अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में मजबूती का रुख देखा जा रहा है। एशियाई कारोबार के दौरान वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी डब्ल्यूटीआई क्रूड ऑयल का भाव 86.00 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता नजर आया। अमेरिकी कच्चे तेल के इस प्रमुख बेंचमार्क में एक महीने के उच्च स्तर के करीब स्थिरता देखी जा रही है। बाजार के कारोबारी इस समय मध्य पूर्व में तेजी से बदलते घटनाक्रमों और आपूर्ति को लेकर उत्पन्न जोखिमों का सूक्ष्मता से आकलन कर रहे हैं। हालांकि अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन की हालिया रिपोर्ट में कच्चे तेल के भंडार में बढ़ोतरी दर्ज की गई है, लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते वाकयुद्ध तथा नौसैनिक गतिविधियों ने आपूर्ति बाधिक होने की आशंकाओं को जन्म दे दिया है। इसके चलते तेल की कीमतों को निचले स्तरों पर मजबूत सहारा मिलता दिख रहा है।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव तथा प्रतिबंधों की चेतावनी
कच्चे तेल के बाजार में तेजी का मुख्य कारण अमेरिका द्वारा ईरान के खिलाफ घोषित कड़ा रुख है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को ईरान के खिलाफ अब तक की सबसे कठोर आर्थिक कार्रवाई करने की चेतावनी दी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जो भी देश, वित्तीय संस्थान, व्यावसायिक इकाइयां, हवाई अड्डे या सरकारी एजेंसियां तेहरान की मदद करती पाई जाएंगी, उन्हें गंभीर अमेरिकी प्रतिबंधों और दंडात्मक मुकदमों का सामना करना पड़ेगा। अमेरिका के इस कड़े रुख का ईरान की ओर से भी तीखा विरोध देखने को मिला है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिकी बयानों की कड़ी निंदा करते हुए नए आर्थिक प्रतिबंधों की धमकी को पूरी तरह से गैर-कानूनी और अमानवीय करार दिया है।
सेंटकॉम की नौसैनिक कार्रवाई और आपूर्ति श्रृंखला पर असर
सैन्य मोर्चे पर भी तनाव में भारी इजाफा दर्ज किया गया है। अमेरिकी सेंट्रल कमान यानी सेंटकॉम ने जानकारी दी है कि उसके नौसैनिक बलों ने ईरान से जुड़े व्यापारिक जहाजों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। सेंटकॉम के अनुसार, पुनः लागू की गई नौसैनिक नाकेबंदी को प्रभावी बनाने के लिए अमेरिकी बलों ने ईरानी बंदरगाहों की ओर जाने वाले या वहां से आने वाले 67 मर्चेंट जहाजों का रास्ता बदला है, तीन जहाजों को परिचालन से बाहर कर दिया है और दो अन्य जहाजों पर खुद चढ़कर तलाशी ली है। सैन्य विशेषज्ञों और ऊर्जा विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच प्रत्यक्ष संघर्ष का यह गहन दौर निकट भविष्य में कच्चे तेल की वैश्विक आपूर्ति प्रणाली को बाधित कर सकता है। यही भू-राजनीतिक डर डब्ल्यूटीआई क्रूड की कीमतों को ऊपरी स्तरों पर बनाए रखने में अहम भूमिका निभा रहा है।
वित्तीय संस्थानों का आकलन और बाजार की स्थिति
वैश्विक वित्तीय अध्ययन संस्थान टीडी सिक्योरिटीज के विश्लेषकों के अनुसार, कच्चे तेल का परिदृश्य इस समय बेहद अनिश्चित और तनावपूर्ण बना हुआ है। संस्था का कहना है कि दोनों पक्षों के बीच कूटनीतिक वार्ता हफ्तों से ठप पड़ी है और अमेरिका द्वारा आर्थिक दबाव बढ़ाने की रणनीति से यह स्पष्ट होता है कि आने वाले दिनों में बाजार में कच्चे तेल का प्रवाह गंभीर रूप से तंग बना रह सकता है। टीडी सिक्योरिटीज ने यह चेतावनी भी दी है कि ओमान के समुद्री जलमार्ग में ईरानी नौसैनिक आक्रामकता आगे भी जारी रहने की पूरी संभावना है। यह जलमार्ग वैश्विक तेल परिवहन का एक अत्यंत संवेदनशील बिंदु है, जहां किसी भी प्रकार का व्यवधान कच्चे तेल की कीमतों को अचानक नई ऊंचाई पर पहुंचा सकता है। यही कारण है कि फंडामेंटल आधार पर तेल का रुझान सकारात्मक बना हुआ है।
अमेरिकी तेल भंडार के आंकड़े और मांग-आपूर्ति का संतुलन
भू-राजनीतिक जोखिमों के विपरीत, अमेरिकी घरेलू मोर्चे से आए आंकड़ों ने तेल की तेजी पर कुछ हद तक ब्रेक लगाने का काम किया है। अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन यानी ईआईए द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, 14 अगस्त को समाप्त हुए सप्ताह में अमेरिका के वाणिज्यिक कच्चे तेल के भंडार में 4.4 मिलियन बैरल की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। आमतौर पर तेल भंडार में वृद्धि मांग में सुस्ती या आपूर्ति की अधिकता को दर्शाती है, जिससे कीमतों पर दबाव बनता है। हालांकि, मौजूदा माहौल में मध्य पूर्व के तनाव ने इन्वेंट्री में हुई इस बढ़ोतरी के नकारात्मक प्रभाव को काफी हद तक बेअसर कर दिया है, जिससे कीमतें 86 डॉलर के आसपास टिकी रहने में सफल रही हैं।
डब्ल्यूटीआई क्रूड का तकनीकी विश्लेषण और महत्वपूर्ण स्तर
दैनिक चार्ट पर डब्ल्यूटीआई क्रूड ऑयल का तकनीकी परिदृश्य काफी मजबूत और सकारात्मक नजर आ रहा है। हालिया गिरावट के बाद तेल का भाव अपने 100-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज यानी एसएमए और बॉलिंगर बैंड्स की मध्य रेखा के ऊपर निकलने में कामयाब रहा है, जो एक टिकाऊ अपट्रेंड का संकेत देता है। 14-अवधि का रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स यानी आरएसआई 59.00 के स्तर पर बना हुआ है, जो यह दर्शाता है कि बाजार में खरीदारी की गति बनी हुई है और यह अभी ओवरबॉट जोन में नहीं पहुंचा है। ऊपर की तरफ पहला तात्कालिक प्रतिरोध बॉलिंगर बैंड के ऊपरी सिरे 88.18 डॉलर पर देखा जा रहा है, जहां से मुनाफावसूली आ सकती है। वहीं नीचे की ओर 100-दिवसीय एसएमए 85.85 डॉलर पर पहला सहारा देगा, जिसके बाद बॉलिंगर का मध्य बैंड 81.20 डॉलर और निचला बैंड 74.25 डॉलर पर मजबूत सपोर्ट प्रदान करेगा।
डब्ल्यूटीआई क्रूड की मूलभूत विशेषताएं और कुशिंग हब
वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बेचे जाने वाले कच्चे तेल का एक प्रमुख प्रकार है। वैश्विक तेल बाजार में तीन सबसे बड़े बेंचमार्क माने जाते हैं, जिनमें डब्ल्यूटीआई के अलावा ब्रेंट क्रूड और दुबई क्रूड शामिल हैं। डब्ल्यूटीआई को तेल उद्योग में लाइट और स्वीट क्रूड के रूप में जाना जाता है, क्योंकि इसमें एपीआई ग्रेविटी अधिक और सल्फर यानी गंधक की मात्रा काफी कम होती है। अपनी इस उच्च गुणवत्ता के कारण इसे पेट्रोल और डीजल जैसे ईंधनों में रिफाइन करना बेहद आसान और सस्ता होता है। यह कच्चा तेल मुख्य रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका में निकाला जाता है और ओकलाहोमा स्थित कुशिंग हब के माध्यम से देश भर में वितरित किया जाता है। कुशिंग को दुनिया में पाइपलाइनों का चौराहा माना जाता है और यहीं से तय होने वाले भाव अंतरराष्ट्रीय मीडिया में व्यापक रूप से उद्धृत किए जाते हैं।
तेल की कीमतों को प्रभावित करने वाले प्रमुख वैश्विक कारक
किसी भी अन्य वित्तीय परिसंपत्ति की तरह डब्ल्यूटीआई क्रूड की कीमतें भी मांग और आपूर्ति के मूलभूत नियमों से तय होती हैं। वैश्विक आर्थिक वृद्धि में तेजी से ईंधन की मांग बढ़ती है, जो कीमतों को ऊपर ले जाती है, जबकि मंदी के दौर में मांग घटने से भाव गिरते हैं। राजनीतिक अस्थिरता, युद्ध और व्यापारिक प्रतिबंध आपूर्ति बाधित करके कीमतों में उछाल लाते हैं। इसके अलावा 12 तेल उत्पादक देशों के संगठन ओपेक और रूस जैसे गैर-ओपेक सहयोगियों वाले ओपेक+ समूह के उत्पादन फैसले भी बाजार पर सीधा असर डालते हैं। जब ओपेक उत्पादन में कटौती करता है तो वैश्विक आपूर्ति कम हो जाती है, जिससे तेल महंगा होता है। चूंकि कच्चे तेल का वैश्विक व्यापार अमेरिकी डॉलर में होता है, इसलिए डॉलर की विनिमय दर में मजबूती या कमजोरी भी तेल की खरीदार क्षमता को सीधे प्रभावित करती है।
इन्वेंट्री रिपोर्टों का महत्व और अंतर-सरकारी डेटा
कच्चे तेल के अल्पकालिक मूल्य निर्धारण में साप्ताहिक इन्वेंट्री रिपोर्टों की बहुत बड़ी भूमिका होती है। अमेरिका में दो प्रमुख संस्थाएं ये आंकड़े जारी करती हैं, जिनमें अमेरिकन पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट यानी एपीआई और सरकारी संस्था ईआईए शामिल हैं। एपीआई अपनी रिपोर्ट हर मंगलवार को जारी करता है, जबकि ईआईए के आंकड़े बुधवार को आते हैं। लगभग 75 प्रतिशत मामलों में इन दोनों रिपोर्टों के निष्कर्ष 1 प्रतिशत के अंतर के भीतर एक समान होते हैं। हालांकि, वित्तीय बाजार और संस्थागत निवेशक ईआईए के आंकड़ों को अधिक विश्वसनीय मानते हैं क्योंकि यह एक आधिकारिक सरकारी एजेंसी है। इन्वेंट्री में गिरावट मांग में तेजी का संकेत देती है, जिससे कीमतें बढ़ती हैं, जबकि इन्वेंट्री में बढ़ोतरी कीमतों को नीचे धकेलती है।
वैश्विक मुद्रा बाजार और अन्य परिसंपत्तियों का हाल
कच्चे तेल के अलावा अन्य वैश्विक वित्तीय बाजारों में भी हलचल देखी जा रही है। एशियाई कारोबारी घंटों के दौरान ब्रिटिश पाउंड के मुकाबले अमेरिकी डॉलर कमजोर पड़ा, जिससे जीबीपी/यूएसडी जोड़ी 1.3645 के स्तर के करीब मजबूत होती दिखी। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदें कम होने से डॉलर पर दबाव देखा गया। वहीं यूरो/यूएसडी जोड़ी में भी निचले स्तरों से खरीदारी दर्ज की गई और यह 1.1700 के स्तर की तरफ बढ़ती नजर आई। दूसरी ओर, कीमती धातुओं में भी चमक बढ़ी है और सोना अपने 200-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज से ऊपर निकलते हुए 4,544 डॉलर प्रति औंस के नए उच्च स्तर पर पहुंच गया है, जिसे डॉलर की कमजोरी का सीधा फायदा मिला है।
अमेरिकी राष्ट्रीय कर्ज और बॉन्ड बाजार में तरलता के उपाय
अन्तरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के सामने अमेरिकी राष्ट्रीय कर्ज का मुद्दा भी एक बड़ी चुनौती बनकर उभर रहा है। अमेरिका का कुल राष्ट्रीय ऋण 40 ट्रिलियन डॉलर के ऐतिहासिक आंकड़े के करीब पहुंच गया है। वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि यह स्थिति अमेरिकी अर्थव्यवस्था को कर्ज के एक गहरे संकट की ओर धकेल रही है, विशेषकर 1.4 ट्रिलियन डॉलर के विशाल प्राइवेट क्रेडिट बाजार में जोखिम काफी बढ़ गए हैं। इस बीच, अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने बॉन्ड बाजार को सहारा देने के लिए अपने पूर्व निर्धारित कैलेंडर से हटकर कदम उठाया है। ट्रेजरी ने 10 से 30 वर्ष की अवधि वाले दीर्घकालिक सरकारी बॉन्ड्स में तरलता बढ़ाने के लिए बायबैक ऑपरेशन्स की सीमा को 2 बिलियन डॉलर से बढ़ाकर कम से कम 4 बिलियन डॉलर प्रति ऑपरेशन करने का फैसला किया है, जो 9 सितंबर से लागू होकर 4 नवंबर तक चलेगा।



















