेक्शन में अभूतपूर्व बढ़त दर्ज की गई। फिल्म ने 26वें दिन यानी मंगलवार को 8.50 करोड़ रुपये का विशाल सिंगल-डे कलेक्शन दर्ज किया। इस आंकड़े के साथ फिल्म ने साउथ सुपरस्टार यश की बहुचर्चित फिल्म 'टॉक्सिक' के मंगलवार के 8.20 करोड़ रुपये के कलेक्शन को भी पीछे छोड़ दिया। फिल्म में मुख्य अभिनेता शोभिनव सत्य ने नीम करोली बाबा की भूमिका को पर्दे पर जीवंत किया है।
प्रेमानंद महाराज के आश्रम पहुंची थीं प्रोड्यूसर अनुप्रिया नागर
फिल्म की थियेट्रिकल रिलीज से पहले प्रोड्यूसर अनुप्रिया नागर ने वृंदावन स्थित आध्यात्मिक गुरु प्रेमानंद महाराज के दरबार में उपस्थिति दर्ज कराई थी। इस मुलाकात के दौरान अनुप्रिया ने महाराज जी के समक्ष एक महत्वपूर्ण प्रश्न रखा कि क्या कोई फिल्म निर्माता पूरी तरह से धार्मिक और सात्विक मार्ग पर चलते हुए किसी महान संत के जीवन पर फिल्म का निर्माण कर सकता है। इस विषय पर मार्गदर्शन करते हुए प्रेमानंद महाराज ने कहा कि महान संतों और उच्च आध्यात्मिक चेतना वाले महापुरुषों के जीवन को सिनेमा के पर्दे पर चित्रित करना कोई साधारण काम नहीं है, बल्कि यह एक अत्यंत गंभीर जिम्मेदारी का विषय है।
व्यावसायिकता से दूरी और चरित्र की पवित्रता पर जोर
प्रेमानंद महाराज ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आध्यात्मिक महापुरुषों के जीवन का अनुकरण करना अत्यंत कठिन होता है और ऐसे चरित्रों के चित्रण में किसी भी प्रकार की सांसारिक स्वार्थपरता या व्यावसायिक चालाकी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने फिल्म निर्माताओं को चेतावनी दी कि दर्शकों को आकर्षित करने या समाज में लोकप्रियता हासिल करने के उद्देश्य से फिल्म में ऐसी कोई भी मनगढ़ंत सामग्री न परोसी जाए जो संत के वास्तविक जीवन से मेल न खाती हो। गुरुदेव ने कहा कि महापुरुषों का जीवन और चरित्र पूरी तरह से सांसारिक वासनाओं से परे और लोककल्याणकारी होता है। इसलिए पटकथा लिखते समय केवल उसी सत्य को दिखाया जाना चाहिए जो शास्त्रों और प्रामाणिक वृत्तांतों में दर्ज है, बिना उसमें अपनी तरफ से कुछ साबित या अप्रमाणित करने का प्रयास किए।
कलाकारों के लिए साधना, सात्विक आहार और संतों के संग की शर्त
पर्दे पर अभिनय करने वाले कलाकारों की मानसिक और आत्मिक तैयारी पर बात करते हुए प्रेमानंद महाराज ने कहा कि नीम करोली बाबा जैसे भगवत प्राप्त संत का चरित्र निभाने के लिए केवल बाहरी अभिनय पर्याप्त नहीं है। ऐसे किरदार में सत्यता लाने के लिए अभिनेता के भीतर वैराग्य, भक्ति और ज्ञान की गहरी भावना होनी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि जो भी कलाकार ऐसे महान संत की भूमिका निभाना चाहता है, उसे शूटिंग के दौरान व्यक्तिगत साधना करनी होगी। कलाकार को केवल फल-फूल और शुद्ध सात्विक भोजन का सेवन करना चाहिए तथा निरंतर संतों की संगति में समय बिताना चाहिए। यदि जीवन में यह पवित्रता और अनुशासन नहीं होगा, तो अभिनय में कभी भी आध्यात्मिक सत्यता और प्रभाव पैदा नहीं हो सकता।



















