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पर्दे पर नौ किरदार निभाने वाले संजीव कुमार असल जिंदगी में क्यों रह गए तन्हाबॉलीवुड
10 सित॰ 2026, 11:32 pm (48 दिन पहले)· 1

पर्दे पर नौ किरदार निभाने वाले संजीव कुमार असल जिंदगी में क्यों रह गए तन्हा

हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता संजीव कुमार ने 1974 की फिल्म नया दिन नई रात में नौ अलग-अलग भूमिकाएं निभाकर इतिहास रचा था, लेकिन निजी जिंदगी में उनका प्रेम अधूरा रह गया।

हिंदी सिनेमा के इतिहास में कई ऐसे कलाकार हुए हैं जिन्होंने अपनी अनूठी अदाकारी से दर्शकों के दिलों पर अमिट छाप छोड़ी, लेकिन संजीव कुमार का स्थान हमेशा सबसे अलग रहा। अपने लगभग 25 साल लंबे फिल्मी सफर के दौरान उन्होंने महज 30 फिल्मों में काम किया, लेकिन हर एक किरदार में जो विविधता और गहराई उन्होंने दिखाई, वह भारतीय सिनेमा में मिसाल बन गई। वह उन दुर्लभ अभिनेताओं में शामिल थे जो अपनी असली उम्र की परवाह किए बिना पर्दे पर बेटे, पिता और यहां तक कि अत्यंत बुजुर्ग व्यक्ति की भूमिका भी पूरी सहजता के साथ निभाते थे।

बुढ़ापे के किरदार निभाने के पीछे की अनोखी सोच

संजीव कुमार अक्सर अपने समकालीनों से बिल्कुल अलग तरह के किरदार चुनते थे। जहां उस दौर के अन्य मुख्य अभिनेता सिर्फ युवा और रोमांटिक नायक की छवि तक सीमित रहना पसंद करते थे, वहीं संजीव कुमार ने उम्रदराज किरदारों को निभाने से कभी परहेज नहीं किया। इसके पीछे उनकी एक बेहद निजी और अजीब धारणा जुड़ी हुई थी। उनका मानना था कि उनकी उम्र ज्यादा लंबी नहीं होगी और वह असल जिंदगी में बुढ़ापा नहीं देख पाएंगे। इसी सोच के चलते वह फिल्मों में बुजुर्ग किरदारों को जीकर बुढ़ापे के अहसास को पर्दे पर ही महसूस कर लेना चाहते थे।

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एक ही फिल्म में नौ अलग भूमिकाएं निभाने का ऐतिहासिक कीर्तिमान

संजीव कुमार की बहुमुखी प्रतिभा का सबसे बड़ा प्रमाण साल 1974 में रिलीज हुई फिल्म नया दिन नई रात में देखने को मिला। इस फिल्म में उन्होंने एक या दो नहीं, बल्कि पूरे नौ अलग-अलग किरदार निभाकर सबको हैरान कर दिया था। उस दौर में किसी एक अभिनेता का एक ही कहानी के भीतर नौ विभिन्न रूप धारण करना और हर किरदार को एकदम अलग भाव-भंगिमा और आवाज देना एक असंभव सा काम माना जाता था।

जया बच्चन के साथ बनी यह फिल्म बॉक्स ऑफिस के पैमाने पर भले ही औसत प्रदर्शन कर पाई हो, लेकिन कला और अभिनय की दृष्टि से यह मील का पत्थर साबित हुई। समीक्षकों ने संजीव कुमार के इस असाधारण प्रयोग की दिल खोलकर तारीफ की। हर किरदार में उनकी चाल-ढाल, चेहरे के भाव और संवाद अदायगी इतनी अलग थी कि दर्शक दांतों तले उंगली दबाने को मजबूर हो गए थे।

हेमा मालिनी के साथ मशहूर जोड़ी और यादगार फिल्में

संजीव कुमार के करियर की चर्चा हेमा मालिनी के बिना पूरी नहीं हो सकती। इन दोनों कलाकारों ने मिलकर दर्शकों को कई ऐसी फिल्में दीं, जिनमें न केवल बेहतरीन रोमांस दिखा बल्कि इंसानी रिश्तों की उलझनों को भी गहराई से पर्दे पर उतारा गया। दोनों की ऑन-स्क्रीन जोड़ी में एक अनोखा ठहराव और स्वाभाविकता नजर आती थी। एक तरफ हेमा मालिनी की बेमिसाल खूबसूरती और दूसरी तरफ संजीव कुमार का संजीदा अभिनय जब स्क्रीन पर मिलते थे, तो जादू बिखर जाता था।

दोनों कलाकारों ने सीता और गीता, नया जमाना, त्रिशूल और स्वर्ग नरक जैसी कई चर्चित फिल्मों में एक साथ अभिनय किया। हर फिल्म में उनके किरदारों के आपसी संबंध का स्वरूप बिल्कुल अलग होता था। कहीं दोनों के बीच गहरा प्रेम दिखाया गया, तो कहीं कहानी की परिस्थितियों ने उन्हें एक-दूसरे के आमने-सामने लाकर खड़ा कर दिया। नया जमाना में उनकी जोड़ी को दर्शकों ने बेहद पसंद किया, वहीं त्रिशूल जैसी बड़ी फिल्म में दोनों की मौजूदगी ने कहानी को बहुत मजबूत बना दिया था।

शादी की एक शर्त और अधूरी रह गई प्रेम कहानी

फिल्मों के सेट पर साथ काम करते-करते दोनों के बीच गहरी दोस्ती और नजदीकी बढ़ गई थी। उनके निजी जीवन का यह तालमेल जल्द ही प्यार में बदल गया और फिल्म जगत में यह चर्चा आम हो गई कि दोनों बहुत जल्द शादी के बंधन में बंध सकते हैं। संजीव कुमार हेमा मालिनी से शादी करने के लिए पूरी तरह तैयार थे, लेकिन उन्होंने इस रिश्ते के सामने एक खास शर्त रख दी।

संजीव कुमार की शर्त यह थी कि शादी के बाद हेमा मालिनी को फिल्मों में काम करना बंद करना होगा और गृहस्थ जीवन संभालना होगा। हेमा मालिनी अपने करियर के चरम पर थीं और वह अभिनय की दुनिया को इस तरह अलविदा कहने के पक्ष में बिल्कुल नहीं थीं। नतीजतन, हेमा मालिनी ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया और दोनों के रास्ते हमेशा के लिए अलग हो गए।

तन्हाई में बीता जीवन और 47 की उम्र में दुखद अंत

इस रिश्ते के टूटने के बाद हेमा मालिनी ने धर्मेंद्र के साथ अपनी जिंदगी का नया अध्याय शुरू किया। वहीं दूसरी ओर संजीव कुमार इस अलगाव के सदमे से कभी पूरी तरह उबर नहीं पाए। उन्होंने ताउम्र किसी और से शादी नहीं की और अकेलेपन को ही अपना साथी बना लिया।

जीवन के अंतिम दिनों तक वह सच्चे प्यार और हमसफर के साथ को तरसते रहे। आखिरकार, दिल का दौरा पड़ने के कारण महज 47 वर्ष की अल्पायु में उनका निधन हो गया। जिस अभिनेता ने पर्दे पर जिंदगी के हर रंग और हर उम्र को जिया था, असल जिंदगी में उसकी कहानी तन्हाई के साए में ही खामोशी से खत्म हो गई।

सवाल-जवाब

संजीव कुमार ने किस फिल्म में नौ किरदार निभाए थे?
संजीव कुमार ने 1974 में आई फिल्म नया दिन नई रात में नौ अलग-अलग किरदार निभाए थे, जिसमें जया बच्चन भी सह-कलाकार थीं।
संजीव कुमार अपनी उम्र से बड़े रोल क्यों चुनते थे?
उनका मानना था कि वह ज्यादा उम्र तक जीवित नहीं रहेंगे, इसलिए वह फिल्मों के माध्यम से बुढ़ापे की अवस्था का अहसास करना चाहते थे।
हेमा मालिनी और संजीव कुमार का रिश्ता क्यों टूटा?
संजीव कुमार चाहते थे कि हेमा मालिनी शादी के बाद अभिनय छोड़ दें, लेकिन इस शर्त को नामंजूर करते हुए हेमा मालिनी ने प्रस्ताव ठुकरा दिया।
संजीव कुमार का निधन किस उम्र में और कैसे हुआ?
संजीव कुमार का निधन 47 वर्ष की आयु में दिल का दौरा पड़ने से हुआ था।
संजीव कुमार और हेमा मालिनी ने किन प्रमुख फिल्मों में साथ काम किया?
दोनों ने सीता और गीता, नया जमाना, त्रिशूल और स्वर्ग नरक जैसी प्रमुख फिल्मों में एक साथ अभिनय किया था।
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