चित्रकूट जिले के मानिकपुर पाठा क्षेत्र में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण बरदहा नदी उफान पर आ गई है। नदी का जलस्तर पिछले 9 दिनों से खतरनाक रूप से बढ़ा हुआ है, जिससे रपटे के ऊपर तेज धार में पानी बह रहा है। इस स्थिति के चलते आधा दर्जन से अधिक गांवों का जिला मुख्यालय से संपर्क पूरी तरह टूट गया है। स्थानीय निवासी भोजन, स्वास्थ्य सेवाओं और दैनिक जरूरतों के लिए भारी कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राहत दल और चिकित्सा टीमों को मौके पर रवाना किया है।
जलभराव से कई गांवों का संपर्क कटा
मानिकपुर पाठा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली चमरौहा बरदहा नदी में अचानक आए उफान ने जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। पिछले 9 दिनों से जारी जलभराव के कारण चमरौहा, मऊ और गुरदारी जैसे प्रमुख गांवों के साथ-साथ पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश की ओर जाने वाले यात्रियों की आवाजाही ठप पड़ गई है। जलस्तर में बढ़ोतरी होने से निचले रपटे पानी में डूब गए हैं, जिससे वाहनों का चलना तो दूर, पैदल जाना भी जानलेवा बन गया है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि लगातार 8 से 9 दिनों से उनका सामान्य जीवन ठप हो गया है। दैनिक राशन सामग्री जुटाने, बीमार लोगों को अस्पताल पहुंचाने और बच्चों को स्कूल भेजने जैसी बुनियादी आवश्यकताएं भी पूरी नहीं हो पा रही हैं। कई परिवार राहत सामग्री के इंतजार में अपने घरों तक सीमित रहने को मजबूर हैं।
नैनी से पीएसी की 42वीं वाहिनी और डॉक्टर्स की टीम तैनात
स्थिति को बिगड़ने से रोकने के लिए चित्रकूट के जिलाधिकारी पुलकित गर्ग ने कड़े निर्देश जारी किए हैं। प्रशासन की ओर से नैनी स्थित 42वीं वाहिनी पीएसी की राहत-बचाव टीम को तुरंत मानिकपुर भेजा गया है। इसके अलावा मानिकपुर थाना पुलिस को भी रपटे और नदी के तटबंधों पर तैनात किया गया है ताकि कोई भी ग्रामीण खतरे वाले रास्ते से नदी पार करने की कोशिश न करे।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में ग्रामीणों को सुरक्षित एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने के लिए प्रशासन ने स्टीमर और मोटर बोट का इंतजाम किया है। पीएसी की टीम मोटर बोट के माध्यम से नदी पार कराकर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रही है। साथ ही फंसे हुए ग्रामीणों तक आवश्यक खाद्य सामग्री, पीने का शुद्ध पानी और दवाइयां भी पहुंचाई जा रही हैं। चिकित्सा दल के डॉक्टर मौके पर पहुंचकर बीमार और बुजुर्ग लोगों का इलाज कर रहे हैं।
स्थायी पुल की मांग को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी
चमरौहा गांव के निवासी मनोज कुमार ने क्षेत्र की स्थायी समस्या पर प्रकाश डालते हुए बताया कि बरदहा नदी पर पुल न होना हर साल बरसात के मौसम में एक बड़ी मुसीबत बन जाता है। जैसे ही मानिकपुर पाठा क्षेत्र में तेज बारिश होती है, चमरौहा का रपटा पानी में डूब जाता है और आधा दर्जन से अधिक गांव कट जाते हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव के समय जनप्रतिनिधि बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन चुनाव बीतते ही स्थायी पुल के निर्माण की मांग को भूल जाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अगर बरदहा नदी पर एक पक्का और ऊंचा पुल बना दिया जाए, तो हर साल मानसून में उत्पन्न होने वाली इस भयावह समस्या से दर्जनों गांवों के लोगों को हमेशा के लिए निजात मिल सकती है।
प्रशासनिक चेतावनी और 24 घंटे का कंट्रोल रूम नंबर जारी
चित्रकूट के जिलाधिकारी पुलकित गर्ग ने स्थिति का जायजा लेते हुए बताया कि चमरौहा क्षेत्र के कुछ रास्ते ऐसे निचले इलाकों में आते हैं जहां अत्यधिक वर्षा के दौरान जलभराव हो जाता है। उन्होंने पुष्टि की कि फ्लड प्लाटून और डॉक्टरों की टीम मोटर बोट के जरिए प्रभावित गांवों में पहुंचकर निरंतर सहायता प्रदान कर रही है।
जिला प्रशासन ने किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए एक समर्पित कंट्रोल रूम नंबर 8737991456 जारी किया है। जिलाधिकारी ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे अपनी समस्या की जानकारी कंट्रोल रूम, संबंधित तहसील अधिकारी या सीधे जिलाधिकारी कार्यालय को दे सकते हैं, जिसके बाद तुरंत राहत दल भेजा जाएगा। इसके साथ ही प्रशासन ने लोगों को उफनती नदी, नालों और रपटों के पास न जाने की सख्त सलाह दी है।





















