दक्षिण भारतीय सिनेमा की वयोवृद्ध अभिनेत्री और पद्म श्री सम्मान से अलंकृत सौकार जानकी का स्वास्थ्य अचानक बिगड़ने के कारण उन्हें चेन्नई के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। 94 वर्ष की उम्र में स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के चलते डॉक्टरों ने एहतियातन उन्हें गहन चिकित्सा इकाई यानी आईसीयू में रखा है। चिकित्सा विशेषज्ञों की एक विशेष टीम लगातार उनकी स्थिति पर नजर बनाए हुए है। इस खबर के सार्वजनिक होते ही देशभर के सिनेमा प्रेमियों, कला जगत के दिग्गजों और उनके लाखों प्रशंसकों के बीच चिंता की लहर दौड़ गई है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लोग लगातार उनके शीघ्र और पूर्ण स्वस्थ होने की प्रार्थनाएं कर रहे हैं।
सात दशकों से अधिक का सिनेमाई सफर और अद्वितीय बहुमुखी प्रतिभा
सौकार जानकी का जन्म 12 दिसंबर 1931 को एक कन्नड़ भाषी परिवार में हुआ था। उन्होंने अपने असाधारण अभिनय कौशल और समर्पण से भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक अमिट छाप छोड़ी है। सात दशकों से अधिक लंबे अपने शानदार कलात्मक करियर के दौरान उन्होंने भारतीय फिल्म उद्योग को कई कालजयी रचनाएं दी हैं। उन्होंने मुख्य रूप से तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम भाषा के सिनेमा में अपनी अदाकारी का लोहा मनवाया। अपने करियर में उन्होंने 450 से भी अधिक फीचर फिल्मों में विविध और चुनौतीपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। फिल्मों के अलावा, रंगमंच के प्रति उनका झुकाव भी अटूट रहा, जहां उन्होंने 300 से अधिक मंच नाटकों में भाग लेकर अपनी अभिनय क्षमता को निधारा।
'शावुकारु' से मिली विशिष्ट पहचान और कन्नड़ सिनेमा का पहला पैन-इंडिया मील का पत्थर
सौकार जानकी के अभिनय सफर की शुरुआत प्रसिद्ध निर्देशक एलवी प्रसाद के निर्देशन में बनी तेलुगु फिल्म 'शावुकारु' से हुई थी। इस फिल्म में उनके सशक्त अभिनय को दर्शकों और समीक्षकों ने खूब सराहा। फिल्म की अपार सफलता के बाद 'शावुकारु' शब्द उनके नाम का स्थायी हिस्सा बन गया और वे सिनेमा जगत में 'सौकार जानकी' के नाम से पहचानी जाने लगीं। इसके बाद वर्ष 1952 में उन्होंने फिल्म 'वलैयापति' से तमिल सिनेमा में अपना सफल पदार्पण किया।
वर्ष 1959 में आई कन्नड़ फिल्म 'महिषासुर मर्दिनी' उनके करियर की एक युगगामी उपलब्धि साबित हुई। दिग्गज अभिनेता डॉ राजकुमार के साथ अभिनीत इस फिल्म को कन्नड़ फिल्म उद्योग की पहली पैन-इंडिया फिल्म का दर्जा प्राप्त है। इसके अलावा उन्होंने 'इरु कोडुगल', 'थिरुनीलकंठार', 'बाटासारी' और 'पुधिया परवई' जैसी कई बेहद सफल और स्मरणीय फिल्मों में अपने अभिनय का जादू बिखेरा।
राष्ट्रीय सम्मान, नागरिक पुरस्कार और 2023 की हालिया फिल्म
भारतीय कला और सिनेमा के क्षेत्र में अद्वितीय योगदान के लिए सौकार जानकी को कई उच्च स्तरीय पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। उन्हें आंध्र प्रदेश सरकार के प्रतिष्ठित 'नंदी पुरस्कार' और तमिलनाडु सरकार के 'कलैमणि' सम्मान से नवाजा गया। इसके साथ ही भारत सरकार ने उनकी कलात्मक सेवाओं को मान्यता देते हुए देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'पद्म श्री' से अलंकृत किया था। राष्ट्रपति भवन की ओर से उनके इस नागरिक सम्मान से जुड़े पलों को साझा भी किया गया था, जिसे X पर देखा जा सकता है।
उम्र के नौवें दशक में भी कला के प्रति उनका जुनून कम नहीं हुआ। वे हाल के वर्षों तक अभिनय के क्षेत्र में सक्रिय बनी रहीं। उन्हें बड़े पर्दे पर अंतिम बार वर्ष 2023 में रिलीज हुई तेलुगु फिल्म 'अन्नी मंची शकुनामुले' में देखा गया था, जिसमें उन्होंने परिवार की बुजुर्ग दादी का एक बेहद जीवंत और भावनात्मक पात्र निभाया था। वर्तमान में पूरा मनोरंजन जगत और उनके करोड़ों प्रशंसक उनके शीघ्र स्वस्थ होकर घर लौटने की कामना कर रहे हैं।



















